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सुरेन्द्र मोहन पाठक के नए उपन्यास ‘क़हर’ का जलवा

सुरेन्द्र मोहन पाठक का 300 वाँ उपन्यास ‘क़हर’ विमल सीरिज़ का 43 वाँ उपन्यास है। पाठक जी का विमल सीरीज़ पाठकों के दिल के बेहद क़रीब रहा है। यह बात इस उपन्यास से भी साबित हुआ है। इसने बिक्री का एक नया कीर्तिमान बनाया है। पढ़िए- =============================================== सुरेंद्र मोहन पाठक …

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कनाडा यात्रा की सुखद स्मृतियाँ: अमृता सिन्हा

लेखिका अमृता सिन्हा ने कनाडा यात्रा का संस्मरण लिखा है। आप भी पढ़ सकते हैं। काफ़ी विस्तार से एक अनजाने देश से परिचित करवाया है- मॉडरेटर  ================ 7 जून 2018 एकरसता और उबाऊ जीवन से परे जाना हो तो यात्राएँ सबसे खूबसूरत माध्यम है जिसमें व्यक्ति के अपने भीतर की …

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हिंदी का सबसे बड़ा साहित्यिक प्रकाशन समूह कौन है?

यह पुराने प्रकाशनों के विलयन का दौर है, उनको नया रूप देने के लिए बड़े प्रकाशकों द्वारा अपनाया जा रहा है. कुछ समय पहले पेंगुइन ने हिन्द पॉकेट बुक्स को खरीद लिया था. अब खबर आई है कि राजकमल प्रकाशन समूह ने हिंदी के चार प्रकाशनों को पुनर्जीवित करने के लिए …

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राजकमल प्रकाशन के सत्तर साल और भविष्य की आवाजें

राजकमल प्रकाशन के सत्तरवें साल के आयोजन के आमंत्रण पत्र पर सात युवा चेहरों को एक साथ देखना मुझे हिंदी साहित्यिक हलके की एक बड़ी घटना की तरह लगती है. राजकमल प्रकाशन ने एक तरह से हिंदी के कैनन निर्माण में भूमिका निभाई है. निस्संदेह राजकमल हिंदी की प्रगतिशील मुख्यधारा …

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अनुकृति उपाध्याय लिखित वन-यात्रा वृत्तान्त ‘ताडोबा-अंधारी के वन’

युवा लेखिका अनुकृति उपाध्याय का कथा-संग्रह हाल में आया है ‘जापानी सराय‘, जिसकी कहानियां हिंदी की मूल प्रकृति से बहुत भिन्न किस्म की हैं. पशु-पक्षियों के प्रति करुणासिक्त कहानियां भी हैं इसमें. यह शायद कम लोग जानते हैं कि अनुकृति वाइल्ड लाइफ के क्षेत्र में काम करती हैं. उनकी हाल …

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देर आयद दुरुस्त आयद: सुरेन्द्र मोहन पाठक

अगला साल सुरेन्द्र मोहन पाठक के लेखन का साठवां साल है. साथ साल पहले उनकी एक कहानी ‘माया’ पत्रिका में प्रकाशित हुई थी. लेकिन अपने लेखकीय जीवन के साठवें साल में भी उनके पास नई-नई योजनायें हैं, अपने पाठकों के लिए नए नए प्लाट हैं. वे आज भी वैसे ही …

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सुरेन्द्र मोहन पाठक की आत्मकथा का अगला खंड राजकमल से

हिंदी में पाठक घट रहे हैं या बढ़ रहे हैं यह वाद विवाद का विषय हो सकता है लेकिन एक बात सच है कि हिंदी में पाठकजी(सुरेन्द्र मोहन पाठक) का विस्तार होता जा रहा है. कभी हिंदी में लुगदी साहित्य के पर्याय माने जाने वाले इस लेखक ने निस्संदेह हिंदी …

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बीतता साल साहित्य का हाल

अजमेर में प्राध्यापिका विमलेश शर्मा ने साल 2018 के साहित्यिक परिदृश्य का लेखा जोखा प्रस्तुत किया है. लेख में व्यक्त विचार लेखिका के अपने हैं- मॉडरेटर ======================================= और शब्द-रथ पर यों ही कारवाँ चलता रहे… “मुझमें जीवन की लय जागी मैं धरती का हूँ अनुरागी जड़ीभूत करती है मुझको यह …

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राजकमल प्रकाशन का 70वां साल और सहयात्रा का उत्सव

हिंदी साहित्य के पर्याय की तरह है राजकमल प्रकाशन. पुस्तकों को लेकर नवोन्मेष से लेकर हिंदी के क्लासिक साहित्य के प्रकाशन, प्रसार में इन सत्तर सालों में राजकमल ने अनेक मील स्तम्भ स्थापित किये हैं. सहयात्रा के उत्सव के बारे में राजकमल प्रकाशन के सम्पादकीय निदेशक सत्यानन्द निरुपम के फेसबुक …

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कोलंबियंस को सिएस्टा और फिएस्टा दोनों से लगाव है

गाब्रिएल गार्सिया मार्केज़, शकीरा और पाब्लो एस्कोबार के देश कोलंबिया की राजधानी बोगोता की यात्रा पर यह टिप्पणी लिखी है युवा लेखिका पूनम दुबे ने. पूनम पेशे से मार्केट रिसर्चर हैं. बहुराष्ट्रीय रिसर्च फर्म नील्सन में सेवा के पश्चात फ़िलवक्त इस्तांबुल (टर्की) में रह रही हैं. अब तक चार महाद्वीपों के बीस से …

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