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Tag Archives: JAISHREE ROY

आलोचना का अर्थ चरित्र हनन नहीं होता

तहलका पत्रिका के संस्कृति विशेषांक में शालिनी माथुर का लेख छपा था ‘मर्दों के खेला में औरत का नाच‘ , जिसमें कुछ लेखिकाओं की कहानियों को उदाहरण के तौर पर इस रूप में पेश किया गया था जिसे आपत्तिजनक कहा जा सकता है। मेरा निजी तौर पर यह मानना है कि नैतिकता …

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जयश्री रॉय की कहानी ‘रेत के फूल’

हाल के वर्षों में जिन लेखिकाओं की कहानियों ने ध्यान खींचा है उनमें जयश्री रॉय का नाम प्रमुखता से लिया जा सकता है. उनकी एक हाल की कहानी- जानकी पुल.==================================== – हिया ने फ़ेसबुक से लॉग आउट किया और बिस्तर पर गिरकर रोने लगी… नील और जेनोभी दोनों ऑन लाइन …

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