Home / Tag Archives: rajkamal prakashan

Tag Archives: rajkamal prakashan

नक्शे, सरहदें, शांति,  लघु जीवन और कला की एकरूपता से सजी है ‘बिसात पर जुगनू’

वंदना राग के उपन्यास ‘बिसात पर जुगनू’ पर यह टिप्पणी राजीव कुमार की ने लिखी है। उपन्यास राजकमल से प्रकाशित है- =============== “हम सब इत्तिहाद से बने हैं। हम सबमें एक दूसरे का कोई ना कोई हिस्सा है। इंसान इस सच से रू – ब – रू हो जाए तो …

Read More »

स्त्री-कविता का सबसे बड़ा योगदान यही है कि उसने एक चटाई बिछाई है

रेखा सेठी हिंदी की सुपरिचित आलोचक हैं। हिंदी की स्त्री कविता पर उनकी किताब आई है ‘स्त्री कविता पहचान और द्वंद्व’ तथा ‘स्त्री कविता पक्ष और परिप्रेक्ष्य’।राजकमल से आई दोनों किताबों का कल दोनों का लोकार्पण है। फ़िलहाल आप एक अंश पढ़िए जो अनामिका की बातचीत का एक अंश है- …

Read More »

विनय कुमार की पुस्तक ‘यक्षिणी’ से दो कविताएँ

देश के जाने माने मनोचिकित्सक विनय कुमार को हम हिंदी वाले कवि-लेखक के रूप में  जानते हैं। राजकमल प्रकाशन से प्रकाशित उनकी किताब ‘यक्षिणी’ दीदारगंज की यक्षिणी की प्रतिमा को केंद्र में रखकर लिखी गई एक लम्बी सीरीज़ है। आज उसी संकलन से दो कविताएँ- मॉडरेटर ================================== 1 जिस जगह …

Read More »

मार तमाम के दौर में ‘कहीं कुछ नहीं’

मैंने अपनी पीढ़ी के सबसे मौलिक कथाकार शशिभूषण द्विवेदी के कहानी संग्रह ‘कहीं कुछ नहीं’ की समीक्षा  ‘हंस’ पत्रिका में की है। राजकमल प्रकाशन से प्रकाशित इस संग्रह की समीक्षा हंस के नए अंक में प्रकाशित हुई है। जिन्होंने न पढ़ी हो उनके लिए- प्रभात रंजन सन 2000 के बाद …

Read More »

एक इतिहासकार की दास्तानगोई

हाल में ही युवा इतिहासकार, लेखक सदन झा की पुस्तक आई है ‘देवनागरी जगत की दृश्य संस्कृति’। पुस्तक का प्रकाशन रज़ा पुस्तकमाला के तहत राजकमल प्रकाशन से हुआ है। पुस्तक की समीक्षा पढ़िए। लेखक हैं राकेश मिश्र जो गुजरात सेंट्रल यूनिवर्सिटी में शोध छात्र हैं- मॉडरेटर ============================ हिंदी जगत में …

Read More »

सुजाता के उपन्यास के ‘एक बटा दो’ का अंश-इन जॉयफुल हॉप ऑफ रेजरेक्शन

युवा लेखिका सुजाता का उपन्यास  ‘एक बटा दो’ राजकमल प्रकाशन से प्रकाशित हुआ है। स्त्री जीवन को लेकर लिखा गया यह उपन्यास अपने कथानक और भाषा दोनों में अलग है। इस अंश को पढ़िए और बताइएगा- मॉडरेटर =========================   इन जॉयफुल हॉप ऑफ रेजरेक्शन कभी जिस एकांत की ख़ूब कामना …

Read More »

राष्ट्रवाद और सामंतवाद के मध्य पिसता किसान और ‘अवध का किसान विद्रोह’

राजकमल प्रकाशन से प्रकाशित सुभाष चंद्र कुशवाहा की किताब ‘अवध का किसान विद्रोह’ पर यह टिप्पणी प्रवीण झा ने लिखी है। प्रवीण झा की पुस्तक ‘कूली लाइंस’ आजकल ख़ासी चर्चा में है- मॉडरेटर ======================= राष्ट्रवाद और सामंतवाद के मध्य पिसता किसान। सुभाष चंद्र कुशवाहा जी की पुस्तक ‘अवध का किसान …

Read More »

नमिता गोखले के उपन्यास ‘राग पहाड़ी’ का एक अंश

कुमाऊँ अंचल से मुझे प्यार है और यह जगाया है कुछ साहित्यिक कृतियों ने। उन कृतियों में हिंदी की तमाम कृतियों के अलावा अंग्रेज़ी के कुछ उपन्यासों का योगदान भी रहा है। जिनमें एक नाम नमिता गोखले के उपन्यास ‘दि हिमालयन लव स्टोरी’ का भी है। मुझे याद है मनोहर …

Read More »

‘भीमराव अम्बेडकर: एक जीवनी’ पुस्तक का एक अंश

क्रिस्तोफ ज़ाफ़्रलो लिखित ‘भीमराव अम्बेडकर: एक जीवनी’ का हिंदी अनुवाद हाल में ही राजकमल प्रकाशन से प्रकाशित हुआ है। हिंदी अनुवाद योगेन्द्र दत्त ने किया है। आज बाबासाहेब की जयंती पर उस किताब का एक चुनिंदा अंश पढ़िए- मॉडरेटर ===================================== इस किताब का मक़सद आम्बेडकर के जीवन की घटनाओं को …

Read More »

‘पालतू बोहेमियन’ के लेखक के नाम वरिष्ठ लेखक सुरेन्द्र मोहन पाठक का पत्र

वरिष्ठ लेखक सुरेन्द्र मोहन पाठक जी ने मेरी किताब ‘पालतू बोहेमियन’ पढ़कर मुझे एक पत्र लिखा है। यह मेरे लिए गर्व की बात है और इस किताब की क़िस्मत भी कि पाठक जी ने ने केवल पढ़ने का समय निकाला बल्कि पढ़ने के बाद अपनी बहुमूल्य राय भी ज़ाहिर की। …

Read More »