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कमला दत्त की कहानी ‘बँटवारा’

कमला दत्त ने 1970-80 के दशक में कहानियाँ लिखीं, जो धर्मयुग, सारिका, कहानी, हंस जैसी पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई। बाद में अमेरिका में चिकित्सा विज्ञान पढ़ाने लगी। लम्बे समय तक नहीं लिखा। अब फिर से उन्होंने हिंदी में लिखना आरम्भ किया है। यह उनकी नई कहानी है- मॉडरेटर

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उस औरत की सुबुकती- धीमी धीमी निकलती- आवाज- एक चीख- अटकी अटकी सी- छटपटाती सी। जब इस दूसरी औरत ने- जिन के साथ हवाई जहाज से तुम यहां पहुंची हो ने उस औरत को आलिंगन में बांधना चाहा- तो उस औरत ने उन्हें पहचान झटके से अपने से दूर कर दिया और वहां से हटने को हुई।

दूर खड़ी उनकी बेटी ने देखा- पास आई, सोफे पर बिठा- पानी का गिलास थमाया उनकी पीठ सहलाती रही- कुरसी पर बैठ पानी के एक दो घूंट ले वह औरत- गंदे रुमाल से अपनी नाक सुड़कती रही, धीरे धीरे सुबकती रही।

छोटा कद मुटल्ली – एकदम गांव की दिखने वाली मोटे मोटे ओंठ और आंखों के नीचे की झाइयां।

उसकी बेटी ने इनकी और देखा तक नही- गोया उसकी परवरिश में इस दूसरी का इतना हाथ रहा- प्राम की ड्रेस दिलवाती उसके बाल बनवाती उसे सेनेटरी पेड दिलवाती— Tampons इस्तेमाल करने का सही तरीका समझाती।

स्थिति देखते हुये तुम भी उन्हें दूर ले गई- और प्लेटफार्म पर हुये- उस हादसे की बाते पूछने लगी— यह भी रुक कर अपने आंसू पोछते हुये- इस हादसे की बातें औरों से करने लगी। यह हादसा ही तो है सबसे पहले इस हादसे की खबर उनके बच्चों के बाद इन तक ही पहुंचाई गई थी।

काउच पर बैठी औरत ने अपने को संभाल लिया है- वो सोचती है- यह पढ़ी लिखी दूसरी उनकी मौत के बाद भी- उनके हक छीन रही है। कब पीछा छोड़ेगी— यह औरत मेरा— जिंदगी भर मेरा हक छीनती रही— और अब भी यहां पहुंच गई है— जैसे उसकी बीवी हो।

यह मरा आदमी और यह पढ़ी लिखी औरत- दो साल पहले हर मायने में- एक तरह से एक दूसरे से  अलग हो चुके थे- Personaly भी और Business ventures में भी— पर उनके वालेट में बच्चों के बाद इन्ही का नाम, टेलीफोन नंबर, एड्रेस था। और उनका दोस्त जो प्लेटफार्म में उनके साथ था— उन्हीं को बार बार काल करता रहा— उनके बच्चों के बाद।

उस पराये मुल्क में मीटिंग अटेंड करने गये वो मुल्क तो यह भी पराया है पर बरसों  यहां रहते अपना सा हो गया है। वो जब इस शहर आये थे पीएच.डी. करने अकेले— बीवी बच्चे हिंदुस्तान में ही थे। छोटा भाई सबसे पहले यहां आया था— उसी ने एडमिशन दिलवाई पीएच.डी. की।

इक्कीस साल की उम्र से नौकरी करते वह— पीएच.डी. खत्म कर बीवी को जल्द बुलाया। शुरु से ही वो यहां मिसफिट। मिसफिट तो वो वहां भी थी।

कहां देखा था उन्होंने उसे शादी से पहले— छोटे कस्बे की— छोटा कद— मैट्रिक के बाद— बीए का दाखिला। पहले साल जब वो कालेज में थी तब हुई शादी। कस्बे के कालेज भी ऐसे ही होते। एक के बाद एक बच्चा।

