अंतिम दिन का मैदान

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आज सचिन तेंदुलकर अपना आखिरी टेस्ट खेलने मैदान में उतरेंगे. विश्वास नहीं होता. अचानक अपने बूढ़े होने का अहसास होने लगा है. बहरहाल, हमारे दौर के एक जरुरी कवि प्रेम रंजन अनिमेष ने क्रिकेट को लेकर कुछ कविताएँ लिखी हैं. मुझे याद आता है कि विष्णु खरे ने भी कुछ कविताएँ क्रिकेट को लेकर लिखी थी. उसके बाद प्रेम रंजन जी की कविताएँ पढ़ी. सचिन हमारे लिए क्रिकेट के पर्याय हैं. आज ये कविताएँ उनके जादुई खेल को समर्पित हैं- प्रभात रंजन 
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                                         जीवन खेल
   ( क्रिकेट : कुछ कवितायें )
                           
कविता के अलावा जो एक लत बचपन से रही वह क्रिकेट की और इस जुड़ाव ने इस खेल से जुड़ी कई कवितायें  भी दीं जो अब एक किताब से कहीं ज्यादा हैं इनमें से कुछ (16) कवितायें  कभी एक कविता श्रृंखला के रूप में साहित्यिक  पत्रिका  संभवा में आयी और चर्चित हुई थीं
स्वाभाविक  रूप से इस लगाव का एक कारण और हिस्सा सचिन तेंदुलकर भी रहे क्रिकेट से जुड़ी अपनी कुछ और कवितायें  इस खेल में तकरीबन  तीन दशकों की लंबी अविराम यात्रा के उपरांत अब जीवन के नये अध्याय  उद्घाटित करने जा रहे क्रिकेट के इस नन्हे महान जादूगर के लिए एक सौगात के बतौर 
1.
अंतिम दिन का मैदान                                                                                                       
पहले दिन तो
अछूती थी खेल पट्टी
अनाहत दूबों के अँखुओं से भरी
अंतर में कहीं दबी हुई नमी
आज अंतिम दिन
इस चुनौतीपूर्ण कसौटी का
निर्णायक मोड़
पीछे की सारी हलचलों की
खराशें हैं इस पर
और लाल मटमैले धब्बे
जगह जगह सिलवटें और टूटन
हर टप्पे के साथ
उड़ती है धूल
गेंद कभी बैठ जाती है
कभी सहसा उठ कर
मानो चूमना चाहती
अच्छे

6 COMMENTS

  1. Kavita " tab bhi" ke madhyam se sangharsh ke sath jivan jine ka Prem Ranjan ji ka sandesh sarahaniya hai. jiase cricket ke maidan mein tamam kavach dharan karane ke bavajud chot apana rasta khoj hi leti hai vaise hi jivan ki tamam badhayen jivant jivan se kisi ko rok nahi sakati basharte chahat ho.

    kavita "Pari Samapti ki ghoshana" se kavi jivan aur cricket ke beech samanata ko darshata hai. Niyati aur paristhitiyan pari samapti ke liye majabur kar deti hain chahe sahi avasar aur sahi manodasha ho ya na ho.

  2. jaise cricket ko sirf BCCI ki rajniti ka paryay nahi mana ja sakta, vaise hi ye kavitayen ko sachin tak simit karana uchit nahi. en kavitao ka phalak oyapak aur vistrit hai. Vaise rajniti ki baat karen to sahitya mein kam hai kya?

  3. 21वी सदी का सचिन का यह खेल अंतिम खेल है जिसे देखने के करोडो के टिकट बिके लोग ध्न्त ध्न्य है.
    अभी वे दुनिया मे है अब उनकी भूमिका देखनी है,राज्य सभा मे तो पहुच चुके देखिये उन्हे सियासत के खेल के लिये कौन पार्टी हथियाती है.वे समाज के लिये किस तरह का काम करते है,या अपने आक्डो तक महदूद रह जाते.वे हमारे समय के जरूरी कवियो के काब्य विषय बन चुके है,मानकर चलिये क्रिकेट एक खेल नही राजनीति की तरह एक व्यवसाय है और वह विभिन्न तरह से खेला जाता है क्र्केट बोर्ड का जोबजट है वह छोटे मोटे देशो का बजट है.और उसके पदाधिकारियो का दर्जा कैबिनट मंत्री से कम नही .दुनिया मे उनकी हनक बजती है

  4. ऐसा लगा मनो सचिन के कोच ने ही खुद कविताएँ लिख दीं हों सचिन के लिये । हर पहलू को बारिकी से उजागर करते हुए – दोनों – ज़िंदगी और क्रिकेट के ।
    आखिरकार सचिन ने भी तो पूरी दुनिया को सिर्फ क्रिकेट ही खेलना नही सिखाया, ज़िंदगी जीना भी ।
    आगे आने वाले अनेक सचिन को प्रेरित करती रहे आपकी ये कविताएँ । इससे अच्चा तोहफा बिदाई का और क्या हो सकता था, एक क्रिकेट प्रेमी के लिये ।
    बहुत-बहुत शुक्रिया आपका ।

  5. क्रिकेट को जीवन से मानो जोड़ ही दिया है। बहुत चुटिली कवितायें.. खास कर– 1,2, 3, 5, 10 और 11..

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