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Tag Archives: suhaib ahmad farooqui

इदरीस भाई: एक सफ़र चालीस रूपये से डाइरेक्टर ग़ालिब इंस्टिट्यूट तक

सुहैब अहमद फ़ारूक़ी पुलिस अफसर हैं, गम्भीर शायर हैं। वे उन शायरों में हैं जो अच्छा गद्य भी लिखते हैं, जैसे यह संस्मरण देख लीजिए- ========================================== ‘मुन्ना! क्या यह स्पोर्ट्सस्टार मैं ले लूँ?’ इदरीस भाई ने यूँ तो स्पोर्ट्स्टार ले तो रखी ही थी अपने हाथों में। मगर इस ‘ले …

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मीना कुमारी:बॉलीवुड की सिंड्रेला

  पेशे से पुलिस अधिकारी सुहैब अहमद फ़ारूक़ी उम्दा शायर हैं और निराला गद्य लिखते हैं। आज अभिनेत्री मीना कुमारी की पुण्यतिथि पर उनका लिखा पढ़िए- ========== जाने वालों से राबिता रखना दोस्तो  रस्मे फ़ातिहा  रखना निदा फ़ाज़ली…   एक शायर होने के नाते मेरी अदबी ज़िम्मेदारी है कि मैं …

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होरी खेलूंगी कहकर बिस्मिल्लाह

होली पर यह विशेष लेख जनाब सुहैब अहमद फ़ारूक़ी ने लिखा है। होली कल बीत ज़रूर गई लेकिन इस लेख को पढ़ने का आनंद हमेशा रहेगा- =================================================== होरी खेलूंगी कहकर बिस्मिल्लाह, नाम नबी की रतन चढ़ी,  बूंद पड़ी इल्लल्लाह, रंग-रंगीली उही खिलावे, जो सखी होवे फ़ना फ़ी अल्लाह, होरी खेलूंगी …

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 अहमद नदीम क़ासमी : भारतीय उपमहाद्वीप का सरमाया

आज भारतीय उपमहाद्वीप के बड़े लेखक-शायर अहमद नदीम क़ासमी की जयंती है। जब छोटा था तो टीवी पर किसी मुशायरे की रेकार्डिंग आ रही थी तो उसमें वह भी सुना रहे थे। उनका एक शेर आज तक याद रह गया- ‘सुबह होते ही निकल पड़ते हैं बाज़ार में लोग/गठरियाँ सर …

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जब  दर्द  नहीं  था  सीने में तब ख़ाक मज़ा था जीने में!

शायर और पुलिस अधिकारी सुहैब अहमद फ़ारूक़ी कोविड 19 से संक्रमित होकर आइसोलेशन में हैं। वहाँ से उन्होंने यह मार्मिक अनुभव लिख भेजा है। आप भी पढ़िए – ======================================= जब  दर्द  नहीं  था  सीने में तब ख़ाक मज़ा था जीने में यह तो गाने का मुखड़ा है कुछ  दर्द   बढ़ा …

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दुर्गा पूजा की यादें

सुहैब अहमद फ़ारूक़ी पुलिस अधिकारी हैं, जाने माने शायर हैं, साहित्य प्रेमी हैं। आज से दुर्गा पूजा शुरू हुआ है। ज़रा उनकी यह अनुभव कथा पढ़िए- =========================== पुलिस ड्यूटी की अहमियत  असंगत व ग़ैर-मामूली समय ही में महसूस होती है। आम समय में तो मामूली लोग भी ‘संगत’ कर लेते …

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मेरे गाँव से दिल्ली का रास्ता अमरोहे से होकर जाता है

सुहैब अहमद फ़ारूक़ी पेशे से पुलिस अधिकारी हैं मिज़ाज से शायर। इस लेख में उन्होंने याद किया है नश्तर अमरोहवी को, जिनका ताल्लुक़ ज़ौन इलिया के वतन अमरोहा से था। क्या शिद्दत से याद किया है उनको सुहैब जी ने- =========== ऐ  ग़मे  ज़ीस्त हम  किधर   जाएं इतनी  फ़ुर्सत  नहीं  …

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मदरसा -एजुकेशन के दिन

सुहैब अहमद फ़ारूक़ी पुलिस अधिकारी हैं लेकिन संजीदा शायर हैं और अच्छे गद्यकार भी हैं। हम पहले भी पातालकोट पर लिखी उनकी रिव्यू पढ़ चुके हैं। आज मदरसे में पढ़ने के उनके अनुभव पढ़िए। इससे मंडरा शिक्षा की एक झलक भी मिल जाती है- =========== मदरसा और उसमें दी जाने …

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ईद पर सुहैब अहमद फ़ारूक़ी की ग़ज़लें

आज ईद है। मुझे कल चाँद दिखते ही ईदी मिल गई थी। भाई सुहैब अहमद फ़ारूक़ी ने अपनी ग़ज़लें ईद के तोहफ़े में भेजी। आप लोगों को भी ईद मुबारक के साथ साझा कर रहा हूँ- मॉडरेटर ==============   1   रफ़्ता रफ़्ता ख्वाहिशों को मुख़्तसर करते रहे रफ़्ता रफ़्ता …

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जन्नत, दोज़ख़ और पाताललोक

सुहैब अहमद फ़ारूक़ी पुलिस अधिकारी हैं, शायर हैं। वेब सीरिज़ पाताललोक पर उनकी कहानी पढ़िए। मुझे पाताललोक देखने की सलाह उन्होंने ही दी थी। अब समझ में आया क्यों दी थी। दिलचस्प है- प्रभात रंजन ========================================================= तनहाई का शोर है यूं घर आँगन में कैसे कोई बोले कैसे बात करे …

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