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Tag Archives: yatish kumar

उसने मुझे मजनू की तरह चाहा और लैला बना दिया

वरिष्ठ लेखिका ममता कालिया की किताब ‘रवि कथा’ आई है। वाणी प्रकाशन से प्रकाशित इस किताब की अपने अन्दाज़ में काव्यात्मक समीक्षा की है यतीश कुमार ने- अन्दाज़-ए-बयॉं उर्फ रवि कथा – ममता कालिया   यह सुखद संयोग है कि “ग़ालिब छुटी शराब” कुछ महीने पहले ही पढ़ी मैंने। सारे …

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कृष्णनाथ की पुस्तक ‘पृथ्वी परिक्रमा’ की काव्यात्मक समीक्षा

कृष्णनाथ की प्रसिद्ध पुस्तक ‘पृथ्वी परिक्रमा’ की यह कविता समीक्षा की है यतीश कुमार ने। आप भी आनंद लीजिए-  ===============   1.   पश्चिमी हवा है और यात्रा भी पर ध्येय तो पूरबी है और जिज्ञासा भी   सहज निसर्ग आनंद की तलाश बाह्य परिवर्तनों को बूझने का लक्ष्य किसिम-किसिम …

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कविता शुक्रवार 13: यतीश कुमार की कविताएँ संजू जैन के चित्र

कविता शुक्रवार के इस अंक में यतीश कुमार की कविताएं और संजू जैन के चित्र शामिल हैं।यतीश कुमार (चार्टर्ड इंजीनियर और फेलो) भारतीय रेल सेवा के प्रशासनिक अधिकारी हैं। 22 वर्षों की रेल सेवा के बाद उन्हें भारत वर्ष के “सार्वजनिक क्षेत्र का उपक्रम” का सबसे युवा अध्यक्ष एवं प्रबन्ध …

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‘दीवार में एक खिड़की रहती थी’ की काव्यात्मक समीक्षा

लेखक-कवि यतीश कुमार ने काव्यात्मक समीक्षा की अपनी शैली विकसित की और हिंदी की अनेक श्रेष्ठ कृतियों की काव्यात्मक समीक्षा अब तक कर चुके हैं। इस बार उन्होंने विनोद कुमार शुक्ल के उपन्यास ‘दीवार में एक खिड़की रहती थी’ की समीक्षा की है। आप भी पढ़ सकते हैं- ======================== 1. …

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कलिकथा: मंज़िल वाया बाइपास: यतीश कुमार

यतीश कुमार ने काव्यात्मक समीक्षा की अपनी विशेष शैली विकसित की और इस शैली में वे अनेक पुस्तकों की समीक्षाएँ लिख चुके हैं। इसी कड़ी में आज पढ़िए अलका सरावगी के उपन्यास ‘कलि कथा वाया बाइपास’(राजकमल प्रकाशन) की समीक्षा। 1990 के दशक के आख़िरी सालों में जिस उपन्यास ने बड़े पैमाने …

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स्पीति में बारिश-कृष्णनाथ को पढ़ते हुए

  कृष्णनाथ के यात्रा वृत्तांतों का अलग महत्व रहा है। उनके यात्रा-वृत्त ‘स्पीति में बारिश’ को पढ़ते हुए यतीश कुमार ने यह काव्यात्मक समीक्षा लिखी है। किताबों पर काव्यात्मक टिप्पणी करने की यतीश जी की अपनी शैली है। उस शैली में किसी किताब पर लिखे को पढ़ने का अपना सुख …

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‘मुझे चाँद चाहिए’ पढ़ते हुए कुछ कविताएँ

मुझे याद है बीसवीं शताब्दी के आख़िरी वर्षों में सुरेन्द्र वर्मा का उपन्यास ‘मुझे चाँद चाहिए’ प्रकाशित हुआ था। नाटकों-फ़िल्मों की दुनिया के संघर्ष, संबंधों, सफलता-असफलता की कहानियों में गुँथे इस उपन्यास को लेकर तब बहुत बहस हुई थी। याद आता है सुधीश पचौरी ने इसकी समीक्षा लिखते हुए उसका …

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सवाल अब भी आँखे तरेरे खड़ा है- और कितने पाकिस्तान?

कमलेश्वर का उपन्यास ‘कितने पाकिस्तान’ सन 2000 में प्रकाशित हुआ था। इस उपन्यास के अभी तक 18 संस्करण प्रकाशित हो चुके हैं और हिंदी के आलोचकों द्वारा नज़रअन्दाज़ किए गए इस उपन्यास को पाठकों का भरपूर प्यार मिला। उपन्यास में एक अदीब है जो जैसे सभ्यता समीक्षा कर रहा है। …

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‘पीली छतरी वाली लड़की’ की काव्य समीक्षा

यतीश कुमार की काव्यात्मक समीक्षा इस बार उदय प्रकाश के उपन्यास ‘पीली छतरी वाली लड़की’ की है। पढ़कर बताइए कैसा लगा- =================== (‘पीली छतरी वाली लड़की’ ) ——————————————-   वह रोज आईने में पहले अपनी शक्ल देखता फिर समाज को अपनी शक्ल में खोजता   समाज के आईने से प्रतिबिम्ब …

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यतीश कुमार द्वारा ‘मैला आँचल’ की काव्यात्मक समीक्षा

युवा कवि यतीश कुमार की काव्यात्मक समीक्षाओं के क्रम में इस बार पढ़िए रेणु के उपन्यास ‘मैला आँचल’ पर उनकी यह टिप्पणी। यह रेणु जी की जन्म शताब्दी का साल है। उनकी रचनाओं को नए सिरे से पढ़ने, नए संदर्भों में समझने का साल है- ===========================   मैला आँचल -पढ़ते …

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