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धर्म या धर्मग्रन्थ गलत नहीं होता बल्कि उसकी व्याख्याएं गलत होती हैं

पाकिस्तान के लेखक अकबर आगा के उपन्यास ‘द फ़तवा गर्ल’ पर यह टिप्पणी लिखी है तेज़पुर विश्वविद्यालय, असम की शोध छात्रा प्रीति प्रकाश ने- मॉडरेटर ========================================================= जिन्दगी में बाज़ दफा ऐसा होता है कि कोई बेशकीमती सी चीज अनायास ही हाथ लग जाती है| “ द फतवा गर्ल” किताब मुझे …

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धर्म धंधा हैं । कोई शक?

हरिशंकर परसाई के निबंध ‘वैष्णव की फिसलन’ पर युवा लेखिका-प्राध्यापिका राजकुमारी का लेख- प्रस्तुत निबंध परसाई जी के मेरे रुचिकर निबंधो में से एक हैं । आधुनिक युग के व्यंग्य निबंधकारों में परसाई जी का नाम मुख्य रूप से आता हैं साहित्य के पुरोधा हरिशंकर परसाई जी के इस निबंध …

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प्राग कभी भी आपको दूर जाने नहीं देता

पूनम दुबे के यात्रा वृत्तांत हमलोग पढ़ते आए हैं। इस बार उन्होंने प्राग शहर पर लिखा है। काफ़्का के शहर प्राग को हम हिंदी वाले निर्मल वर्मा के कारण भी जानते हैं। आइए पढ़ते हैं- मॉडरेटर ============ कुछ शहर ऐसे होते है जिनके रंग पानी जैसे कोरे मन में घुल …

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‘स्टोरीटेल’ पर श्रीकांत वर्मा की कविताओं को सुनते हुए

स्टोरीटेल पर पिछले दो दिनों से श्रीकांत वर्मा की कविताएँ सुन रहा था। 2 घंटे आठ मिनट के इस ऑडियो बुक में राजकमल प्रकाशन से प्रकाशित श्रीकांत वर्मा की प्रतिनिधि कविताओं का पाठ मेरे दौर के ‘भारतभूषण’ कवि गिरिराज किराड़ू ने किया है। ‘भटका मेघ’ से लेकर ‘मगध’ तक श्रीकांत …

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‘विटामिन ज़िंदगी’ की समीक्षा यतीश कुमार द्वारा

ललित कुमार की पुस्तक ‘विटामिन ज़िंदगी’ की काव्यात्मक समीक्षा पढ़िए यतीश कुमार के शब्दों में- मॉडरेटर ===================== नहीं रहनेवाली ये मुश्किलें ये हैं अगले मोड़ पे मंज़िलें मेरी बात का तू यकीन कर ये सफ़र बहुत है कठिन मगर ना उदास हो मेरे हमसफ़र जावेद अख़्तर साहब की बहुत ही …

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फ़िराक़ गोरखपुरी पर मनीषा कुलश्रेष्ठ की टिप्पणी

फ़िराक़ गोरखपुरी के रुबाई संग्रह ‘रूप’ पर यह टिप्पणी जानी मानी लेखिका मनीषा कुलश्रेष्ठ ने लिखी है। इस लेख को पढ़ते हुए फ़िराक़ साहब की कई रुबाइयाँ मुझे याद आ गई। जैसे, जादू भरे भरे ये नैना रस के/साजन कब ऐ सखी थे अपने बस के/ये चाँदनी रात ये बिरह …

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‘सोचो अगर हम इंडिया न गए होते, तो इंडिया आज कहाँ होता?’

नॉर्वे प्रवासी डॉक्टर प्रवीण कुमार झा ने ‘कुली लाइंस’ किताब लिखकर इंडियन डायस्पोरा की दास्तान सुनाई। आज स्वाधीनता दिवस के दिन वे परदेस में भारतीय होने का मतलब समझा रहे हैं। उनकी और जानकी पुल की तरफ़ से सबको आज़ादी मुबारक-मॉडरेटर ======================================== गाड़ियों की सस्ती-टिकाऊ सर्विस के चक्कर में गाड़ी-मिस्त्री …

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‘जापानी सराय’ पर मनीषा कुलश्रेष्ठ की टिप्पणी

जब आपकी पहली किताब पर जाने माने लेखक-लेखिकाएँ लिखने लगें तो समझ लीजिए कि आपको बहुत गम्भीरता से लिया जा रहा है, आपको बहुत उम्मीदों से देखा जा रहा है। अनुकृति उपाध्याय के पहले कहानी संग्रह ‘जापानी सराय’ की यह समीक्षा प्रसिद्ध लेखिका मनीषा कुलश्रेष्ठ ने लिखी है- मॉडरेटर ============================= …

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बाल की तलाश

‘प्रेम लहरी’ के लेखक त्रिलोक नाथ पाण्डेय वर्षों गुप्तचर अधिकारी के रूप में कश्मीर में रहे हैं. कोई आधी सदी पूर्व अपनी गुमशुदगी से एशिया के कई देशों में हिंसा भड़का देने वाली  हजरतबल के पवित्र बाल की घटना के वे गंभीर अध्येता रहे हैं. हजरतबल में रखा पवित्र बाल …

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राजेंद्र राव के कहानी संग्रह ‘कोयला भई न राख’ पर यतीश कुमार के नोट्स

वरिष्ठ कथाकार राजेंद्र राव के कहानी संग्रह ‘कोयला भई न राख’ पर कवि यतीश कुमार के कुछ नोट्स अपने आपमें कहानियों की रीडिंग भी और एक मुकम्मल कविता भी। उनके अपने ही अन्दाज़ में- मॉडरेटर ======================== कहानियाँ मुसलसल चलती हैं मुकम्मल होना इनका कभी भी तय नहीं था। ये कवितायें …

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