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Tag Archives: suhaib ahmad farooqui

‘ये फूल उन पे चढ़ाते हो किस लिए लोगो/ शहीद ज़िंदा हैं उन का अज़ा नहीं करते’

अमर शहीद ब्रिगेडियर लिद्दड़ की बेटी आशना लिद्दड़ के दर्द से आहत मेरे जैसे नागरिकों को आवाज़ दी है सुहैब अहमद फ़ारूक़ी ने। वे पेशे से पेशे से पुलिस अधिकारी हैं, शायर हैं- ==========================   “I am going to be 17. So, he was with me for 17 years, we will …

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ज़ौक़ जा पाया नहीं दिल्ली की गलियाँ छोड़कर

आज उस शायर की पुण्यतिथि है जिसने लिखा था ‘कौन जाए ज़ौक़ अब दिल्ली की गलियाँ छोड़कर’। उनके ऊपर यह लेख लिखा है शायर और पुलिस अधिकारी सुहैब अहमद फ़ारूक़ी ने। आप भी पढ़िए- ==============================      हमारे महकमे में एक देहाती कहावत चलन में है। वह यह कि ‘ख़ूबसूरत ज़नानी …

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जन्मदिन पर पत्नी के नाम ख़त

जनाब सुहैब अहमद फ़ारूक़ी पुलिस अधिकारी हैं लेकिन हम उनको शायर के रूप में जानते हैं। उनकी बेगम आशकारा खानम कश्फ़ भी ज़हीन शायरा हैं। यह ख़त पढ़िए शायर पति ने अपनी शायर बेगम के नाम उनके जन्मदिन पर लिखा है- ==========================   अस्वीकरण: यह स्वीकारोक्ति एक परिपक्व उम्र के …

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लाख दा’वे किये ख़ुदाई के–एक फ़िरऔन भी ख़ुदा न हुआ

जनाब सुहैब अहमद फ़ारूक़ी पुलिस अफ़सर हैं, अच्छे शायर हैं। उस्ताद शायरों जैसी सलाहियत रखते हैं। आज एक शेर में आए लफ़्ज़ के बहाने पूरा लेख लिख दिया। आप भी पढ़िए- ====================================  लाख दा’वे किये ख़ुदाई के–एक फ़िरऔन भी ख़ुदा न हुआ   यह शे’र तो ख़ैर मेरा है। अभी …

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इदरीस भाई: एक सफ़र चालीस रूपये से डाइरेक्टर ग़ालिब इंस्टिट्यूट तक

सुहैब अहमद फ़ारूक़ी पुलिस अफसर हैं, गम्भीर शायर हैं। वे उन शायरों में हैं जो अच्छा गद्य भी लिखते हैं, जैसे यह संस्मरण देख लीजिए- ========================================== ‘मुन्ना! क्या यह स्पोर्ट्सस्टार मैं ले लूँ?’ इदरीस भाई ने यूँ तो स्पोर्ट्स्टार ले तो रखी ही थी अपने हाथों में। मगर इस ‘ले …

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मीना कुमारी:बॉलीवुड की सिंड्रेला

  पेशे से पुलिस अधिकारी सुहैब अहमद फ़ारूक़ी उम्दा शायर हैं और निराला गद्य लिखते हैं। आज अभिनेत्री मीना कुमारी की पुण्यतिथि पर उनका लिखा पढ़िए- ========== जाने वालों से राबिता रखना दोस्तो  रस्मे फ़ातिहा  रखना निदा फ़ाज़ली…   एक शायर होने के नाते मेरी अदबी ज़िम्मेदारी है कि मैं …

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होरी खेलूंगी कहकर बिस्मिल्लाह

होली पर यह विशेष लेख जनाब सुहैब अहमद फ़ारूक़ी ने लिखा है। होली कल बीत ज़रूर गई लेकिन इस लेख को पढ़ने का आनंद हमेशा रहेगा- =================================================== होरी खेलूंगी कहकर बिस्मिल्लाह, नाम नबी की रतन चढ़ी,  बूंद पड़ी इल्लल्लाह, रंग-रंगीली उही खिलावे, जो सखी होवे फ़ना फ़ी अल्लाह, होरी खेलूंगी …

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 अहमद नदीम क़ासमी : भारतीय उपमहाद्वीप का सरमाया

आज भारतीय उपमहाद्वीप के बड़े लेखक-शायर अहमद नदीम क़ासमी की जयंती है। जब छोटा था तो टीवी पर किसी मुशायरे की रेकार्डिंग आ रही थी तो उसमें वह भी सुना रहे थे। उनका एक शेर आज तक याद रह गया- ‘सुबह होते ही निकल पड़ते हैं बाज़ार में लोग/गठरियाँ सर …

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जब  दर्द  नहीं  था  सीने में तब ख़ाक मज़ा था जीने में!

शायर और पुलिस अधिकारी सुहैब अहमद फ़ारूक़ी कोविड 19 से संक्रमित होकर आइसोलेशन में हैं। वहाँ से उन्होंने यह मार्मिक अनुभव लिख भेजा है। आप भी पढ़िए – ======================================= जब  दर्द  नहीं  था  सीने में तब ख़ाक मज़ा था जीने में यह तो गाने का मुखड़ा है कुछ  दर्द   बढ़ा …

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दुर्गा पूजा की यादें

सुहैब अहमद फ़ारूक़ी पुलिस अधिकारी हैं, जाने माने शायर हैं, साहित्य प्रेमी हैं। आज से दुर्गा पूजा शुरू हुआ है। ज़रा उनकी यह अनुभव कथा पढ़िए- =========================== पुलिस ड्यूटी की अहमियत  असंगत व ग़ैर-मामूली समय ही में महसूस होती है। आम समय में तो मामूली लोग भी ‘संगत’ कर लेते …

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