Home / Tag Archives: राजकमल प्रकाशन

Tag Archives: राजकमल प्रकाशन

‘भीमराव अम्बेडकर: एक जीवनी’ पुस्तक का एक अंश

क्रिस्तोफ ज़ाफ़्रलो लिखित ‘भीमराव अम्बेडकर: एक जीवनी’ का हिंदी अनुवाद हाल में ही राजकमल प्रकाशन से प्रकाशित हुआ है। हिंदी अनुवाद योगेन्द्र दत्त ने किया है। आज बाबासाहेब की जयंती पर उस किताब का एक चुनिंदा अंश पढ़िए- मॉडरेटर ===================================== इस किताब का मक़सद आम्बेडकर के जीवन की घटनाओं को …

Read More »

हिंदी का सबसे बड़ा साहित्यिक प्रकाशन समूह कौन है?

यह पुराने प्रकाशनों के विलयन का दौर है, उनको नया रूप देने के लिए बड़े प्रकाशकों द्वारा अपनाया जा रहा है. कुछ समय पहले पेंगुइन ने हिन्द पॉकेट बुक्स को खरीद लिया था. अब खबर आई है कि राजकमल प्रकाशन समूह ने हिंदी के चार प्रकाशनों को पुनर्जीवित करने के लिए …

Read More »

कुछ कविताएँ ‘चौंसठ सूत्र सोलह अभिमान’ की

युवा कवि अविनाश मिश्र का कविता संग्रह ‘चौंसठ सूत्र सोलह अभिमान’ हिंदी में अपने ढंग का अकेला संग्रह है. यह कामसूत्र से प्रेरित है और प्रेम सिक्त है. हिंदी में इरोटिक कविताएँ लिखी गई हैं लेकिन घोषित रूप से इरोटिक कविता संकलन न के बराबर हैं. जो हैं भी उनके …

Read More »

सुजाता का उपन्यास ‘एक बटा दो’ अनामिका की भूमिका ‘न आधा न पूरा’

अभी हाल में ही संपन्न हुए विश्व पुस्तक मेले में युवा लेखिका सुजाता का उपन्यास ‘एक बटा दो’ राजकमल प्रकाशन से प्रकाशित हुआ है, जिसकी भूमिका प्रसिद्ध लेखिका अनामिका ने लिखा है. भूमिका साभार प्रस्तुत है- मॉडरेटर ====================== न आधा न पूरा * अनामिका जेन ऑस्टिन और जॉर्ज एलियेट के …

Read More »

देर आयद दुरुस्त आयद: सुरेन्द्र मोहन पाठक

अगला साल सुरेन्द्र मोहन पाठक के लेखन का साठवां साल है. साथ साल पहले उनकी एक कहानी ‘माया’ पत्रिका में प्रकाशित हुई थी. लेकिन अपने लेखकीय जीवन के साठवें साल में भी उनके पास नई-नई योजनायें हैं, अपने पाठकों के लिए नए नए प्लाट हैं. वे आज भी वैसे ही …

Read More »

सुरेन्द्र मोहन पाठक की आत्मकथा का अगला खंड राजकमल से

हिंदी में पाठक घट रहे हैं या बढ़ रहे हैं यह वाद विवाद का विषय हो सकता है लेकिन एक बात सच है कि हिंदी में पाठकजी(सुरेन्द्र मोहन पाठक) का विस्तार होता जा रहा है. कभी हिंदी में लुगदी साहित्य के पर्याय माने जाने वाले इस लेखक ने निस्संदेह हिंदी …

Read More »

राजकमल प्रकाशन का 70वां साल और सहयात्रा का उत्सव

हिंदी साहित्य के पर्याय की तरह है राजकमल प्रकाशन. पुस्तकों को लेकर नवोन्मेष से लेकर हिंदी के क्लासिक साहित्य के प्रकाशन, प्रसार में इन सत्तर सालों में राजकमल ने अनेक मील स्तम्भ स्थापित किये हैं. सहयात्रा के उत्सव के बारे में राजकमल प्रकाशन के सम्पादकीय निदेशक सत्यानन्द निरुपम के फेसबुक …

Read More »

नामवर सिंह की नई किताब है ‘द्वाभा’

जीते जी किंवदंती बन चुके नामवर सिंह की नई किताब आ रही है ‘द्वाभा’. राजकमल प्रकाशन से प्रकाशित इस किताब के बारे में पढ़िए- मॉडरेटर =================================== नामवर सिंह अब एक विशिष्ट शख्सियत की देहरी लाँघकर एक लिविंग ‘लीजेंड’ हो चुके हैं। तमाम तरह के विवादों, आरोपों और विरोध के साथ असंख्य लोगों की …

Read More »

केदारनाथ सिंह के नए संग्रह से कुछ कविताएं

कवि केदारनाथ सिंह के मरणोपरांत है ‘मतदान केंद्र पर झपकी’।  इसका विमोचन होने वाला है। विमोचन से पहले पढ़िये संग्रह की कुछ कविताएं- मॉडरेटर ============================================= 1 कालजयी कहना चाहता था बहुत पहले पर अब जबकि कलम मेरे हाथ में है कह दूँ- जो लिखकर फाड़ दी जाती हैं कालजयी होती …

Read More »

त्रिलोकनाथ पांडेय के उपन्यास ‘प्रेम लहरी’ का एक अंश

आज प्रेम के देवता का प्रकट-दिवस है। मुझे त्रिलोकनाथ पांडेय के उपन्यास ‘प्रेम लहरी’ का स्मरण हो आया, जो राजकमल प्रकाशन से शीघ्र प्रकाशित होने जा रहा है। इस ऐतिहासिक उपन्यास में कई लहरें हैं प्रेम की। आज एक लहर जो इसकी मूल कथा से कुछ इतर है लेकिन इतिहास …

Read More »