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अनैतिक तो जीवन में कुछ नहीं होता

हिंदी कहानी में प्रियंवद का अपना मकाम है. जादू-जगाती भाषा, अनदेखे-अनजाने परिवेश-पात्र प्रियंवद की कहानियों में ऐसे आते हैं कि पाठक दांतों तले ऊँगली दबाते रह जाते हैं. न उनके लेखन में कोई झोल है न जीवन में. इस बातचीत से तो ऐसा ही लगता है. उनसे यह बातचीत प्रेम …

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