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Tag Archives: अमृत रंजन

अमृत रंजन की कुछ छोटी-छोटी कविताएँ

  कविता को  अभिव्यक्ति का सबसे सच्चा रूप माना जाता है क्योंकि ऐसा माना जाता है कि कवि कविता के माध्यम से अपने दिल की सबसे सच्ची बातों को अभिव्यक्त करता है. अभिव्यक्ति जितनी सच्ची होती है पढने वाले को अपने दिल की आवाज लगने लगती है. बाल कवि अमृत …

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गिसेप उंगारेत्ति की कविताएँ: अमृत रंजन का अनुवाद

प्रसिद्ध इतालवी कवि गिसेप उंगारेत्ति की कविताओं का अनुवाद प्रस्तुत है. अनुवाद किया है अमृत रंजन. अमृत रंजन में पहली बार कविताओं का अनुवाद किया है और काफी प्रवाहमयी शैली में किया है- मॉडरेटर ==================================================== अमर   तोड़े गए फूल अर्पित फूल बीच में अनगिनत शून्य ——————————   सैनिक   …

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अमृत रंजन की चार नई कविताएँ

क्या अच्छी कविता लिखने की कोई उम्र होती है? क्या लेखन में परिपक्वता का सम्बन्ध उम्र से होता है?  अमृत रंजन की नई कविताएँ पढ़ते हुए मन में यही सवाल उठते रहे. 15 साल की उम्र में अगर किसी कवि के अहसास इतने बेचैन करने लगें तो ओरहान पामुक के …

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बिजली भगवान का क्रोध नहीं है और बच्चे पेड़ से नहीं गिरते हैं!

नए संपादक की नई रचना. अमृत रंजन में जो बात मुझे सबसे अधिक प्रभावित करती है कि वह झटपट कुछ लिखकर लोकप्रिय नहीं हो जाना चाहता है बल्कि वह  लेखक के माध्यम से वैचारिक कगारों को छूना चाहता है, उनका अन्वेषण करना चाहता है. इसलिए उसकी कविताओं में और उसके …

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बाल कवि अमृत रंजन की वयस्क कविताएँ

बाल कवि अमृत रंजन की कविताएँ करीब चार साल से पढ़ रहा हूँ, जानकी पुल पर साझा कर रहा हूँ. 14 साल के इस कवि में प्रश्नाकुलता बढती जा रही है, जीवन जगत के रहस्यों को लेकर जिज्ञासा भी. कविताई भी निखर रही है. कुछ नई कविताएँ पढ़िए. आज कवि …

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अमृत रंजन का लेख ‘अंत जिज्ञासा है’

स्कूली लेखक अमृत रंजन जैसे जैसे बड़ा होता जा रहा है उसके लेखन-सोच का दायरा बड़ा होता जा रहा है. उसके लेखन में गहरी दार्शनिकता आ गई है. सबसे बड़ी बात यह है कि हिन्दुस्तान से आयरलैंड जा चुका है लेकिन हिंदी में लिखना नहीं छूटा है. इस बार पढ़ते …

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किशोर कवि अमृत रंजन की नई कविताएँ

अमृत रंजन जब पुणे में पांचवीं कक्षा में पढता था तब से जानकी पुल पर उसकी कविताएँ, उसके लेख, उसकी डायरी के अंश छपते रहे हैं अब वह आयरलैंड में है तब भी हिंदी में लिखने का उसका जूनून बाक़ी है. उसकी कविताओं में पहले जो एक बालसुलभ जिज्ञासा थी …

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शुरुआत ‘कुछ नहीं’ है

स्कूली लेखक अमृत रंजन इस बार बहुत दिनों बाद जानकी पुल पर लौटा है. उसकी कविताओं से हम सब भली भांति परिचित हैं. एक बार उसने स्कूल डायरी लिखी थी और एक बार चेतन भगत के उपन्यास ‘हाफ गर्लफ्रेंड’ की समीक्षा की थी. इस बार वह कुछ दार्शनिक प्रश्नों से …

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स्कूली कवि अमृत रंजन की कवितायेँ

हमारा स्कूली कवि अमृत रंजन नई कविताओं के साथ हाजिर है. उसकी कविताओं की सबसे बड़ी विशेषता जो मुझे लगती है कि वह किसी की तरह नहीं बल्कि अपनी तरह लिखना चाहता है. इस बालक से यह हुनर आज के युवा कवियों को सीखना चाहिए कि वे  वरिष्ठ कवियों की …

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अमृत रंजन की ‘पांचवीं क्लास की डायरी’

अमृत रंजन की कवितायेँ हम जानकी पुल पर तब से पढ़ रहे हैं जब वह पांचवीं कक्षा में था. अब वह सातवीं कक्षा में है और उसने पांचवीं कक्षा के अनुभवों को डायरी की शक्ल में लिखा है. मेरे ख़याल से पहली ही बार किसी बालक ने हिंदी में इस …

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