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क्या बच्चों को अश्लील साइट्स देखने से रोक पाना संभव है?

आजकल बच्चे कम उम्र से ही स्मार्टफोन का इस्तेमाल करने लगते हैं. लेकिन क्या हम ऑनलाइन अवांछित कंटेंट तक पहुँच पाने से कम उम्र में बच्चों को रोक सकते हैं? एक अच्छा लेख लिखा है विकास चन्द्र ने- मॉडरेटर

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आइये आज हम इन्टरनेट की एक छोटी सी गुत्थी सुलझाते है. तो बताइए आपके बच्चे 1) गूगल में popcorn के बजाय गलती से pocporn टाइप करते है तो क्या आता है? या 2) गणित में प्राइम नंबर(अभाज्य) 89 टाइप करने पर या 3) गूगल पर how to  टाइप करते ही कैसे रिजल्ट शो करने लगता है.

      अब तक तो आपने अपने मोबाइल में टाइप कर के देख ही लिया होगा. नहीं किया तो हम बता दे रहे है, इन सभी के परिणामों में अश्लील वेबसाइट जिनमें सेक्स वीडियो या ब्लू फ़िल्म खुलती हैं.

      क्या आपको पता है दुनिया भर में 4 करोड़ से भी ज्यादा अश्लील साइट हैं. हमारे बच्चे धड़ल्ले से स्मार्टफोन का इस्तेमाल करते है. यदि वे इन शब्दों को इन्टरनेट पर टाइप करते है तो सोचिये उनके सामने नग्नता एवं अश्लीलता की पूरी कुंजी खुल जाएगी. यदि एक बार ये अश्लीलता की काली पोथी उनके सामने खुल गयी फिर वें कब इसके आदी हो जाते हैं, पता ही नहीं चलता.  आमतौर पर क्लास में कुछ बदमाश बच्चे अश्लील प्रचार के माध्यम होते हैं. इसके अलावा बच्चे स्कूल, पार्क या खेल मैदानों में ब्लू फिल्मे, सेक्स कहानियां, गंदे जोक्स, वगैरह को दोस्तों में शेयर करते हैं.

क्या प्रभाव पड़ता है अश्लील साइट्स देखने से ?

एडल्ट साइट देखने से बच्चे दिन प्रतिदिन इसी चीज़ के बारे में सोचने लगते है,  और जब भी उन्हें खाली समय मिलता है, तो वो फिर से ये सब देखने लगते है. जिससे डाटा पैक की खपत बहुत तेजी से बढती है. बार बार सेक्स विडियो देखने से बच्चों का भी इसे नक़ल करने का मन करता है. यह उनके मानसिक विकास के रूकावट का एक बड़ा पहलू है. इसके लक्षण आपको इस प्रकार दिखते हैं : बंद कमरे में रहना, अकेले में अधिक समय बिताना, चिड़चिड़ापन इत्यादि.

अश्लील साइट मानसिक एवं शारीरिक दोनों रूप से घातक सिद्ध होती है. इससे – याददाश्त कमजोर होती है, एकाग्रता घटती है, साथ ही साथ यौन क्षमताओं पर भी बुरा प्रभाव पड़ता है.

बच्चें चस्का लगने के बाद ये अधिक से अधिक अपना वक़्त इन्टरनेट पर ही बिताते है और अलग अलग किस्म की साइट ढूँढते हैं. इन अश्लील साइट्स पर सभी रिश्तों को ताक़ पर रख कर भाभी, चाची, अंकल, टीचर आदि के साथ गलत संबंधों को प्रदर्शित किया जाता है. कुछ समय बाद बच्चों का भी अपनी चाची,  भाभी,  अंकल और टीचर के प्रति नजरिया बदल जाता है जो कि हमारे परिवार और समाज के लिए घातक सिद्ध हो रहा है.

असल में ये सभी अश्लील साइट पाश्चात्य (अमेरिका एवं यूरोप) सभ्यता की देन हैं. विदेशों में इन अश्लीलता एवं नग्नता को कानूनी मान्यता प्राप्त हैं. इसलिए वें इसे बनाते और इन्टरनेट के माध्यम से हमें परोसते हैं. इस अश्लील काले व्यापार को देश में आने से रोका जा सकता है. 2015 में सुप्रीम कोर्ट द्वारा  एक बार हमारे देश में 5 दिनों के लिए 857 अश्लील साइट बंद करवा दी गयी थी. परन्तु सरकार ने मुनाफ़ाखोरों के दबाव में आकर फिर से इन्हें खोल दिया. इन मुनाफ़ाखोरों में टेलिकॉम कंपनिया भी हैं, जो डाटा पैक की बिक्री बढ़ाने के लिए, इन साइट पर रोक नहीं लगाना चाहती.

इन्टरनेट की स्पीड जिस 3G और 4G स्पीड से धना धन बढ़ रही है, उतनी तेजी से इन अश्लीलता के कारोबारियों की चाँदी हो रही है.

तो कैसे करें सुरक्षित ?

यदि हम कहते है की बच्चों को मोबाइल नहीं देना चाहिए तो यह असंभव हैं. लेकिन अब आप बेफिक्र होकर अपने बच्चों को मोबाइल दे सकते हैं. बच्चों को ऑनलाइन अश्लील साइट से दूर रखने के लिए अब एक ऐसी एप्प आ गयी है, जो आपकी मदद से एंड्राइड मोबाइल में डालने पर कोई भी पोर्न या अश्लील साइट नहीं खुलेंगी.

फिल्टरनेट (FilterNet.in)  एक ऐसा एप्प है जो आपके बच्चे के मोबाइल पर एडल्ट कंटेंट को फ़िल्टर करता है. भारत का ये पहला एप्प है जो पोर्न साइट को रोकता है और सिर्फ अच्छी साइट को आने देता है.

आज ही अपने बच्चों को सुरक्षित करने के लिए एंड्राइड मोबाइल पर Filternet.in एप्प डाउनलोड करें. आखिर ये आपकी जिम्मेदारी है.

पाठकों के लिए एक विशेष छूट

Promo code: smartmom

———————Author details ——————-

नाम: सोनल शुक्ला

फिल्टरनेट स्टार्टअप डायरेक्टर

पता: C 33/58 D-1, Bajarang Nagar, Chittupur (Sigra), Varanasi, UP, India -221002

Email ID:  sonal.shukla@filternet.in

Date:  April 6, 2017

Mobile: 9889275073

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