चलो अच्छा हुआ दोनों बच्चों का कद उन पर गया— बेटी का रंग सांवला पर नैन नक्श तो उन जैसे। रंग वैसे उन दोनों का ही सांवला। मैट्रिक पास होने पर भी एकदम फूहड़— एकदम अनपढ़— यहां आकर तो वो और अनपढ़ों जैसी हो गई।

अपने देश, शहर, आप भले ही कुछ ठीक रहे हो— नयी जगहों— शहरों— देशों में— कभी कभार आप ज्यादा फूहड़ होते जाते हैं— दूसरे देशों की भाषा, लिबास, रवैया— आप को और गूंगा बना देता है। कभी कभार वहां के प्रोफेसर भी यहां तुतलाना शुरु कर देते हैं। पर यह तो वहां भी थोड़ी सीधी ही मानी जाती थी।

य​ह स्लिम—ट्रिम रहे वो मुटाती चली गई।

कितनी कोशिश की कि गाड़ी चलाना सीख ले— वो नहीं सीख पाई। अनपढ़ से अनपढ़ औरत यहां गाड़ी चलाना सीख लेती है। वो नहीं सीख पाई।

यह जब हिंदुस्तान में थी— तब भी घर का सारा काम संभालना मेरी मां ही करती थी— कहां संभलते थे इससे दो—दो बच्चे— फिर हर वक्त उनसे भी नोंक—झोंक— हर बात पर सिर पर हाथ मारती— स्यापा करती यह— उज्जड पंजाबियों की तरह।

उस दिन भी लगा— यहां भी शायद यह औरत स्यापा न करने लगे— बेटी ने जरुर कोई दवा दी होगी तभी तो शांत है।

शायद चुप कराती दवाइयों के असर से यह औरत जाम्बी हो गई— जाम्बी लग रही है— जाम्बी वो लोग रहते हैं- चलते फिरते— सभी कुछ करते अंदर बाहर से मरे लोग। जाम्बी— कुदरती या दवाइयों से जाम्बी होते लोग।

—–xox——

सुबह 4-5 मील जागिंग जैसा वो हमेशा करते थे- जापान में भी मीटिंग से पहले दौड़ लगा आये।

स्टेशन के प्लेटफार्म पर अपने Colleague के साथ खड़े सेशन के बाद घूमने का प्रोग्राम बनाते- धड़ाम से मेट्रो स्टेशन पर गिरते लोगों का हजूम— एंबुलेंस— हस्पताल— सीपीआर— अस्पताल पहुंचते—पहुंचते तक काले होते औठ हफड़ा दफड़ी- बरसों का उनका दोस्त अमेरिकन कोलबोरटर- अब उनका Head of dept— बच्चों को इत्तिला— उनकी बीवी को इतला- जिनसे उनका डिवोर्स तीन साल पहले ही तो Finalize हुआ था- जो उनकी डाक्टर बेटी के साथ अब रह रही थी- जिस का पति कोरियन था।

यह दूसरी औरत जिस के साथ तुम आई हो- कद इसका भी उनकी अनपढ़ बीवी से ज्यादा लंबा नहीं पर उनकी बीवी से ज्यादा पढ़ी लिखी- उनकी बीवी के मुकाबले इसका चेहरा, रंग नैन नक्श कुछ कुछ अच्छे  सुंदर नही भी सही, पर आर्कषक— कद उनकी बीवी तरह छोटा- और अब ढेरों Chronic बीमारियों की वजह- यह भी कितना मुट्टा गई हैं- कड़वा गई है।

 इस औरत ने उस अनपढ़ औरत के साथ उस आदमी को बांट बांट जिया है शायद पच्चीस बरस। यह पढ़ी लिखी औरत Professor, Business partner अच्छी sense of humor वाली अच्छा गाने वाली। यह दोनों Busness Partners- TV, programmes Properties में  इन्वेस्ट करते। दोनों प्रोफेसर इंडियन मूवीज दिखाते— इंडियन प्रोग्राम करवाते— आर्टिसट की इंटरव्यू लेते। एक तरफ यह दोनों और दूसरी तरफ वो। वो उनकी नीम पागल बीवी- बेटा बेटी— परफेक्ट फेमली।

