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Tag Archives: yatish kumar

किरण सिंह के कथा-संग्रह ‘यीशु की कीलें’ की समीक्षा

किरण सिंह के कहानी संग्रह ‘यीशु की कीलें’ की कहानियों को पढ़कर युवा कवि लेखक यतीश कुमार ने इतनी अच्छी काव्यात्मक समीक्षा की है कि किताब पढ़ने का मन हो आया। आप तब तक यह समीक्षा पढ़िए मैं ‘यीशु की कीलें’ ऑर्डर करने जा रहा हूँ- प्रभात रंजन ========================   …

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‘थोड़ी- सी ज़मीन थोड़ा आसमान’ की काव्यात्मक समीक्षा

यतीश कुमार बहुत दिनों बाद अपनी काव्यात्मक समीक्षा के साथ वापस लौटे हैं।इस बार उन्होंने जयश्री रॉय की किताब ‘थोड़ी- सी ज़मीन थोड़ा आसमान’ को पढ़ते हुए कविताएँ लिखी हैं। यह किताब वाणी प्रकाशन से प्रकाशित है- ===================       1.     साँस की हाँफ में गलफड़ों का …

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‘अंबपाली’ पर यतीश कुमार की टिप्पणी

वरिष्ठ लेखिका गीताश्री के उपन्यास ‘अंबपाली’ पर यह टिप्पणी लिखी है कवि यतीश कुमार ने। एक पढ़ने लायक टिप्पणी- ========================== रचनाकार गीता श्री ने इस उपन्यास को लिखने के पहले अपने मन मस्तिष्क को उस काल के साँचे में ढाला है ताकि वहाँ की आवाज़ हम सुन सकें। भाषा को …

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इजाडोरा की प्रेमकथा की काव्यात्मक समीक्षा

यतीश कुमार ने पुस्तकों की काव्यात्मक समीक्षा की एक शैली विकसित की। आज लम्बे समय के बाद उन्होंने पुनः एक पुस्तक की समीक्षा की है। पुस्तक है इज़ाडोरा डंकन की आत्मकथा ‘my life’  के हिंदी अनुवाद ‘इज़ाडोरा की प्रेमकथा’। पुस्तक संवाद प्रकाशन से प्रकाशित है। आप समीक्षा पढ़िए- =======================   …

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‘अंतस की खुरचन’ पर एक समीक्षात्मक टिप्पणी

कवि यतीश कुमार का कविता संग्रह ‘अंतस की खुरचन’ जब से प्रकाशित हुआ है लगातार चर्चा में बना हुआ है। उसकी समीक्षा लिखी है मृत्युंजय ने। आप भी पढ़ सकते हैं- ========================= किसका हाथ पहले पकड़ें     यतीश की कविता जीवन के सूक्ष्मतर अनुभव और अनुभावों का छायाचित्र आंकती चलती …

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आशुतोष राणा की किताब पर यतीश कुमार की टिप्पणी

फ़िल्म अभिनेता आशुतोष राणा के व्यंग्य लेखकों का संकलन प्रभात प्रकाशन से प्रकाशित हुआ है- ‘मौन मुस्कान की मार’। इस पुस्तक पर एक सुंदर टिप्पणी लिखी है कवि यतीश कुमार ने। आप भी पढ़ सकते हैं- ===================   कई बड़े कलाकारों के साक्षात्कार में सुना है कि अभिनय शैली में …

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‘जूठन’ की काव्यात्मक समीक्षा

यतीश कुमार ने पुस्तकों पर काव्यात्मक टिप्पणी कर अपनी विशेष पहचान बनाई है। आज पढ़िए उनकी अपनी शैली में ओमप्रकाश वाल्मीकि की आत्मकथा ‘जूठन’ पर टिप्पणी- ===========================   डॉक्टर तुलसी राम की लिखी ‘मुर्दहिया’ और ‘मणिकर्णिका’ पढ़ने के बाद एक आलेख लिखा था। कई मित्रों ने यह सुझाया कि ओमप्रकाश …

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‘बिसात पर जुगनू’ की काव्यात्मक समीक्षा

यतीश कुमार की काव्यात्मक समीक्षा शैली से हम सब बखूबी परिचित हैं। आज उन्होंने अपनी शैली में वंदना राग के उपन्यास ‘बिसात पर जुगनू’ की समीक्षा की है। मौका लगे तो पढ़िएगा- ===============================   सुना है कि पुराने ज़माने में जुगनुओं को एक डिब्बे में बंद कर उससे रात में …

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‘अपेक्षाओं के बियाबान’ में कुछ कविताएँ

निधि अग्रवाल की कई कहानियाँ मुझे भी पसंद हैं। उनके कहानी संग्रह ‘अपेक्षाओं के बियाबान’ की कहानियों को पढ़ते हुए यह काव्यात्मक टिप्पणी की है यतीश कुमार ने, जो अपनी काव्यात्मक समीक्षा के लिए जाने जाते रहे हैं। आप भी पढ़िए- प्रभात रंजन =================== स्मृतियों के प्रेत से मुक्ति पाने …

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‘राजनटनी’ उपन्यास की काव्यात्मक समीक्षा

हाल में गीताश्री का उपन्यास ‘राजनटनी’ प्रकाशित हुआ है, जिसकी काव्यात्मक समीक्षा की है यतीश कुमार ने- ================================= राजनटनी 1. योजनाओं की भी अपनी यात्रा होती है जो घटने के लिए भटकती हैं   वे ख़ानाबदोश हैं जो अपने साथ फूलों और मिट्टियों की खुशबू लिए भटकते हैं   घोर …

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