Home / व्यंग्य

व्यंग्य

अंडे महंगे हो रहे है!

इंजीनियरिंग की पढ़ाई बीच में छोड़कर मास कम्यूनिकेशन की पढ़ाई करने वाले युवा लेखक नमन नारायण के लेखन में अंतर्निहित विट है और बहुत परिपक्व नजरिया। इस लेख में ही देखिए- ================== आज मैं छत पर अकेला ही बैठा था। हॉस्टल में आज काफी शांति थी। युद्ध के बाद वाली …

Read More »

सुरेन्द्र मोहन पाठक का व्यंग्य ‘बाल साहित्य कैसे लिखें’

जाने-माने लेखक सुरेन्द्र मोहन पाठक अब पूरी तरह स्वस्थ हैं और दुबारा लेखन में रम गए हैं। यह उनका नया व्यंग्य पढ़िए, जो खास आपके लिए लिखा है उन्होंने- ================================ ‘बाल साहित्य कैसे लिखें’ (पाठ्यक्रम में रूचि रखने वाले व्यक्तियों के लिए)   हमें विश्वस्त सूत्रों से ज्ञात हुआ है …

Read More »

अमित गुप्ता का व्यंग्य ‘दाढ़ी क्यों बढ़ा रहे हो?’

आज पढ़िए युवा लेखक-कवि अमित गुप्ता का व्यंग्य, जो बढ़ती महंगाई पर है- ========================================  घड़ी के अलार्म ने सुबह-सुबह ऐसा हल्ला मचाया कि जैसे वो मेज से अभी-अभी उछलकर अपनी छूटती हुई ट्रेन को पकड़ने के लिए दौड़ पड़ेगा। माधव भकुआया हुआ उठा और जैसे-तैसे कर अलार्म बंद किया, सोचा …

Read More »

पतरस बुख़ारी का व्यंग्य ‘बाइसिकिल’

पतरस बुख़ारी का नाम उर्दू के प्रमुख व्यंग्यकारों में लिया जाता है। बीसवीं शताब्दी के मध्य में उन्होंने वाचिक परम्परा की व्यंग्य परम्परा को एक बड़ी पहचान दी। हाल में ही उनकी किताब हिंदी में आई है- सिनेमा का इश्क़, जो उनके व्यंग्य लेखों का संग्रह है। मैंड्रेक प्रकाशन से …

Read More »

सरकारी नौकरी उर्फ़ एटर्नल रेस्ट: सुरेन्द्र मोहन पाठक

  प्रसिद्ध लेखक सुरेन्द्र मोहन पाठक का व्यंग्य पढ़िए। आज जानकी पुल पर विशेष- ========================================== पहले जब मैं बेकार था तो कहा करता था कि कैसी भी नौकरी मिल जाये मुझे मंजूर होगी. ऊपर वाले के करम से आखिर नौकरी मिल गयी तो मैं उस से बेहतर नौकरी की ख्वाहिश …

Read More »

अनुकृति उपाध्याय का व्यंग्य ‘मेला देखन मैं गई’

‘जापानी सराय’ की लेखिका अनुकृति उपाध्याय ने इस बार व्यंग्य लिखा है। फागुन में साहित्य महोत्सवों की संस्कृति पर एक फगुआया हुआ व्यंग्य। आप भी पढ़िए- मॉडरेटर ================= मेला देखन मैं गई भूतपूर्व अभिनेत्री सत्र शुरू होने के आधे घंटे बाद लहराती हुई आई थी और छद्म मासूमियत के साथ …

Read More »

ईल्या इल्फ़ और एव्गेनी पेत्रोव की रचना ‘कड़ाके की ठंड’

दिल्ली की भारी ठंड में आज सुबह यह पढ़ने को मिला। रूसी लेखकों ईल्या इल्फ़ और एव्गेनी पेत्रोव ने इसे 1935 में लिखा था। दोनों साथ साथ लिखते थे और प्रसिद्ध व्यंग्यकार थे। रूसी भाषा की पूर्व प्रोफ़ेसर तथा अनुवादिका आ चारुमति रामदास ने ने इसका अनुवाद मूल भाषा से …

Read More »

राष्ट्रवाद के भारी बारिश की उम्मीद है

आज यह व्यंग्य पढ़िए। लिखा है सेंट स्टीफेंस कॉलेज में इतिहास के विद्यार्थी उन्नयन चंद्र ने- मॉडरेटर ============================================== भारत की लगभग 44 फ़ीसदी आबादी जल संकट से जूझ रही है. गर्मी में चापाकल सूख रहे है. टुल्लू पम्प में पानी ऐसे आ रहा है जैसे मोपेड एवरेस्ट पर चढ़ रहा हो. महाराष्ट्र …

Read More »

 इरशाद ख़ान सिकन्दर की व्यंग्य कहानी ‘सिलवट भोजपुरिया’

इरशाद खान सिकंदर मूलतः शायर हैं। लेकिन लेकिन वे उन दुर्लभ शायरों में हैं जो गद्य भी बाकमाल लिखते हैं। अब यह व्यंग्य ही पढ़िए- मॉडरेटर ============                                         बात पुरानी है मगर …

Read More »

भारत में शादी विषय पर 1500-2000 शब्दों में निबंध लिखें

अभी दो दिन पहले नोएडा जाते वक्त जाम में फंस गया. कारण था शादियाँ ही शादियाँ. तब मुझे इस व्यंग्य की याद आई. सदफ़ नाज़ ने लिखा था शादियों के इसी मौसम में- मॉडरेटर =============================================== भारतीय उपमहाद्वीप के अधिकतर देशों में शादी एक सामाजिक और नैतिक ज़िम्मेदारी मानी जाती है। …

Read More »