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Prabhat Ranjan

कुशाग्र अद्वैत की कुछ नई कविताएँ

कुशाग्र अद्वैत बीएचयू में बीए के छात्र हैं और बहुत अच्छी कविताएँ लिखते हैं। उनकी कुछ नई कविताएँ पढ़िए- ================= चाहना   जो आवाज़ देगा वो चाहेगा आप पहुँचे   जो पुष्प देगा वो चाहेगा आप खिल उठें   जो घड़ी देगा वो चाहेगा आपका वक़्त   जो जूते देगा …

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जेंडर डिस्कोर्स में अंततः पुरुष ही हीरो बनता है

अनुभव सिन्हा की फ़िल्म ‘थप्पड़’ पर यह सुविचारित टिप्पणी लिखी है युवा लेखक-पत्रकार फ़िरोज़ खान ने- =================== हिंदी में हम जिस तरह का सिनेमा देखते रहे हैं, उसमें सांप्रदायिकता पर भी बात हुई है, जाति पर भी और जेंडर पर भी। सांप्रदायिकता और जाति पर काफी फिल्में हैं। कुछ बहुत …

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अनुपम ओझा की कहानी ‘बाँस का पुल’

अनुपम ओझा ने हिंदी सिनेमा पर शोध किया है, फ़िल्मी दुनिया से जुड़े रहे हैं। मूलतः बनारसी हैं। या उनकी कहानी है इसमें भी बनारस को पहचानिए- ===================== बाबतपुर हवाई अड्डे से सारनाथ तक दिमाग में एक ही घंटी बजती रही… आदिकेशव! सबसे पहले आदिकेशव घाट जाना है। गेस्ट हाउस …

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23 मार्च एक जज्बाती याद : कवि पाश

आज शहीदी दिवस है- भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव की शहादत का दिन। आज के ही दिन पंजाबी के क्रांतिकारी कवि अवतार सिंह ‘पाश’ भी शहीद हुए थे। भगत सिंह और पाश के रचनात्मक संबंधों को लेकर यह लेख लिखा है अमित कुमार सिंह ने जो केंद्रीय विद्यालय में अध्यापक …

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युवा अंग्रेज़ी लेखक तनुज सोलंकी की हिंदी कविताएँ

तनुज सोलंकी अंग्रेज़ी के युवा लेखक हैं और उनको अपने कहानी संग्रह ‘दीवाली इन मुज़फ़्फ़रनगर: स्टोरीज़’ के लिए साहित्य अकादेमी युवा पुरस्कार मिल चुका है। ‘नियोन नून’ नाम से उनका एक उपन्यास भी प्रकाशित है। हाल में मुझे पता चला कि वे हिंदी में कविताएँ भी लिखते हैं। उनकी कुछ …

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अज्ञेय के उपन्यास ‘अपने अपने अजनबी’ का एक अंश

आज बैठे बैठे अज्ञेय के उपन्यास ‘अपने अपने अजनबी’ की याद आई। उपन्यास के केंद्र में मृत्यु का भय है। किस तरह मृत्यु को सामने पाकर कैसे प्रियजन भी अजनबी हो जाते हैं और अजनबी पहचाने हुए। मृत्यु से ज़्यादा डर मृत्यु के भय का होता है।सेल्मा कैंसर से पीड़ित …

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फणीश्वरनाथ रेणु की कहानी ‘पहलवान की ढोलक’

कल रात प्रधानमंत्री जी ने रविवार की रात थाली-ताली बजाने का आह्वान किया। कुछ समझ पाता कि सुबह देखा सत्यानंद निरुपम ने फणीश्वरनाथ रेणु की कहानी ‘पहलवान की ढोलक’ की याद दिलाई थी। महामारी की आशंका और घर से काम करने के बीच इस कहानी का आनंद लें, इसके लक्ष्यार्थ, व्यंग्यार्थ …

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नेपाली भाषा के कवि चंद्रा गुरुंग की कविताएँ

चंद्रा गुरुंग नेपाली भाषा के कवि हैं। बहरीन में रहते हैं और मूल रूप से नेपाली भाषा में लिखने के अलावा दूसरी भाषाओं से नेपाली में अनुवाद भी करते हैं। प्रस्तुत हैं उनकी कुछ कविताएँ- मॉडरेटर ===================== परदेश   परदेश में हमेशा गगनचुंबी सपने देखने वाली दो आँखें लाया हूँ …

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उपासना के उपन्यास ‘डेस्क पर लिखे नाम’ का एक अंश

उपासना समकालीन कथाकारों में सुपरिचित नाम हैं। अभी हाल में ही उनका बाल उपन्यास ‘डेस्क पर लिखे नाम’ प्रकाशित हुआ है. इसे राष्ट्रीय पुस्तक न्यास नई दिल्ली ने प्रकाशित किया है. उसका एक अंश देखिए- =================== घुमक्कड़ी  टुटु -पुट्टी के कमरे की खिड़की सामने बागान में खुलती है. बागान चारों …

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हिन्दी रंगपरिदृश्य और नाट्यालेखन:हृषीकेश सुलभ

हृषीकेश सुलभ को कथाकार-उपन्यासकार के अलावा हम सब नाटककार और रंगकर्म विशेषज्ञ के रूप में दशकों से जानते रहे हैं। अभी हाल में ही उनका उपन्यास ‘अग्निलीक’ राजकमल से आया है, जिसकी बहुत चर्चा है। फ़िलहाल इस लेख में उन्होंने रंगमंच की दुनिया में नाट्यालेखन को लेकर कुछ गम्भीर बिंदुओं …

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