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Tag Archives: divya vijay

दिव्या विजय की बाल कहानी ‘यक्ष की शामत आई’

आज बाल दिवस है. प्रस्तुत है दिव्या विजय की बाल कहानी- मॉडरेटर  =============================================== राजकुमार अजय आखेट के लिए निकले हुए थे. वह जूनागढ़ रियासत के इकलौते, मन्नतों से माँगे गए लाड़ले राजकुमार थे. रियासत की प्रजा को उनसे बहुत-सी अपेक्षाएं थीं तथा उनमें वह सुयोग्य राजा होने के गुण देखती …

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निर्मल को पढने से मन निर्मल हो जाता है

आज महान लेखक निर्मल वर्मा की पुण्यतिथि है. लेखिका दिव्या विजय ने उनके लिखे किरदारों को नाटक में जीने के अपने अनुभव के आधार पर लिखा है कि किस तरह निर्मल वर्मा के लिखे को महसूस किया जा सकता था. हिंदी के उस विश्वस्तरीय लेखक को श्रद्धांजलि- मॉडरेटर  ========================================================= निर्मल …

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यह फ़िल्म देखते हुए बरबस ही कामसूत्र याद हो आई!

‘पार्च्ड’ फिल्म को लेकर स्त्रीवाद के सन्दर्भ में काफी बहस हुई थी. यह लेख उसी फिल्म के बहाने लिखा है लेखिका दिव्या विजय ने- मॉडरेटर  ========= यह फ़िल्म देखते हुए बरबस ही कामसूत्र याद हो आई। नग्न अथवा कामक्रिया के दृश्यों के कारण नहीं वरन् देह की देह के प्रति …

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क्यों ‘पिंक’ जैसी फिल्मों की जरूरत है संवेदनहीन पुरुष समाज के लिए?

अनिरुद्ध रॉय चौधरी निर्देशित और रितेश शाह लिखित फिल्म ‘पिंक’ की बड़ी चर्चा है. इस फिल्म के प्रभाव को लेकर, इसके द्वारा उठाये गए सवालों को लेकर लेखिका दिव्या विजय ने यह टिप्पणी लिखी है- मॉडरेटर  ============ एक मौन चीख़ हृदय से हर बार निकलती है जब लड़कियों को परदे …

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रेखा के रहस्य को उद्घाटित करने वाली किताब

इन दिनों यासिर उस्मान द्वारा रेखा पर लिखी गई किताब ‘रेखा: द अनटोल्ड स्टोरी’ की अंग्रेजी में बहुत चर्चा है. जगरनौट प्रकाशन से प्रकाशित यह किताब अब हिंदी में भी आने वाली है. बहरहाल, युवा लेखिका दिव्या विजय ने अंग्रेजी की इस किताब को पढ़कर हिंदी में इसके ऊपर पहली …

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कड़वे बादाम की खुशबू और ‘लव इन द टाइम ऑफ़ कॉलरा’

गैब्रियल गार्सिया मार्केज़ के उपन्यास ‘लव इन द टाइम ऑफ़ कॉलरा’ प्रेम का महाकाव्यात्मक उपन्यास है. इस उपन्यास की न जाने कितनी व्याख्याएं की गई हैं. इसके कथानक की एक नई व्याख्या आज युवा लेखिका दिव्या विजय ने की है- मॉडरेटर  ===================== महबूब कहे तुम मोहब्बत करती हो मगर वैसी नहीं। मैं पूछूँ कैसी? और वो सामने रख दे यह किताब और आँखें जगर मगर हो उठें पहली ही पंक्ति पर। ‘कड़वे बादाम कीख़ुशबू उसे हमेशा एकतरफ़ा प्यार के भाग्य की याद दिलाती थी!’  मार्केज़ के अनेक विलक्षण कार्यों में से एक है ‘लव इन द टाइम ऑफ़ कॉलरा।‘  किताब पढ़ना कई तरह का होता है। …

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पति, पत्नी और वो का मुकदमा और ‘रुस्तम’

नानावती के प्रसिद्ध मुकदमे को लेकर फिल्म आई है ‘रुस्तम’. पति, पत्नी और वो की इस कहानी को देखने का नजरिया भी समय के साथ बदलता जा रहा है और इसकी व्याख्या भी. ‘रुस्तम’ की एक आलोचनात्मक समीक्षा लेखिका दिव्या विजय ने लिखी है- मॉडरेटर. ============================================ सीपिया शेड की यह …

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दिव्या विजय की कहानी ‘मन के भीतर एक समंदर रहता है’

दिव्या विजय ड्रैमैटिक्स में स्नातकोत्तर हैं. आठ साल बैंकॉक में बिताकर आई हैं. कुछ नाटकों में अभिनय कर चुकी हैं. आकाशवाणी में रेडियो नाटकों के लिए आवाज देती हैं. यह उनकी दूसरी प्रकाशित कहानी है. काफी अलग तरह की संवेदना और परिवेश की कहानी- मॉडरेटर  ===================================== रेत स्नान करते हुए …

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दिव्या विजय की कहानी ‘परवर्ट’

मेरे जीमेल अकाउंट में अनजान पतों से अच्छी अच्छी कविताएं ही नहीं कई बार सुन्दर कहानियां भी आती हैं. आज दिव्या विजय की कहानी. दिव्या बायोटेक्नोलोजी से स्नातक हैं, मैनेजमेंट की पढ़ाई करने के बाद बैंकॉक में रहती हैं. उनकी यह कहानी अच्छी है या बुरी यह तो आप पढ़कर …

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