कितना खुशकिस्मत है यह आदमी- तीन तीन औरतें इतने अपनेपन से रो रो कर इसके न होने का दुःख मना रही हैं- उनके न होने का दुख मनाती हुई बिना शादी के आडम्बर के  कितना निभाया इन दोनों ने और तुमने भी तो अपना कन्यादान- उन दोनों से ही कराया था।

यह दूसरी जिसके साथ तुम आई हो— यह शहर छोड़ने के बाद भी बराबर हर हफ्ते यहां आ टीवी प्रोग्राम देती रही- बिजनस देख इनका बराबर साथ निभाती रही। बेटी उनकी अब डाक्टर, कम पढ़ी लिखी मां का दुःख समझने लगी है- अपने पास रखा है मां को।

बेटी अब तुम्हें आ प्यार से मिल रही है- तुम उसे केवल दो चार बार मिली हो एक बार की याद है – शायद उन दोनों का झगड़ा हुआ था- शायद उनकी बेटी का तेरहवां जन्मदिन था तुम उनके साथ खाने पर गई थी लास्ट मिनिट उनका आग्रह- खाना शायद इटेलियन था।

बेटी इन्हें बराबर नकार रही है और तुमसे प्यार से बातें कर रही है।

यह कह रही हैं- मैंने कितना कुछ किया इन बच्चों के लिये और यह मुझे पहचान भी नही रहे— बेटी मुझसे बोली तक नहीं— एकदम बदल चुकी है। मैं कह रही हूं- छोटी है अभी बहक गई है।

वो जानती है आप ने उसके लिये क्या क्या नही किया।

वो कह रही हैं शादी में मुझे बुलाया तक नही- अपनी साथ वाली अमेरिकन पड़ोसन को ले गई। शादी कोरिया में हुई अब इसका एक बेटा भी है।

उनकी मां ने छोटी उम्र में विध्वा हो जाने पर अपने चारों बेटो के साथ साथ अपनी सौतेली बेटी को भी प्यार से पाला था—कैसे होने दी उन्होंने अपने सब से बड़े बेटे की शादी इस बेतुकी गांव की औरत के साथ— पति की मौत के बाद-पति के चाचा जिन्होंने शादी नही करवाई थी ने  इन्हें सहारा दिया था- कह दिया- यही करनी है- वचन दिया है मान गई- ऐहसान भी तो कितने थे चाचा के उन सभी पर, शायद अमेरिका आने का टिकट उस का कुछ बंदोबस्त इस औरत के घरवालों ने ही किया था—

उनकी मां ने सौतेली बेटी को भी प्यार से पाला— एक ही तो बेटी उनकी- अब सब बेटे यहां सेटल्ड— दो की अमेरिकन बीवियां— तीसरे जिस की हिंदुस्तानी बीवी थी— वो अब  डिवोर्स के बाद दूसरी शादी भी करवा चुकी है। उनकी बेटी यानी इनकी बहन के पति की अचानक मौत के बाद- तुम भी गई थी उस Funeral पर। वो नीम पागल औरत- तो घर ही जला देती बच्चों समेत— एक बार- जला भी दिया। तुम उनकी बीवी को पहले केवल दो बार मिली थी।

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और तुम भी उन लोगों के शहर किन हालात में पहुंची थी— किसी एक को भी जानती नहीं— तुम्हारी पहली शादी के दुखों के बाद जिस दूसरे से संबंध बने थे- चार साल रहे जिस व्यक्ति से तुम अपनी दूसरी शादी रचाने उस शहर पहुंची थी- वो मुकर गया था।

