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Tag Archives: ashok vajpeyi

आज से शुरू हो रहा है भारतीय कविता का अनूठा आयोजन ‘वाक्’

आज से दिल्ली के त्रिवेणी कला संगम में भारतीय कविता की द्विवार्षिकी (बिनाले) ‘वाक्’ की शुरुआत हो रही है. रज़ा फाउंडेशन द्वारा आयोजित यह कार्यक्रम अपने ढंग का पहला ही आयोजन है. सिर्फ कविताक-पाठ, कविता चर्चा के आयोजन इससे पहले नहीं हुए हैं. तीन दिन तक चलने वाले इस आयोजन …

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अल्पसंख्यक होना लगभग अपराधी होना बन गया है- अशोक वाजपेयी

अशोक वाजपेयी अपनी जनतांत्रिकता के लिए जाने जाते रहे हैं. देश की जनतांत्रिक परम्पराओं पर जब भी संकट के बादल मंडराए हैं उन्होंने आगे बढ़कर उका प्रतिकार किया. 2002 में हुए गुजरात दंगों के समय उन्होंने सरकारी सेवा में रहते हुए खुलकर सरकार का विरोध किया था और प्रतिरोध की …

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अशोक वाजपेयी आज 74 साल के हो गए

अगर हिंदी का कोई गणतंत्र है तो वे उसकी राजधानी हैं. वे हिंदी के विकेंद्रीकरण के सबसे बड़े प्रतीक हैं. वे हिंदी के भोपाल हैं, पटना हैं, रायपुर हैं, जयपुर हैं, मुम्बई हैं नागपुर हैं. वे हिंदी की संकुचन के नहीं विस्तार के प्रतीक हैं. वही अशोक वाजपेयी आज 74 …

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कवि-आलोचक होना जोखिम उठाना है- अशोक वाजपेयी

अशोक वाजपेयी मूलतः कवि हैं लेकिन जितना व्यवस्थित गद्य-लेखन उन्होंने किया है उनके किसी समकालीन लेखक ने नहीं किया. वे आलोचना की दूसरी परंपरा के सबसे मजबूत स्तम्भ रहे हैं. उनके आलोचना कर्म पर बहुत अच्छी बातचीत की है सुनील मिश्र ने. एक पढने और सहेजने लायक बातचीत- मॉडरेटर  =================================================================== …

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लहर का पता नहीं. अगर थी तो सब उसमें नहीं बहे

वरिष्ठ लेखकों-कवियों का धर्म केवल व्यास सम्मान, ज्ञानपीठ पुरस्कार हासिल करना भर नहीं होता है. उनका बड़ा काम समकालीन लेखकों को प्रेरणा देना भी होता है. आसन्न फासीवाद के खतरे की चुनौतियों का सामना अशोक वाजपेयी जिस तरह से अपनी कविताओं, अपने स्तम्भ, अपने वक्तव्यों के माध्यम से कर रहे …

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विचारधारा प्रतिभा को पुष्ट-सशक्त कर सकती है, उसे नष्ट भी- अशोक वाजपेयी

कल श्री गिरिराज किराडू ने हमारी भाषा के वरिष्ठ कवि-आलोचक-संपादक श्री अशोक वाजपेयी को उनकी बातों के सन्दर्भ में स्पष्टीकरण देते हुए पत्र लिखा था. आज अशोक जी ने उस पत्र का जवाब देते हुए बहुत गरिमापूर्ण ढंग से अपनी बातों को रखा है, लेकिन इस छोटे से पत्र में …

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‘प्रतिलिपि’ ने किताबों के प्रकाशन के लिए वित्तीय मदद मांगी थी– अशोक वाजपेयी

श्री अशोक वाजपेयी का यह ईमेल हमें प्राप्त हुआ है जिसमें उन्होंने ‘प्रतिलिपि बुक्स’ को लेकर कुछ बातों को स्पष्ट किया है. प्रतिलिपि के निदेशक युवा कवि-कल्पनाशील संपादक गिरिराज किराडू हैं. यह लोकतांत्रिकता का तकाजा है कि हम वरिष्ठ कवि-आलोचक-संपादक अशोक वाजपेयी के उस ईमेल को अविकल रूप से सार्वजनिक …

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अशोक वाजपेयी आज 72 साल के हो गए

अशोक वाजपेयी के जन्मदिन पर जानकी पुल की ओर से शुभकामनाएं.  ================================================ अशोक वाजपेयी आज 72 साल के हो गए. इस उम्र में भी उनकी सक्रियता नई पीढ़ी के लिए प्रेरणाप्रद है. हर हफ्ते ‘जनसत्ता में प्रकाशित होने वाला उनका स्तंभ निस्संदेह किसी हिंदी लेखक का सबसे अधिक नियमित और …

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खाकर वे सो रहे हैं जागकर हम रो रहे हैं

 ये अशोक वाजपेयी की नई कविताएँ हैं. करीब अर्ध-शताब्दी से अशोक वाजपेयी हिंदी कविता में दूसरी परम्परा की सबसे बड़ी आवाज के तौर पर मौजूद हैं, बेहद मजबूती से. उनकी कविताओं में हिंदी कविता की अनेक परम्पराओं की गूँज सुनाई देती है, लेकिन कविता में उन्होंने अपनी परंपरा भी बनाई. …

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हिंदी में लोकप्रियता का आतंक तेजी से बढ़ रहा है

आज अशोक वाजपेयी ने श्रेष्ठता और लोकप्रियता को लेकर ‘जनसत्ता’ में अपने स्तंभ ‘कभी-कभार’ में अच्छा लिखा है. बहसतलब- जानकी पुल. ===========================  लोकतंत्र और आधुनिक संसार दोनों में संख्या का बड़ा महत्त्व है। बाहुबल और धनबल आदि का इस्तेमाल लोकतंत्र में अंतत: संख्याबल पाने के लिए किया जाता है। जिसके …

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