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Tag Archives: praveen kumar jha

हम जैसों को अमृतलाल वेगड़ जी कल्पनाओं में ही मिले, और कल्पना में ही दूर हो गए

नर्मदा नदी की यात्रा करके उस पर किताबें लिखने वाले अमृतलाल वेगड़ आज नहीं रहे. उनकी स्मृति में यह श्रद्धांजलि लिखी है नॉर्वे-प्रवासी डॉक्टर लेखक प्रवीण झा ने- मॉडरेटर ================================= हम जैसों को अमृतलाल जी कल्पनाओं में ही मिले, और कल्पना में ही दूर हो गए। जैसे कुमार गंधर्व, जैसे …

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दुनिया की सबसे नीरस किताब कौन सी होगी?

नॉर्वे-प्रवासी डॉक्टर प्रवीण झा के लेखन से, लेखन की धार से हम सब अच्छी तरह परिचित हैं. न उनके पास लिखने के लिए विषयों की कमी पड़ती है, न कभी भाषा में झोल पड़ता है. बस एक बात और कि इस बार जानकी पुल पर उनकी चिट्ठी बहुत दिनों बाद …

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चिनार के झड़ते पत्ते और कोरिया की रानी री

प्रवीण झा नौर्वे में रेडियोलोजिस्ट हैं. शायद ही कोई ऐसा विषय है जिसके ऊपर वे न लिखते हों. इस बार जानकी पुल पर बड़े दिनों बाद लौटे हैं. एक अनूठे गद्य के साथ- मॉडरेटर =============================================== राजा की गद्दी। अनुवाद यही ठीक रहेगा। एक बहुमंजिली इमारत की इक्कीसवीं मंजिल का वो …

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फांकी युग है और सब फांकीबाज़ हैं!

बहुत दिनों बाद प्रवीण झा अपने व्यंग्यावतार में प्रकट हुए हैं. इस बार एक नए युग की घोषणा कर रहे हैं- फांकी युग की. आइये पढ़िए- मॉडरेटर ================= फेसबुक के एक पोस्ट पर ‘लाइक’ गिन रहा था कि कवि कक्का का मेसैज आ गया। “आज फिर फांकिए?” गाँव गया था तो कक्का को ‘स्मार्ट-फ़ोन’ दे आया था। अब कक्का ‘व्हाट्स-ऐप्प’ करते हैं। मैनें फ़ोन घुमाया। “प्रणाम कक्का! कुछ गलती हो गयी?” “जीते रहो! लेकिन कुछ लिखो, तो पढ़ कर लिखो। आंकड़े लिखो। रिफ़रेंस दो। गप्प ही देना है तो आओ साथ भांग घोटते गप्प देंगें।” “कक्का! एक पत्रकार मित्र ने कहा लेख लिखो, तो लिख दिया।” “राम मिलाए जोड़ी। एक पत्रकार और एक फंटूसी डॉक्टर मिलकर अर्थव्यवस्था समझा रहे हैं। यहाँ भी वही, टी.वी. पर भी वही। सड़क सेपकड़ पैनल में बिठा लेते हैं। सब बेसिरपैर गप्प मारते हैं फांकीबाज!” “कक्का! अब मैं कौन सा टी.वी. पर बोल रहा हूँ? फ़ेसबुक पर ही तो…” “अच्छा! तो फ़ेसबुक है कि फांकीबुक?  तुम्हारी कोई गलती नहीं। यह युग ही ‘फांकी-युग’ है।।” “फांकी-युग? कक्का! यह ज्यादा हो गया। यह तो तकनीकी युग है। डिजिटल युग।” “तकनीकी युग तो बना ही फाँ…रने के लिए है।” कक्का की पीक थूकने की आवाज आई। “क्यों कक्का? तकनीक से सब आसान हो गया।” “तकनीक का आविष्कार ही हुआ कि मनुष्य फांकी मार सके। सब काम कम्पूटर करे, आदमी फूटानी मारे। टॉफ्लर का किताब सब पढ़ो।बूझाएगा। फ्यूचर शॉक पढ़ो फ्यूचर शॉक।” “अच्छा कक्का! अब ये भी बता दें कि आपका ये युग शुरू कब हुआ?” “1984 ई. में।” “अब यह क्या है कक्का?” “चौरासी! अड़तालीस का उल्टा चौरासी। ऐप्पल का कम्प्यूटर आया। ऐड्स का वायरस आया। नया वाला गाँधी आया। रूस में गोर्बाचोव चमका,अमरीका में रीगन। और वो गाना आया, प्यार प्यार प्यार, तोहफा तोहफा तोहफा….” “अाप और आपके तर्क। सब भांग का असर है कक्का। यह प्रगतिवादी युग है।” “किसका? हिंदी का? साठ में साफ हो गया।” “तो क्या 84 के बाद कुछ लिखा नहीं गया?” “लिखा तो गया, पर पढ़ा नहीं गया। सब फांकीबाज!” “ऐसे न कहिए कक्का। हाँ! हिंदुस्तान में अंग्रेजी का जमाना आया।” …

