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फणीश्वरनाथ रेणु की कविता ‘साजन! होली आई है!’

यूपी चुनाव में जनता ने ऐसी होली खेली है कि किसी को कुछ समझ में नहीं आ रहा है. होली के इस माहौल में फणीश्वरनाथ रेणु की यह कविता याद आ गई-

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साजन! होली आई है!

सुख से हँसना

जी भर गाना

मस्ती से मन को बहलाना

पर्व हो गया आज-

साजन ! होली आई है!

हँसाने हमको आई है!

 

साजन! होली आई है!

इसी बहाने

क्षण भर गा लें

दुखमय जीवन को बहला लें

ले मस्ती की आग-

साजन! होली आई है!

जलाने जग को आई है!

 

साजन! होली आई है!

रंग उड़ाती

मधु बरसाती

कण-कण में यौवन बिखराती,

ऋतु वसंत का राज-

लेकर होली आई है!

जिलाने हमको आई है!

 

साजन ! होली आई है!

खूनी और बर्बर

लड़कर-मरकर-

मधकर नर-शोणित का सागर

पा न सका है आज-

सुधा वह हमने पाई है !

साजन! होली आई है!

 

साजन ! होली आई है !

यौवन की जय !

जीवन की लय!

गूँज रहा है मोहक मधुमय

उड़ते रंग-गुलाल

मस्ती जग में छाई है

साजन! होली आई है!

-फणीश्वर नाथ ‘रेणु’

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