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रविकांत की किताब और उनकी भाषा लीला

मीडिया की भाषा-लीला– यह इस साल की सबसे सुसज्जित पुस्तक है. प्रकाशक वाणी प्रकाशन है. रविकांत की यह हिंदी में पहली प्रकाशित पुस्तक है. महज इससे रविकांत का महत्व नहीं समझा जा सकता है. पिछले करीब तीन दशकों में इतिहासकार रविकांत ने दिल्ली विश्वविद्यालय में हिंदी पढने वाले विद्यार्थियों को …

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मनोज कुमार पाण्डेय की कहानी ‘मदीना’

मनोज कुमार पाण्डेय समकालीन लेखकों में सबसे नियमित और निरंतर कुछ बेहतर लिखने के लिए जाने जाते हैं. उनकी यह नई कहानी भी इसी ताकीद करती है- मॉडरेटर  ========================================== गाँव में मेरा घर गाँव से थोड़ा परे हटकर था। पूरा गाँव जहाँ हरियाली और रास्ता था वहीं मेरे घर के आसपास …

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राकेश तिवारी के उपन्यास ‘तिराहे पर फसक’ का अंश

राकेश तिवारी का कहानी संग्रह कुछ समय पहले आया था- मुकुटधारी चूहा. अच्छी कहानियां थीं. उनके लेखन में एक अन्तर्निहित विट है जो पाठकों को बांधता है. यह उनके इस उपन्यास में भी दिखाई देता है. फसक कुमाऊंनी भाषा का शब्द है जिसका अर्थ गप्प होता है. एक रोचक अंश …

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‘पिंक’ की आलोचना करना रिस्क उठाने जैसा है

‘पिंक’ फिल्म को लेकर एक अलग दृष्टिकोण से कुछ तार्किक सवाल उठाये हैं अभिनय झा ने- मॉडरेटर  ============================ मौज़ूदा धारा से थोड़ा हटकर “पिंक” सिनेमा की आलोचना करना मॉब लिंचिंग का शिकार होने का रिस्क लेने जैसा है, तब भी। वैसे आलोचना न कह कर दृष्टिकोण का अंतर कहना ठीक …

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क्यों ‘पिंक’ जैसी फिल्मों की जरूरत है संवेदनहीन पुरुष समाज के लिए?

अनिरुद्ध रॉय चौधरी निर्देशित और रितेश शाह लिखित फिल्म ‘पिंक’ की बड़ी चर्चा है. इस फिल्म के प्रभाव को लेकर, इसके द्वारा उठाये गए सवालों को लेकर लेखिका दिव्या विजय ने यह टिप्पणी लिखी है- मॉडरेटर  ============ एक मौन चीख़ हृदय से हर बार निकलती है जब लड़कियों को परदे …

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रस्किन बांड की कहानी ‘अँधेरे में एक चेहरा’

रस्किन बांड ने भूतों-प्रेतों की अलौकिक दुनिया को लेकर अनेक कहानियां लिखी हैं. उनकी ऐसी ही कहानियों का संकलन ‘अँधेरे में एक चेहरा’ नाम से राजपाल एंड संज प्रकाशन से प्रकाशित हुआ है. अंग्रेजी से इन कहानियों का अनुवाद किया है युवा लेखिका रश्मि भारद्वाज ने. उसी किताब से एक …

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रेखा के रहस्य को उद्घाटित करने वाली किताब

इन दिनों यासिर उस्मान द्वारा रेखा पर लिखी गई किताब ‘रेखा: द अनटोल्ड स्टोरी’ की अंग्रेजी में बहुत चर्चा है. जगरनौट प्रकाशन से प्रकाशित यह किताब अब हिंदी में भी आने वाली है. बहरहाल, युवा लेखिका दिव्या विजय ने अंग्रेजी की इस किताब को पढ़कर हिंदी में इसके ऊपर पहली …

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न्यू टाइप हिंदी में हैपी हिंदी डे!

आज हिंदी दिवस है. यह दिवस क्या हिंदी का स्यापा दिवस होता है? हर साल सरकारी टाइप संस्थाओं में हिंदी के विकास का संकल्प ऐसे लिया जाता है जैसे 2014 के आम चुनाव में भाजपा ने देश के विकास का संकल्प लिया था. सरकारी स्यापे से अलग हिंदी ‘नई वाली’ …

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सुदीप नगरकर का उपन्यास ‘वो स्वाइप करके उतर गई दिल में मेरे’

सुदीप नगरकर अंग्रेजी में उपन्यास लिखते हैं और युवाओं के चहेते हैं. मैं जब पिछली बार पटना गया था पटना विश्वविद्यालय के विद्यार्थी सत्यम कुमार झा के हाथ में उनका उपन्यास देखकर चौंक गया था. मैंने सोचा उसके उपन्यासों को हिंदी में किया जाए. वह रोमांस तो लिखते हैं लेकिन …

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कड़वे बादाम की खुशबू और ‘लव इन द टाइम ऑफ़ कॉलरा’

गैब्रियल गार्सिया मार्केज़ के उपन्यास ‘लव इन द टाइम ऑफ़ कॉलरा’ प्रेम का महाकाव्यात्मक उपन्यास है. इस उपन्यास की न जाने कितनी व्याख्याएं की गई हैं. इसके कथानक की एक नई व्याख्या आज युवा लेखिका दिव्या विजय ने की है- मॉडरेटर  ===================== महबूब कहे तुम मोहब्बत करती हो मगर वैसी नहीं। मैं पूछूँ कैसी? और वो सामने रख दे यह किताब और आँखें जगर मगर हो उठें पहली ही पंक्ति पर। ‘कड़वे बादाम कीख़ुशबू उसे हमेशा एकतरफ़ा प्यार के भाग्य की याद दिलाती थी!’  मार्केज़ के अनेक विलक्षण कार्यों में से एक है ‘लव इन द टाइम ऑफ़ कॉलरा।‘  किताब पढ़ना कई तरह का होता है। …

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