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जेमिथांग घाटी वाले नक्सल बाबा की चिट्ठी

इधर लेखिका अरुंधती राय को लेकर वाद-विवाद संवाद चल रहा है उधर नक्सली बाबा की चिट्ठी आ गई. अपने नॉर्वे-प्रवासी डॉक्टर प्रवीण कुमार झा को मिली है यह चिट्ठी. आप भी पढ़िए- मॉडरेटर ============================================== कल जेमिथांग घाटी वाले नक्सल बाबा की चिट्ठी आई। नक्सल बाबा मेरे पुराने बंगाली मित्र हैं।अंग्रेजी …

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धर्म जनता की अफीम है- कार्ल मार्क्स

अपने नॉर्वे प्रवासी डॉ प्रवीण झा का लेखन का रेंज इतना विस्तृत है कि कभी कभी आश्चर्य होता है. उनके अनुवाद में प्रस्तुत है आज कार्ल मार्क्स के उस प्रसिद्ध लेख का अनुवाद किया है जिसमें मार्क्स ने लिखा था कि धर्म जनता की अफीम है- मॉडरेटर ============= यह लेख …

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लोग मरने के बाद स्वर्ग जाते हैं पर कुमार गंधर्व तो आए ही स्वर्ग से थे!

आज कुमार गन्धर्व की जयंती है. शास्त्रीय संगीत के इस अप्रतिम गायक को याद करते हुए नॉर्वे प्रवासी डॉ. प्रवीण कुमार झा ने यह बहुत अच्छा लेख लिखा है. एकदम आम आदमी के नजरिये से- मॉडरेटर ============================================ बिना फेफड़े के कोई महान गायक बन सकता है? वो भी हिंदुस्तानी संगीत …

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किशोरी जी तो चली गई अब ढूँढते रहिए सुर!

कल किशोरी अमोनकर के निधन के बाद हमने बहुत कुछ पढ़ा. बहुत कुछ जाना. एक लेख यह भी पढ़ लीजिये. नॉर्वे प्रवासी डॉ. प्रवीण कुमार झा ने लिखा है. वे शास्त्रीय संगीत के गहरे ज्ञाता हैं और और मेरे जैसे शास्त्रीय ज्ञान से हीन लोगों को उनकी भाषा में समझाना-सिखाना …

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भगवा जीता इस फगवा में, गावे गाम भदेस। जोगीरा सा रा रा रा।”

होली पर स्पेशल चिट्ठी नॉर्वे से डॉ. व्यंग्यकार प्रवीण कुमार झा की आई है. भगवा के फगवा की चर्चा वहां भी है. कवि कक्का पूरे रंग में हैं- मॉडरेटर ==================== कवि कक्का आज रंग में हैं। पिछले महिने ही अपना वामपंथी लाल जनेऊ बदल कर केसरिया जनेऊ किया, और होली …

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रेणु जी के ‘मैला आँचल’ के अंश-पाठ का ऑडियो-वीडियो

आज फणीश्वरनाथ रेणु का जन्मदिन है. उनके उपन्यास ‘मैला आँचल’ के बारे में अनेक विद्वानों का यह मानना है कि यह हिंदी के सबसे अच्छे उपन्यासों में एक है. आज उसके एक अंश का बहुत सुन्दर पाठ प्रवीण झा ने किया है और उतना ही अच्छा वीडियो  भी बनाया है. …

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