तुम लैब में डार्क रुम में काम करते बराबर रोती रहती— डार्करुम में Inferra red light में— मेढ़कों की आँखें बाहर निकाल— फिर उन में से रेटिना निकालते तुम लोग— तुम्हे हर वक्त ऐसी डाइसेक्शन में मुश्किल— जो रिसर्च की नौकरी तुम कर रही हो— वो तुम्हारी ट्रेनिंग से एकदम अलग— एक्सपरिमेंटस में बराबर फेल होती तुम— तुम्हारा कोलीग, दोस्त तुम्हारी मदद करता— तुम दोनों डार्क रुम में हो तुम बराबर रो रही हो— काम की कोशिश कर रही हो— बार बार रो—रो अपने कोलीग डैनिस से कह रही हो— मुझे नौकरी छुड़वा यहां लाया— कह रहा है कि अब, शादी नहीं करनी— साथ रह सकते हैं— तुम्हारी लैब का यह अमेरिकन जो बाद में मित्र भी रहा ने सुझाया था- तुम इस तरह खतम हो जाओगी- अपनी हिंदुस्तानी कम्युनिटी में किसी से मिलो- शायद वो तुम्हें कोई सुझाव दे- तुम्हारी कम्युनिटी के लोग ही तुम्हारी मदद कर सकते हैं— इस तरह इस नये शहर में— इतनी दुविधाये काम में और पर्सनल लाइफ में— कैसे निभाओगी— You are on the verge of नर्वस ब्रेक डाउन- तुम्हारा नर्वस ब्रेक डाउन होने को है!!!

उन्हीं में से  किसी ने सुझाया था एक प्रोफेसर हैं, हिंदुस्तानी- Chemistry के यहां— उनका टीवी प्रोगाम है— काल कर देखो।

तुमने उन्हें काल कर सभी कुछ बताया- बड़ी मुश्किल में हूं- वो तुम्हें लंच पर ले गये और इस दूसरी औरत से मिलवाया और कहा- यह अकेली रहती हैं यहां सभी को जानती है- आप का परिचय औरों से करा देंगी- आप को लगेगा आप अकेली नही- यह वक्त भी कट जायेगा।

जो पहले शादी से मुकर गया था— मान गया- तुम्हारी जबरदस्ती से की गई शादी-

हरे रामा हरे कृष्णा!

मंदिर के पुजारी- प्रभु बाल भद्र- पूछ रहे हैं- कन्यादान कौन करेगा?

आठ दस लोगों के बीच हुई शादी। यह दोनों करीब लगे थे बिजनेस पार्टनर।

तुमने आग्रह किया— आप लोग कर दे!

इन दोनों ने बैठ तुम्हारा कन्यादान किया- तुम्हारी शादी ज्यादा देर निभी नहीं-

इस आदमी ने बीवी के साथ भी निभाया- सुबह उठो बच्चों को तैयार- बीवी को दवाइयां दो- ब्रेकफास्ट के साथ- बच्चों के लंच पैक— स्कूल छोड़ों— वापिसी में अमेरिकन पड़ोसन ले आयेगी।

जब Medicare और अच्छी सोशल सिक्योरिटी  की उम्र हुई तभी डिवोर्स दिया- एक बार चाहा था यह हिंदुस्तान रहे- अपने घर वालों के पास खर्चा वो भेजेंगे- घर वाले माने नही हम कहा संभालेंगे यहां। यहां से तो ठीक ठाक ही गई, जो हुआ वहां हुआ, तुम ही निभाओ, बच्चे भी अड़ गये वो आदमी इतना कुछ कैसे बर्दाश्त करता रहा- इतनी देर तक।

और यह अकेली प्रोफेसर- इनकी जिंदगी भी कहा आसान रही— पार्टिशन के बाद छोटी उम्र से नौकरी कर पढ़ाई करती यह Privately  पहले FA फिर BA- कितना इन्होंने घर वालों के लिया किया— छोटी उम्र की नौकरी भाइयों की पढ़ाई— अच्छे स्कूलों में पढ़ाया— अपनी पढ़ाई, काम के साथ साथ की। भाइयों की अच्छी नौकरियां— दोनों को कमीशन मिल गया।

