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स्टोरीटेल के ऐप पर ‘कसप’ सुनते हुए

जब मैं करीब 12-13 साल का था तब मेरे दादाजी बहुत बीमार हो गए थे. उन दिनों वे मुझसे किताबें पढ़वाकर सुनते थे. दिनकर जी की ‘रश्मिरथी’, रामवृक्ष बेनीपुरी जी का नाटक ‘अम्बपाली’, आचार्य चतुरसेन का उपन्यास ‘वैशाली की नगरवधू’ जैसी कुछ किताबों के नाम याद आ रहे हैं जो …

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संगीत में राजनीति और राजनीति में संगीत: मृणाल पाण्डे

विदुषी लेखिका मृणाल पांडे ने हाल के वर्षों में भारतीय संगीत परम्परा पर इतना अच्छा लिखा है कि सहेजने लायक है. अभी हाल में ही उन्होंने नेमिचंद जैन स्मृति व्याख्यान में रागदारी संगीत और राजनीति के रिश्तों पर बहुत अच्छा लेख लिखा और उसका पाठ भी किया. पूरा लेख यहाँ …

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कविता की कहानी ‘लौटना किसी क्रिया का नाम नहीं’

आजादी के दिन कुछ अच्छी रचनाएँ भी पढनी चाहिए. जैसे कविता की यह कहानी. संयोग से आज उनका जन्मदिन भी है. बधाई के साथ- मॉडरेटर =================================== 1   उस दिन अपनी आखिरी कोशिश के बाद मैं और भहराई थी, टूटते किनारों के दहाने जैसे अपने आप खुल गए, मुझे बहा …

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भगवानदास मोरवाल के उपन्यास ‘सुर बंजारन’ का एक अंश

एक समय में इस देश में लगने वाले मेलों की ठाठ नौटंकी के बिना अधूरी रहती थी. नौटंकी को गरीबों का सिनेमा कहा जाता था, जिस में गीत-संगीत के साथ कहानी दिखाई जाती थी. नौटंकी विधा को आधार बनाकर भगवानदास मोरवाल ने ‘सुर बंजारन’ नामक उपन्यास लिखा जो वाणी प्रकाशन …

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विश्व की पहली ट्रांसजेंडर प्रधानाचार्या मनोबी बंद्योपाध्याय का साक्षात्कार

विश्व की पहली ट्रांसजेंडर प्रधानाचार्या ,बंगाल ट्रांसजेंडर सेल की प्रमुख, ट्रांसजेंडर पर पहला शोध देने वाली , अबोमनोब (शुभुमन) पहली बंगला ट्रांसजेंडर पत्रिका की सम्पादिका, A Gift of goddess Lakshmi की लेखिका मानोबी बंद्योपाध्याय के साथ एक बहुत शोधपूर्ण साक्षात्कार लिया है प्रियंका कुमारी नारायण ने. प्रियंका बीएचयू की शोध …

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भोजपुरी कविता संग्रह की हिंदी समीक्षा

जलज कुमार ‘अनुपम’ के भोजपुरी कविता संग्रह पर पीयूष द्विवेदी भारत ने हिंदी में समीक्षा लिखी है- मॉडरेटर ============================================= जलज कुमार ‘अनुपम’ का भोजपुरी कविता संग्रह ‘हमार पहचान’ की कविताओं के कथ्य का फलक ग्रामीण अंचल के विषयों और पारंपरिक जीवन-मूल्यों के पतन से लेकर राष्ट्रीय राजनीति के रंगों तक …

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पूर्वग्रहों की परतें उघाड़ता ‘मुल्‍क’

फिल्म ‘मुल्क’ रिलीज होने के पहले से ही चर्चा में है. इसकी एक अच्छी समीक्षा लिखी है पाण्डेय राकेश ने- ‘मुल्‍क’ बहुत अच्‍छी फिल्‍म है। और हां, यह राजनीतिक यथार्थवादी फिल्‍म है, पर कोरी बौद्धिक और बोरियत- भरी फिल्‍म नहीं है, जैसा- कि बहुत- से समीक्षक इसके बारे में लिख …

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इतिहास, स्त्री एवं पवन करण का ‘स्त्री शतक’

वरिष्ठ कवि पवन करण की पुस्तक ‘स्त्री शतक’ की एक विस्तृत समीक्षा लिखी है अमित मंडलोई ने- मॉडरेटर ============================================================== पीढिय़ों का इतिहास पन्नों में दफन हो जाता है। उन्हीं के साथ नेपथ्य में चले जाते हैं शूरवीरों के किस्से और युद्ध की गाथाएं। खत्म हो जाती हैं सारी कही-अनकही कहानियां। …

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श्रुति गौतम की कविताएँ

अभी हाल में ही ‘दैनिक भास्कर’ ने राजस्थान में युवा लेखकों के लिए प्रतियोगिता का आयोजन किया था जिसमें एक लाख रुपये का प्रथम पुरस्कार श्रुति गौतम की कहानी को मिला. श्रुति अजमेर में कर अधिकारी हैं. उनकी कुछ कविताएँ पढ़ते हैं- मॉडरेटर =============== 1) प्रयोजन अनायास सुनी हुई उन सायास विरुदावलियों में तुम्हारे यश का गान था, कवि। तुम्हारे बिम्ब विधान पे अभिमान करते हुए चूकते नहीं थे कहने में कभी भी लोग …

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‘चौपड़ की चुड़ैलें’ की कहानियां पंकज कौरव की समीक्षा

पंकज सुबीर के कहानी संग्रह ‘चौपड़े की चुड़ैलें’ की कहानियों की पंकज कौरव ने बड़ी अच्छी समीक्षा की है. कई जरूरी मुद्दे उठाये हैं- मॉडरेटर ======================== वैचारिकी रचनाओं की नींव भर होती है. बड़े-बड़े बेमेल पत्थर भी नींव में ऐसे समा जाते हैं कि उनमें एकरूपता का अभाव पता ही नहीं चलता. …

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