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कला शिविर का रोज़नामचा  -गीताश्री 

जानी-मानी लेखिका गीताश्री आजकल जम्मू के पहाड़ी नगर पटनीटॉप में एक कला शिविर में गई हुई हैं. आने वाले कुछ दिनों तक उनका रोजनामचा नियमित रूप से जानकी पुल पर प्रकाशित होगा. यह पहली किस्त है- मॉडरेटर ============================================================== उनको मालूम नहीं कि बर्फ गिरने से पहले वे दस्तावेज़ों और चित्रों …

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राकेश श्रीमाल की सात नई कविताएँ

राकेश श्रीमाल महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय में एक पत्रिका के संपादक हैं, लेकिन वे मूलतः कवि हैं. जीवन के छोटे छोटे अनुभवों को कविता के शिल्प में ढालने की कला में सिद्धहस्त हैं. प्रस्तुत हैं उनकी कुछ नई कविताएँ- मॉडरेटर ============ एक —– कल दोपहर मिलना तुम उन्हीं सड़कों …

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कांग्रेस साध नहीं पाई सारे समीकरण

कल कर्नाटक विधानसभा चुनाव के नतीजे सुबह भाजपा की असाधारण जीत की तरह लग रहे थे लेकिन दोपहर होते होते वह बहुमत से दूर हो चुकी थी. कर्नाटक चुनाव के इन्हीं नतीजों का आज बहुत अच्छा विश्लेषण ‘दैनिक हिन्दुस्तान’ में मनीषा प्रियम ने किया है. आपके पढने के लिए साभार- …

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‘अवध का किसान विद्रोह’ पुस्तक का एक अंश

भारतीय इतिहासकारों ने पोपुलर इतिहास लेखन को हमेशा खारिज किया. अगर काम हिंदी में हुआ हो तो उसे देखने काबिल भी नहीं समझा. सुभाष चन्द्र कुशवाहा की किताब ‘अवध का किसान विद्रोह’ उस विद्रोह को विस्तार से समझाती है जिसके बारे में मॉडर्न इण्डिया की किताबों में पढ़ा था. बाबा …

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जगरनॉट बुक्स का ऐप, भीष्म साहनी और ‘तमस’

हिंदी किताबों की दुनिया का अगला बड़ा युद्ध स्मार्टफोन बेस्ड एप्स की दुनिया में लड़ा जायेगा.  जगरनॉट बुक्स इस दिशा में हिंदी किताबों के डिजिटल पाठक वर्ग को प्रभावित करने, इस दुनिया से नए पाठकों को जोड़ने के लिए बहुत तेजी से प्रयोग कर रहा है. सबसे ताजा खबर है जगरनॉट …

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आलिया भट्ट के अभिनय का नया मुकाम है ‘राज़ी’

जब से ‘राज़ी’ फिल्म आई है इसकी चर्चा थम नहीं रही है. मेघना गुलजार की इस फिल्म को आलिया भट्ट के लिए भी याद किया जायेगा. इसी फिल्म पर निवेदिता सिंह का लेख- मॉडरेटर ==================================== हाल के वर्षों में जिस अभिनेत्री ने अपने अभिनय के दम पर सबसे ज़्यादा ध्यान …

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वंदना राग की कहानी ‘अम्मा की डायरी’

आज मदर्स डे है. समकालीन दौर की सबसे संवेदनशील कथाकार वंदना राग की यह कहानी पढ़िए. पढ़ते पढ़ते मुझे अपनी माँ से मिलने का मन हो गया.  मन पर गहरी छाप छोड़ने वाली कहानी- मॉडरेटर ==============================================                     मेरी अम्मा को लिखना नहीं …

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थियेटर ओलंपिक्स: मंजरी श्रीवास्तव का पुनरावलोकन

  आठवें थियेटर ओलंपिक्स के समाप्त हुए एक महीने से ऊपर समय बीत चुका है. लेकिन इक्यावन दिन चले इस महोत्सव को लेकर चर्चाओं का दौर अभी नहीं थमा है. इसका एक आकलन कवयित्री, रंग समीक्षक मंजरी श्रीवास्तव द्वारा- मॉडरेटर ======================================================= 8 अप्रैल को भारत में चल रहे आठवें थिएटर …

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सियासत की धुन पर मोहब्बत का फ़साना ‘हसीनाबाद’

गीताश्री के पहले उपन्यास ‘हसीनाबाद’ ने इस साल पाठकों-समीक्षकों-आलोचकों का ध्यान अच्छी तरह खींचा. इस उपन्यास की यह समीक्षा युवा लेखक पंकज कौरव ने लिखी है. इधर उनकी कई समीक्षाओं ने मुझे प्रभावित किया. उनमें एक यह भी है- मॉडरेटर ====================== हसीनाबाद के आबाद होने की दास्तान में ही कहीं …

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मुल्क तो बंटा, लोग भी बंट गये। वो एक लोग थे। अब दो लोग हो गये। 

गुलजार साहब ने उर्दू में एक उपन्यास लिखा. पहले वह अंग्रेजी में प्रकाशित हुआ ‘टू’ नाम से. कुछ महीने बाद हिंदी में ‘दो लोग’ नाम से प्रकाशित हुआ. उर्दू में अभी तक प्रकाशित हुआ है या नहीं, पता नहीं. इसे पढ़ते हुए एक किस्सा याद आ गया. एक बड़े लेखक(जो …

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