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देश छूटकर भी कहाँ छूट पाता है

वरिष्ठ लेखिका सूर्यबाला के उपन्यास ‘कौन देस को वासी: वेणु की डायरी’ की यह समीक्षा समीक्षा लिखी है मधु गुप्ता ने। मधु गुप्ता इंदिरा गांधी महिला महाविद्यालय में लगभग पैंतीस वर्ष तक अध्यापन के बाद स्वतंत्र लेखन कर रही हैं। आप राजकमल प्रकाशन से प्रकाशित इस उपन्यास की समीक्षा पढ़िए- …

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मियाँ मक़सूद अली ‘ख़ुशदिल’ की कहानी

आज पढ़िए वसी हैदर एक सॉफ़्टवेयर इंजीनियर हैं और जाने-माने ऑनलाइन बुक्स मार्केट्प्लेस उर्दू बाज़ार के संस्थापक हैं। वसी पिछले 4 सालों से दास्तानगोई कलेक्टिव से भी जुड़े हुए हैं और कई दास्तान सुना चुके हैं। उर्दू अदब से ख़ास जुड़ाव और किताबें पढ़ने का शौक़ इनको लिखने की तरफ़ …

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कुंदन यादव की कहानी ‘मुखाग्नि’

आज पढ़िए कुंदन यादव की कहानी ‘मुखाग्नि’। कुंदन यादव जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के विद्यार्थी रहे हैं, फुलब्राइट स्कॉलर के तौर पर इलिनॉय विश्वविद्यालय, शिकागो में हिन्दी और भारतीय संस्कृति का अध्यापन कर चुके हैं। भारतीय राजस्व सेवा के अधिकारी हैं। लेकिन हमारे लिए लेखक हैं और आप उनकी इस कहानी …

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प्रेम और मृत्यु और शोक की तरफ गईं कविता

वरिष्ठ कवयित्री सविता सिंह के कविता संग्रह ‘खोई हुई चीजों का शोक’ पर यह टिप्पणी लिखी है वरिष्ठ लेखिका जया जादवानी ने। राधाकृष्ण प्रकाशन से प्रकाशित सविता सिंह के कविता संग्रह पर यह टिप्पणी आप भी पढ़ सकते हैं- ========================== ‘खोई हुई चीजों का शोक’ सविता सिंह का नया कविता …

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मैं शहर में नहीं शहर मुझमें बस गए!

पूनम दुबे दुनिया के अलग अलग शहरों पर लिखती रही हैं। डेनमार्क की राजधानी कोपेनहेगन पर पहले भी लिख चुकी हैं। इस बार वहाँ के समर यानी गर्मियों पर लिखा है। पढ़िएगा- =============== जून के साथ-साथ कोपनहेगन में समर का आगमन हो गया है। महीनों से फ़िज़ा में लिपटी उलझी …

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आज के संकट और हिंदी कहानी: मनोज कुमार पांडेय

हिंदी कहानी की समकालीन चुनौतियों पर पढ़िए जाने माने कथाकार मनोज कुमार पांडेय का यह लेख- ========================== सबसे पहले तो यही सवाल उठता है कि आज के संकट कौन से हैं जिनसे हमारे लोग दो-चार हैं। इनका स्वरूप क्या है? इनका इतिहास भूगोल क्या है? वे अभी-अभी पैदा हुए हैं …

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प्रिया वर्मा की पाँच कविताएँ

आज पढ़िए युवा कवयित्री प्रिया वर्मा की कविताएँ। अंग्रेज़ी से एमए प्रिया वर्मा सीतापुर में रहती हैं और स्वतंत्र लेखन करती हैं। इनकी कविताओं में ताज़गी दिखाई देती है- ==========================   १- कवि में समय की दृष्टि   अनायास ऐसे जागती है कि वह मृत्यु से प्रेम करते हुए लिखता …

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दृश्य को अनुभूत करते यात्रा संस्मरण : आँख भर उमंग

राजेश कुमार व्यास के यात्रा-संस्मरण पुस्तक ‘आँख भर उमंग’ पर यह टिप्पणी लिखी है युवा लेखक-कवि चन्द्रकुमार ने- =================== जीवन-यापन के लिए रोटी-कपड़ा-मकान का समुच्चय निस्संदेह सर्वाधिक ज़रूरी है लेकिन जीवन ‘जीने’ के लिए इससे कुछ अलग की अभिलाषा भी होती है। कुछ ऐसी वृत्ति या वृत्तियाँ जो हमारे अन्तर्मन …

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हृषीकेश सुलभ की कहानी ‘तूती की आवाज़’

आज पढ़िए प्रसिद्ध लेखक हृषीकेश सुलभ की कहानी ‘तूती की आवाज़’। करीब 25 साल पहले ‘कथन’ पत्रिका में प्रकाशित यह कहानी आज के संदर्भ में बहुत प्रासंगिक लगने लगी है। ======================== मुरली बाबू चीख़ते हुए नींद से जागे। वैसे उनके जागने का समय हो चुका था, पर इस तरह कभी नहीं …

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ज्योति नंदा की कहानी ‘मैं एक चाभी ढूँढ रही हूँ’

आज पढ़िए ज्योति नंदा की कहानी। ज्योति नंदा ने कई वर्षो तक विभिन्न हिन्दी  अखबारों में स्वतंत्र लेखन किया। थोडे समय रंगमंच से जुड़ाव।  2017 से  फिल्म निर्माण के क्षेत्र मे कथा पटकथा लेखन  जारी।  “रंगम फिल्मस” से जुड़ कर कॉटन कैंडी,  ‘वाशरूम’,  ‘दोहरी सोच’ तथा एक निर्माणाधीन शार्ट फिल्म …

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