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Prabhat Ranjan

प्रियंका ओम की कहानी ‘रात के सलीब पर’

आज पढ़िए युवा लेखिका प्रियंका ओम की कहानी ‘रात के सलीब पर’। एक अलग तरह की पृष्ठभूमि की यह कहानी बेहद पठनीय है और रोचक भी- ===================== शहर से दूर पश्चिमी तट पर संपर्क तंत्र से रहित, लम्बे ताड़ दरख्तों से घिरा यह पोशीदा ज़ज़ीरा बुजदिला वास्ते बहिश्त है। शोर-शराबे …

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गुमनाम लेखक की डायरी: 5: विमलेश त्रिपाठी

युवा कवि विमलेश त्रिपाठी का यह स्तम्भ एक लम्बे अंतराल के बाद फिर से शुरु हो रहा है। लेखक की स्मृतियों में उसका जीवन कैसा होता है, विमलेश त्रिपाठी ने बड़ी सहजता से लिखा है- छूट गए समय की पहिलौंठी स्मृतियाँ – एक पहली घटना जो जेहन में है वह …

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मराठी के चर्चित लेखक विश्वास पाटिल के उपन्यास ‘दुड़िया’ का एक अंश

मराठी के प्रतिष्ठित और बहुचर्चित उपन्यासकार विश्वास पाटिल का नया उपन्यास दुड़िया हाल में राजकमल प्रकाशन से आया है। उपन्यास की पृष्ठभूमि छत्तीसगढ़ का नक्सल संकट है। वहां के ग्रामीणों का जीवन और उनके बीच की एक युवती दुड़िया की कहानी। ज्ञानपीठ और साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित लेखक दामोदर …

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आश्रम से बाहर जिन्दगी: विजया सती

दिल्ली विश्वविद्यालय के हिंदू कॉलेज की पूर्व प्राध्यापिका ने विजया सती आजकल संस्मरण लिख रही हैं। उनके संस्मरण का पहला अंश हम जानकी पुल पर पढ़ चुके हैं जो आश्रम के जीवान को लेकर था। इस बार उन्होंने आश्रम के बाहर के जीवन को लेकर लिखा है। तत्कालीन शिक्षा पद्धति …

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लड़कियों के लिए लिखा गया भारत का पहला थ्रिलर ‘नायिका’

युवा लेखक अमित खान हिंदी में लोकप्रिय उपन्यास धारा की नई पहचान हैं। उनका उपन्यास ‘नायिका’ पेंगुइन से प्रकाशित हुआ है। उसी पर यह टिप्पणी पढ़िए- ===================== ‘नायिका’ अमित खान द्वारा लिखा गया एक शानदार सायको थ्रिलर है, जो महिलाओं के ऊपर हो रहे अत्याचारों को बड़ी खूबी के साथ …

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अणुशक्ति सिंह की कहानी ‘आय’म अ गुड बॉय, मै’म’

आज पढ़िए युवा लेखिका अणुशक्ति सिंह की एक संवेदनशील कहानी। यह कहानी ‘परिंदे’ नामक पत्रिका में प्रकाशित हुई है। आप लोगों के लिए यहाँ दी जा रही है- ============= बस की खिड़की से बाहर देखना उसे अच्छा लगता था। कंडक्टर ने कई बार बस की खिड़की बंद करने की ताक़ीद …

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जीवन इस पार और उस पार

आज पढ़िए प्रियंका नारायण की कहानी। लगभग साइंस फ़िक्शन जैसी यह कहानी रोचक भी है और ज्ञानवर्धक भी। आप भी पढ़िएगा- ===================== काले बादलों से घिरी सुबह… ठंढ़ी हवा और दूर तक फैली घास…मोबाईल की घंटी बजी, किसी ने दो शब्द कहें और मन जैसे कहीं दूर खो गया… ऊर्जा, …

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‘थोड़ी- सी ज़मीन थोड़ा आसमान’ की काव्यात्मक समीक्षा

यतीश कुमार बहुत दिनों बाद अपनी काव्यात्मक समीक्षा के साथ वापस लौटे हैं।इस बार उन्होंने जयश्री रॉय की किताब ‘थोड़ी- सी ज़मीन थोड़ा आसमान’ को पढ़ते हुए कविताएँ लिखी हैं। यह किताब वाणी प्रकाशन से प्रकाशित है- ===================       1.     साँस की हाँफ में गलफड़ों का …

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रमेश ठाकुर की कहानी ‘फिर कभी मिलेंगे’

आज पढ़िए युवा लेखक रमेश ठाकुर की कहानी। पढ़कर अपनी राय ज़रूर दीजिएगा- =============== “हैलो राकेश! कहाँ हो तुम?” “मैं अपने कॉलेज में हूँ। तुम बताओ, तुम कहाँ हो? आज कैसे याद किया?” “मैं कैंपस आ रही हूँ। तुम मुझे आर्ट्स फ़ैकल्टी में मिलोगे?” “बताओ, कुछ काम होगा तो आ …

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सिधपुर की भगतणें : स्त्री के स्वभाविक विद्रोह का प्रमाणिक आख्यान

लक्ष्मी शर्मा के उपन्यास ‘सिधपुर की भगतणें’ पर यह सुविचारित टिप्पणी लिखी है जितेंद्र विसारिया ने। आप भी पढ़ सकते हैं- ===========================        उपन्यास भले ही बाह्य विधा के रूप में  हिंदी में प्रविष्ट हुई हों, किन्तु यह विधा आधुनिक खड़ी बोली के प्रारंभिककाल से ही हिंदी साहित्य की लोकप्रिय …

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