हम बहन को MA Miranda से ही से करवाएँगे- और करवाई भी— यह उनकी ख़्वाहिश हम पूरी करेंगे— बहन ने कितना किया है हमारे लिये।

यह दोनों कब कैसे, बिजनेस पार्टनर्स बने- TV partnership, investment partnership नयी संस्था का एक President तो दूसरा Board of trustees। इन दोनों का इरादा था millionaire  बनने का और दोनों बने भी। और अब यह तीसरी- अपने सफेद सूट में पति के साथ खड़ी अलग- थलग। बेटी का कोरियन पति किसी से कहता हुआ Mental problems run in the family my wife- gets very depressed- very easily- Now we know there is help— and we are getting it- she is seaking help।

यह पढ़ी लिखी शायद पहले बिजनेस पार्टनर ही रही हो । यह तो शायद भाई की खुशकुदी के बाद ही करीब आई।

क्यों की इनके भाई ने ख़ुदकुशी। Depression-runs in the family। यह भी तो यहां एक दम अकेली थी। उन्होंने कब सोची थी एक शादी शुदा आदमी के साथ जिंदगी बांटनी। वहां एक भाई एक बहन की शादी। किसी ने नहीं पूछा इनसे— क्या यह नहीं चाहती थी शादी करना— कोई पूछता तो सही—बहन की शादी के बाद यहां इन्होंने इश्तहार भी दिया। वही अनपढ़ बेढंगे लोग। डायवोर्स— बच्चों वाले।

न बात की तमीज न सलीका— पीएच.डी. पढ़ी लिखी औरत कुछ तो चाहेगी— रिश्ते में और यह आदमी कितना सभ्य था इन दोनों में एक सा सेंस आफ हयूमर— एक सा इंटरेस्ट— तस्वीरों  में— गाने में— बिजनस में, फिर करीब से करीबतर आते रहे यह लोग— और यह बराबर कहती रही— हम बस दोस्त है— गहरे दोस्त— गोया लोग बातें बनाते रहे— करते रहे— उन लोगों में कभी कभार तुम भी शामिल रही।

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यह सफेद सूट वाली तीसरी- इसकी उम्र 45 से ज्यादा नही लगती यह इस आदमी की जिंदगी में कुछ साल पहले ही आई है। जब वो उस नये शहर में प्रोफेसर Assistant Director of a new department बन कर गये- उनका दोस्त कोलेबरोटर डाइरेक्टर बना था—दूसरे शहर गया- इन्हें भी बुला लिया— प्रमोशन था। और वहां मिली यह तीसरी— उन्हें। उस शहर में भी उन्होंने  TV, Programme, radio programme हिंदुस्तानियों के लिये शुरु किया।

यह दूसरी औरत- हर हफ्ते यहां का प्रोग्राम अकेले में संभालती रही- पर पच्चीस साल यह प्रोग्राम इस शहर उनके साथ किया भी।

दो तीन साल पहले जब डिवोर्स फाइन लाइज हुआ तो यह दोनों खुल कर शादी कर सकते थे। साथ रह सकते थे। क्या पच्चीस साल की दोहरी जिंदगी, दोस्ती का, नाटक, पार्टनरशिप का नाटक कर, चुक गये थे- यह लोग, सभी को पता है पच्चीस साल का रिश्ता है- वो अभी भी कहती हैं वो वर्जिन— हो भी सकती हैं। क्या पता!

अब कोई कह रहा है- एक तरह से यह विधवा हुई हैं, पर खुल कर रो भी नही सकती- रिश्ता क्या सिर्फ साथ सोने से बनता है- हर शुक्रवार दो सौ मील गाड़ी चला- उनका आना टीवी  प्रोग्राम, रेडियो प्रोग्राम देना — साथ उठना बैठना- बाहर खाना, खाना एक सा Sense of Humor दोनों का।

अलग अलग अपार्टमेंट हुये तो क्या हुआ। उनकी नोक झोंक- मीयां बीवी की तरह टीवी पर- जब डिवोर्स हुआ तो क्यों नही कर पायें यह लोग— नयी एक शुरुआत— नयी —जिंदगी की।

अब तीन मकानों के बावजूद यह भी एक दम अकेली एक दम खाली— और उनके भी इस शहर में तीन मकान थे- क्या बेच दिए उन्होंने?

