Home / Tag Archives: manisha kulshreshth

Tag Archives: manisha kulshreshth

मनीषा कुलश्रेष्ठ के उपन्यास ‘स्वप्नपाश’ का एक अंश

स्वप्नपाश का एक अंश हाल में ही मनीषा कुलश्रेष्ठ का उपन्यास आया है ‘स्वप्नपाश’. मनीषा हर बार एक नया विषय उठाती हैं, नए अंदाज़ में लिखती हैं. ये उपन्यास भी उसका उदाहरण है. बहरहाल, उपन्यास मैंने अभी तक पढ़ा नहीं है. पढने के बाद लिखूंगा उसके ऊपर. फिलहाल इस अंश …

Read More »

मनीषा कुलश्रेष्ठ की कहानी ‘रक्स की घाटी और शबे फितना’

समकालीन हिंदी-लेखिकाओं में मनीषा कुलश्रेष्ठ को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. अलग-अलग परिवेश को लेकर, स्त्री-मन के रहस्यों को लेकर उन्होंने कई यादगार कहानियां लिखी हैं. उमें स्त्री-लेखन का पारंपरिक ‘क्लीशे’ भी कभी-कभी दिख जाता है तो कई बार वह उस चौखटे को तोड़कर बाहर भी निकल आती हैं. जो …

Read More »

मनीषा कुलश्रेष्ठ की कहानी ‘मौसमों के मकान सूने हैं’

मनीषा कुलश्रेष्ठ हमारी भाषा की एक ऐसी लेखिका हैं जिनको पाठकों और आलोचकों की प्रशंसा समान रूप से मिली हैं. उनकी एक नई कहानी, जो हाल में ही एक समाचार पत्रिका ‘आउटलुक’ में छपी थी- जानकी पुल.  =============  इस बार वह इस मसले पर एकदम गंभीर थी. दिन भी बरसता – …

Read More »

मैं क्षमापूर्वक ‘ लमही सम्मान -2013 ‘ लौटाने की घोषणा करती हूं- मनीषा कुलश्रेष्ठ

‘लमही सम्मान 2013’ के संयोजक के आपत्तिजनक बयान के बाद हमारे समय की महत्वपूर्ण लेखिका मनीषा कुलश्रेष्ठ ने लेखकीय गरिमा के अनुरूप उचित कदम उठाते हुए ‘लमही सम्मान’ को वापस करने का निर्णय लेते हुए ‘लमही सम्मान 2013 के आयोजक के नाम यह पत्र लिखा है. उनके भेजे हुए इस …

Read More »

मनीषा कुलश्रेष्ठ की कहानी ‘खर पतवार’

मनीषा कुलश्रेष्ठ किसी परिचय की मोहताज नहीं हैं. हमारे दौर की इस प्रमुख लेखिका का हाल में ही कथा-संग्रह आया है- ‘गन्धर्व-गाथा’. प्रस्तुत है उसी संग्रह से एक कहानी लेखिका के वक्तव्य के साथ- जानकी पुल. x==============x==================x==============x==============x भूमिका कॉलेज के दिनों में मेरे पास एक टी – शर्ट हुआ करती …

Read More »

लिखना समय के प्रवाह के विरुद्ध

अपनी कहानियों और कश्मीर की पृष्ठभूमि पर लिखे गए उपन्यास ‘शिगाफ’ के कारण चर्चा में रहनेवाली लेखिका मनीषा कुलश्रेष्ठ किसी परिचय की मोहताज़ नहीं हैं. प्रस्तुत है उनकी रचनाप्रक्रिया– जानकी पुल. आज साहित्य – जगत अति विषम – ध्रुवीयकण से ग्रस्त है. लिखना, समय के प्रवाह के विरुद्ध बहने जैसा …

Read More »

तू खेलता है नूर से मेरे यक़ीन के

समकालीन हिंदी लेखकों में मनीषा कुलश्रेष्ठ का नाम किसी परिचय का मोहताज नहीं है. हाल में ही उनका उपन्यास आया है ‘शिगाफ’, जो कश्मीर की पृष्ठभूमि पर है. प्रस्तुत है उसका एक रोचक अंश- जानकी पुल. रोड टू लामांचा ब्लॉगस्पॉट डॉट कॉम ( अमिता)‘ला मांचा‘ सोचते ही पवनचक्कियां दिमाग़ में …

Read More »