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Tag Archives: fanishwarnath renu

प्रेम में डूबी सब स्त्रियाँ महुआ घटवारिन क्यों हो जाती हैं?

फणीश्वरनाथ रेणु की कहानी पर बनी फिल्म ‘तीसरी कसम’ के ऊपर बहुत अच्छा लेख लिखा है युवा लेखिका उपासना झा ने- मॉडरेटर ============ मीता! पहली कसम याद है न तुमको। कोई चोरी-चकारी का माल नहीं ले जाना था क्योंकि तुम जानते थे कि ‘ये महल, चौबारे यही रह जाएंगे सारे’। …

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फणीश्वरनाथ रेणु की कविता ‘साजन! होली आई है!’

यूपी चुनाव में जनता ने ऐसी होली खेली है कि किसी को कुछ समझ में नहीं आ रहा है. होली के इस माहौल में फणीश्वरनाथ रेणु की यह कविता याद आ गई- =============== साजन! होली आई है! सुख से हँसना जी भर गाना मस्ती से मन को बहलाना पर्व हो …

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‘मैला ‘आँचल’ बड़ी रचना है या ‘परती परिकथा’

फणीश्वरनाथ रेणु और मार्केज़ दोनों के जन्मदिन आसपास पड़ते हैं. दोनों के लेखन में एक समानता थी कि दोनों ने ही ग्लोबल के बरक्स लोकल को स्थापित किया. यह अलग बात है कि रेणु जी हिंदी के लेखक थे इसलिए उनकी व्याप्ति वैसी नहीं हो पाई. लेकिन पाठकों के बीच …

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रेणु जी के ‘मैला आँचल’ के अंश-पाठ का ऑडियो-वीडियो

आज फणीश्वरनाथ रेणु का जन्मदिन है. उनके उपन्यास ‘मैला आँचल’ के बारे में अनेक विद्वानों का यह मानना है कि यह हिंदी के सबसे अच्छे उपन्यासों में एक है. आज उसके एक अंश का बहुत सुन्दर पाठ प्रवीण झा ने किया है और उतना ही अच्छा वीडियो  भी बनाया है. …

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रेणु तन्मयता से किसानी करने वाले लेखक हैं

आज ही के दिन 1921 में हिन्दी के युगांतकारी लेखक फणीश्वरनाथ रेणु का जन्म हुआ था। आज उनको याद करते हुए, उनके लेखन, उनके विचारों उनकी जीवन दृष्टि पर कला की तरह किसानी जीवन को जीने वाले युवा लेखक गिरीन्द्रनाथ झा ने। आप भी पढ़िये- जानकी पुल। ====================================================== किसानी करते …

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फणीश्वरनाथ रेणु का दुर्लभ रिपोर्ताज ‘जय गंगा!’

आज महान गद्यकार फणीश्वर नाथ रेणु जी का स्मृति दिवस है- इस अवसर पर उनका यह दुर्लभ रिपोर्ताज जय गंगा   प्रस्तुत है- जो रेणु रचनावली में भी उपलब्ध नहीं है- रेणु साहित्य के अध्येता श्री अनंत ने अपनी साईट www.phanishwarnathrenu.com पर इसे  प्रस्तुत किया है- इसकी ओर हमारा ध्यान दिलाया पुष्पराज …

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खेती-बाड़ी, कलम-स्याही और रेणु

आज हमारी भाषा के विलक्षण गद्यकार फणीश्वरनाथ रेणु का जन्मदिन है. उनको याद करते हुए यह आत्मीय गद्य लिखा है युवा लेखक गिरीन्द्रनाथ झा ने. आप भी पढ़िए और उस महान लेखक को याद कीजिये- जानकी पुल. ========  फणीश्वर नाथ रेणु …मेरे लिए यह नाम ही कथा है। ऐसी कथा, …

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यह फागुनी हवा मेरे दर्द की दवा

फणीश्वरनाथ रेणु ने बहुत अच्छी कविताएँ भी लिखीं. उनकी एक कविता ‘मेरा मीत शनिचर’ बहुत लोकप्रिय है. फागुन के महीने में उनकी यह कविता भी पढ़ने लायक है. ———————————————————– यह फागुन की हवा  यह फागुनी हवा मेरे दर्द की दवा ले आई…ई…ई…ई मेरे दर्द की दवा! आंगन ऽ बोले कागा …

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रेणु जी की कविता ‘मेरा मीत सनीचर!’

आज फणीश्वरनाथ रेणु का जन्मदिन है. आज उनकी एक कविता पढते हैं जिसमें उनकी वही किस्सागोई है, उनकी कहानियों जैसे ही भोला एक पात्र है और वही जीवंत परिवेश. जाने क्या है इस कविता में कि जब भी पढता हूँ आँखें पनियाने लगती हैं. आप में से बहुतों ने पढ़ी …

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