इनके रिश्ते का दो साल पहले एकदम चुक जाना— खत्म हो जाना- क्यों कड़वा गये यह लोग, क्या इस सफेद सूट वाली के आने से हुआ- या पहले ही सब कुछ खत्म हो चुका था, जूझते जूझते- कम तो नही सहा इन लोगों ने क्या इस सफेद सूट वाली का आदमी जानता है- यह आदमी जिस की लाश यहां पड़ी हैं उनकी बीवी का बिस्तर गर्माता रहा है।

वो बड़े फख्र से किसी से यह कह रही है— यह हम ही इनके अपार्टमेंट में जा-चुन कर लायें है यह सूट— जो यह पहने हैं- हमीं ने चुना है।

यह औरत भी बारह घंटे गाड़ी में सुबकती आई है- अपने पति के साथ।

इस औरत के लिये उन्होंने कहा था- एक दम परफेक्ट, बस अंग्रेजी नही अच्छी बोलती।

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तुम्हारे साथ आई औरत भी पूरी बिजनेस वूमेन है इस सफेद Suit वाली से कह रही है- वो जो गानों के सारे टेप, वीडियो— वो मेरे हैं मुझे भिजवा दीजियेगा— मैं पता देती जाऊंगी वो सफेद सूट वाली सधी आवाज में- नहीं उन्होंने कहा था- आपके सारे टेपस, वीडियो वो वहीं छोड़ आये थे- यह सब हम दोनों ने दोबारा खरीदे हैं यह मेरे है। मेरे है- मेरे पास रहेंगे।

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तुम्हें याद है- उनका Emergency call— मुझे तुमसे सलाह लेनी है- क्या मैं आ सकता हूं।

नहीं मैं आपको काफी शाप पर मिलती हूं- कुछ साल पहले उनके लगातार फोन आने पर तुम ने शाम को फोन उठाना बंद कर दिया था- वैसे कई बार उन्होंने तुम्हारी मदद की है ऐहसान है उनके तुम पर।

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तुम दोनों काफी हाउस में हो, वो कह रहे हैं— She is perfect for me!

मैंने सचमुच जिंदगी में इतना पहली बार किसी को चाहा है, वो इंडिया गई हुई थी— उसके मना करने पर भी मैं उसे वहां कॉल कर बैठा— उसके घर वाले अब उस से सख्त नाराज हैं— और वो मुझसे नाराज  है— ‘इस औरत के साथ बहुत ज्यादती हुई है- छोटी उम्र में शादी विधवा। दूसरा पति एकदम मनपसंद बहुत प्यार करने वाला दो जुड़वा बच्चे- इन दोनों की नाटक में रुचि— दोनों नाटकों में भाग लेते- साथ का पड़ोसी बूढ़ा जोड़ा बच्चों की बेबी सिटिंग करता। एक बार यह दोनों हफ्ता भर के ड्रामा festival के बाद लौटे, बूढ़ा जोड़ा बच्चों के सहित गायब सब जगह इन्होंने छान मारा पता ही नहीं लगा— पति का दुःख में दो साल में खत्म हो जाना— इस तीसरे विधुर से शादी- निभाती— यह उसके बड़े- बड़े बच्चों की शादियां करती जो उम्र में इससे बहुत कम छोटे हैं।

उसके घर वालों का कहना है कितनी भाग्यवान हो तीन तीन बार पति मिला। तुम कहती हो, जो यह कह रही है- सच भी हो सकता और या किसी नाटक की तरह मनगढ़ंत और आप पिघल गये— मुझे तो यह सरासर मनगढ़ंत कहानी लग रही है— आपने चेक करवाया जो वो कह रही है सच या झूठ है—

