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हैं बंद द्वार घर-घर के, अँधियारा रात का छाया

हाल में ही रवीन्द्रनाथ टैगोर के गीतों का अनुवाद आया है ‘निरुपमा, करना मुझको क्षमा’ नाम से. छंदबद्ध अनुवाद किया है प्रयाग शुक्ल ने. पुस्तक सस्ता साहित्य मंडल प्रकाशन से आई है. उसी पुस्तक से कुछ चुने हुए गीत- जानकी पुल. ———————————————- १. जो गए उन्हें जाने दो तुम जाना …

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रवीन्द्रनाथ के मिथिला से आत्मीय सम्बंध थे- बुद्धिनाथ मिश्र

आज रवीन्द्र जयंती है. उनके जीवन-लेखन से जुड़े अनेक पहलुओं की चर्चा होती है, उनपर शोध होते रहे हैं. एक अछूते पहलू को लेकर डॉ. बुद्धिनाथ मिश्र ने यह लेख लिखा है. बिहार के मिथिला प्रान्त से उनके कैसे रिश्ते थे? एक रोचक और शोधपूर्ण लेख- जानकी पुल. ———————————————————————————————   …

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वे सत्यजीत रे का घर देखना चाहते थे

अभी बीते २ मई को महान फिल्मकार सत्यजित रे की जयंती थी. उनको, बांग्ला सिनेमा पर उनके प्रभावों को लेकर उनके सिनेमाकार पुत्र संदीप रे ने कल के इंडियन एक्सप्रेस में एक लेख लिखा था. यहां उसका अनुवाद दिया जा रहा है.  ————————————————– बाबा को गुजरे बीस साल हो गए, …

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परंतु हिटलर ने कुछ नहीं किया

आज रविभूषण पाठक की कविताएँ. रविभूषण की ये कविताएँ हिटलर नाम के उस व्यक्ति को लेकर हैं, जो विचारधारा बनकर फ़ैल गया, जो नायक बनना चाहता था लेकिन इतिहास के सबसे बड़े खलनायकों के रूप में याद किया जाता है. बहुत अलग-सी कविताएँ हैं- जानकी पुल. ————————————————————————————- 1. हिटलर मात्र …

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पंकज मित्र की कहानी ‘सहजन का पेड़’

अभी हाल में ‘लमही’ पत्रिका का कहानी विशेषांक आया है. उसमें कई कहानियां अच्छी हैं, लेकिन  ‘लोकल’ में ‘ग्लोबल’ की छौंक लगाने वाले पंकज मित्र की इस कहानी की बात ही कुछ अलग है. स्थानीय बोली-ठोली में बदलते समाज का वृत्तान्त रचने वाले इस कहानीकार का स्वर हिंदी में सबसे जुदा …

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वह तो सुगंध की तरह थी अनियंत्रित

अपने प्रिय कवि बोधिसत्त्व की एक नई लंबी कविता आपके लिए- जानकी पुल.  ————————————————————————- उसकी हँसी उस पर झुमका चुराने का आरोप थाउसे उसके पति ने दाग कर घर से निकाल दियावह कहाँ गई फिर कुछ पता नहीं चलाबहुत बाद में पता चलाझुमका चुराने का तो बहाना थावह पकड़ी गई थी …

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ज़्यादातर युवक झूठा प्रेम करते हैं…

मशहूर जर्मन कवि और लेखक राइनेर मारिया रिल्के, जो 1875 से 1926 तक हमारे बीच रहे। रिल्के की ज़िन्दगी एक बेचैन यायावर की तरह गुज़री। उन्होंने 30 कविता संग्रह, कहानियाँ, लेख, संस्मरण, समीक्षा और एक उपन्यास की रचना की। उनकी एक पुस्तक का हिंदी अनुवाद किया है राजी सेठ ने, जिसका …

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कला कलाकार की असल पूंजी है

अभिनेता बलराज साहनी हिन्दी सिनेमा की एक महान व अविस्मरणीय शख्सियत रहे हैं। 1 मई 1913 को पैदा हुए अभिनेता के जन्मशताब्दी वर्ष की शुरुआत आज से हो रही है. 1972 में दिल्ली प्रवास दौरान ‘जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय’ ने दीक्षांत सामारोह में उन्हें आमंत्रित किया था … इस अवसर पर बलराज साहनी ने एक …

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देखना होगा कि ऐसे कटघरे कहाँ-कहाँ हैं?

वरिष्ठ पत्रकार ओम थानवी के लेख पर पहले कवि-संपादक गिरिराज किराडू ने लिखा. अब उनके पक्ष-विपक्षों को लेकर कवि-कथाकार-सामाजिक कार्यकर्ता अशोक कुमार पांडे ने यह लेख लिखा है. इनका पक्ष इसलिए महत्वपूर्ण हो जाता है क्योंकि श्री मंगलेश डबराल अपनी ‘चूक’ संबंधी पत्र इनको ही भेजा था और फेसबुक पर …

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संतों घर में झगरा भारी!

कल हमने जनसत्ता संपादक ओम थानवी का लेख ‘आवाजाही के हक में‘ जनसत्ता से साभार लगाया था. फेसबुक और ब्लॉग्स पर गुंटर ग्रास की कविता, विष्णु खरे और मंगलेश डबराल को लेकर चली बहसों के सन्दर्भ में उस लेख में जो सवाल उठाये गए उसने उन बहसों को एक बात फिर बहसतलब …

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