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Tag Archives: प्रभात रंजन

नाटक क्या सिनेमा का फाटक होता है?

  आज ‘प्रभात खबर’ अखबार में भारंगम के बहाने मैंने नाटक-नाटककारों पर लिखा है. आप यहाँ भी पढ़ सकते हैं- प्रभात रंजन  ================ ‘अपने यहाँ, विशेष रूप से हिन्दी में, उस तरह का संगठित रंगमंच है ही नहीं जिसमें नाटककार के एक निश्चित अवयव होने की कल्पना की जा सके’- …

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ऋषि कपूर की आत्मकथा कपूर परिवार की ‘खुल्लमखुल्ला’ है

कल किन्डल पर ऋषि कपूर की आत्मकथा ‘खुल्लमखुल्ला’ 39 रुपये में मिल गई. पढना शुरू किया तो पढता ही चला गया. हिंदी सिनेमा के सबसे बड़े सबसे सफल घराने कपूर परिवार के पहले कपूर की आत्मकथा के किस्सों से पीछा छुड़ाना मुश्किल था. सबसे पहले अफ़सोस इस बात का हुआ …

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‘मुक्तांगन’ में ‘राम’ से शाम तक

वसंत के मौसम के लिहाज से वह एक ठंढा दिन था लेकिन ‘मुक्तांगन’ में बहसों, चर्चाओं, कहानियों, शायरी और सबसे बढ़कर वहां मौजूद लोगों की आत्मीयता ने 29 जनवरी के उस दिन को यादगार बना दिया. सुबह शुरू हुई राम के नाम से और शाम होते होते दो ऐसे शायरों …

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देशभक्ति के दौर में ‘देश’ से जुड़ा ‘देस’ का किस्सा

आजकल अजब माहौल है. लोग बात बात में ‘देश’ की बात करने लगते हैं. कहने लगते हैं देश से बड़ा कुछ नहीं होता. एक बार ऐसे ही मेरे अपने ‘देस’ के नंदन ठाकुर के ऊपर यह धुन सवार हो गई थी कि वे दिल्ली जायेंगे देश को देखेंगे.  अपनी ही …

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शशि कपूर की ‘असीम’ जीवनी

 इससे पहले राजेश खन्ना की जीवनी पढ़ी थी. यासिर उस्मान की लिखी हुई. आजकल फ़िल्मी कलाकारों की जीवनियों का ऐसा दौर चला हुआ है कि पढ़ते हुए डर लगता है- पता नहीं किताब कैसी निकले? लेकिन शशि कपूर की जीवनी ‘द हाउसहोल्डर, द स्टार’ पढ़कर सुकून मिला. ऐसा नहीं है …

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हेमिंग्वे की कहानी ‘आज शुक्रवार है’

जुलाई का महीना अर्नेस्ट हेमिंग्वे का महीना है. उस लेखक जो दुनिया के सबसे महान कथा-लेखकों में एक थे. आज उनकी यह कहानी ‘आज शुक्रवार है’, जो नाटकीय शैली में लिखी गई है और इसमें तीन रोमन सिपाहियों की बातचीत है जो ईसा मसीह को सूली पर लटकाकर लौटे हैं. …

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आंसुओं के माध्यम से कही गयी प्रेम कहानी

फ्रेंच लेखक डाविड फोइन्किनोस के उपन्यास डेलिकेसी’ का एक अंश. यह उपन्यास हिंदी में  ‘नजाकत’ के  नाम  से  राजपाल एंड  सन्ज प्रकाशन से  प्रकाशित  हुआ  है. अनुवाद मैंने किया है- प्रभात रंजन  ================================================================             मार्कस की छोटी सी प्रेम कहानी, उसके आंसुओं के माध्यम से कही …

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क्या पत्रकार होना कमतर लेखक होना होता है?

जब दो सप्ताह पहले ‘जनसत्ता’ में प्रकाशित अपने लेख में  प्रोफ़ेसर गोपेश्वर सिंह ने लप्रेक लेखक रवीश कुमार को टीवी पत्रकार कहकर याद किया था तो सबसे पहले मेरे ध्यान में यह सवाल आया था कि क्या लेखक होने के लिए किसी ख़ास पेशे का होना चाहिए? हम शायद यह भूल जाते …

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पाट्रिक मोदियानो का उपन्यास हिंदी में- मैं गुमशुदा!

  2014 में जब फ्रेंच भाषा के लेखक पाट्रिक मोदियानो को नोबेल पुरस्कार मिला तो कम से कम हिंदी की दुनिया में वह एक अपरिचित सा नाम लगा. बाद में पढने में आया कि फ्रांस के बाहर भी उनका नाम बहुत परिचित नहीं था क्योंकि उनके अनुवाद बहुत हुए नहीं …

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देवदत्त पटनायक की पुस्तक ‘भारत में देवी’ का एक अंश

देवदत्त पट्टनायक हमारे समय में संभवतः मिथकों को आम लोगों की भाषा में पाठकों तक सरल रूप में पहुंचाने वाले सबसे लोकप्रिय लेखक हैं. उनकी नई पुस्तक आई है ‘भारत में देवी: अनंत नारीत्व के पांच स्वरुप‘. यह हिन्दू धर्म में देवी के स्वरुप को लेकर संभवतः पहली पुस्तक है, जिसमें …

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