कभी गुस्से से कभी आराम से तुम उन्हें समझा रही हो- देखिये दो-दो जिंदगियां खराब हो चुकी हैं और अब तीसरी खराब करने वाले हैं— आप जरा सोचिए तो—वो कह रहे हैं— सच कहता हूँ इतना मैंने किसी को नहीं चाहा जितना इसे चाहने लगा हूं— इस उम्र में भी।

यह तुम्हारी उनसे आखिरी मुलाकात थी- दुःख भी, तुमने उन्हें बहुत डांटा था— उस बार जाने क्या क्या कह डाला— इतना भी क्यों तुले हैं— आप- तीन तीन जिदंगियां बर्बाद करने में।

आज उनका मेमोरियम तुम्हारे शहर— वो इस शहर में तीस से ज्यादा साल तो रहे होंगे।

उनका Memorium तुम्हारे शहर में इस औरत ने जिसने 25 साल उनका साथ दिया हर हालात में भी, ने आयोजित किया है- वही स्टेज पर Convene भी कर रही है- उनके नाम का स्कालरशिप स्टेबलिश किया है— तुमने भी 100 डॉलर का चेक काट दिया है।

लोग उठ उठ कह रहे हैं। श्रद्धांजलियां दे रहे हैं।

पहले हिंदुस्तानी सभा, पहले प्रेजीडेंट इस सभा के Indo American cultural association के पहले हिंदुस्तानी टीवी प्रोग्राम, रेडियो शुरु करने वाले हिंदुस्तानी तस्वीरें (मूवीज) दिखाने वाले, इस शहर में पहले व्यक्ति— वही— सभी कुछ उन्हीं का आरंभ किया हुआ।

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वह सब को Introduce करवा रही है। यह आदमी नर्मदिल था- हर मुसीबत में पड़ी औरत को सहारा देने वाला था ।

यह लोग जिंदगी के उस पड़ाव पर मिले- जहां हम बहुत अकेले रहते हैं- जो मिला उसे सहारा समझा, कुछ वक्त कट गया— जिदंगी कुछ आसान हो गई न कुछ ज्यादा न कुछ कम।  बेले- कुछ बेले कैसे पेड़ों के सहारे- धूप की तलाश में उपर तक पहुंच जाती है— आप उसे चोरी कैसे कहेंगे, कोई कोई बेल केवल धूप चुराती है केवल जीवित रहने के लिये- पर कुछ बेले पेड़ों को भीतर घुस उन्हें खत्म भी कर देती है— इस आदान प्रदान में किस की जरुरत ज्यादा रहती- यह निश्चय- प्रकृति का रहता है- और आप उसके आधीन उसकी पूर्ति का साधन मात्र—

अब यह दोबारा टेपस का रोना लगा बैठी है यह औरत। जाने क्यों तुम कड़वा गई हो— एक जापानी कहानी याद आ गई, एक बड़ा जमींदार था तीन तीन Mistresses थी— आपस में लड़ती झगड़ती- बीवी कहीं और पड़ी- एक दिन गुस्से में आ सभी mistresses को बुला- वो उन्हें नीचा दिखाने के लिये, एक के बाद एक के साथ संभोग करता है— तृप्त हो कह रहा है- तुम्हें बांटना आना चाहिये- यह सबक तुम सबके लिए, यकायक उनमें से एक का उठ कर दीवार पर टंगी तलवार उठा उसके लिंग को काट तीन भागों में बांट कहना देखो हमने बांट लिया है अब———– एक चीख- लंबी इस आदमी की मौत के बाद उसे बांटती यह औरतें—

न न ना— यह उस जापानी रखेल की तरह खुंखार नही- यह magpie (चिड़िया की एक किस्म) ​है- मैगपाई की एक किस्म गायों, भैसों के जख्मों को- घावों को बराबर गहराती रहती है— यह औरतें एक दूसरे के जख्म गहरा ऐसा ही कुछ तो कर रही है—  घाव गहरे होने चाहिये उनकी प्यास के लिये।

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