Home / रपट

रपट

उपहार सिनेमा हॉल त्रासदी: न्याय की लड़ाई और ‘अग्निपरीक्षा’

आज दिल्ली के उपहार सिनेमा ट्रेजेडी के 22 साल हो जाएँगे। 13 जून 1997 को दर्शक मैटिनी शो में बॉर्डर फ़िल्म देख रहे थे कि सिनेमा हॉल में आग लग गई। निकास द्वार की कमी के कारण बाहर निकलते समय भगदड़ में 59 लोग मारे गए। मरने वालों में नीलम …

Read More »

‘बनारसी प्रसाद भोजपुरी सम्मान’ की घोषणा

बिहार के प्रतिष्ठित ‘बनारसी प्रसाद भोजपुरी सम्मान’ की घोषणा हो गई है। यह सम्मान एक ज़माने में बिहार में समकालीन रचनाशीलता का प्रतिष्ठित पुरस्कार था। कभी मेरे प्रिय लेखकों आलोक धन्वा और सुलभ जी को भी मिल चुका है। इस बार भी कुछ प्रिय लेखों को मिला है- मॉडरेटर ====================== …

Read More »

‘अंडरवर्ल्ड के चार इक्के’ मुंबई के माफ़िया जगत की प्रामाणिक बयानी है

मुंबई में जितना ग्लैमर फ़िल्मों का है उससे कम ग्लैमर माफ़िया जगत का नहीं है। 1960-70 के दशक में कई बड़े माफ़िया सरदार ऐसे हुए जिनके क़िस्से देश भर में सुने सुनाए जाते थे। अभी ‘अंडरवर्ल्ड के चार इक्के’ किताब के बारे में सुना तो कई किस्से याद आ गए। …

Read More »

आप लेखक बनना चाहते हैं तो इस पर नज़र रखें

दिल्ली में नेहरु प्लेस के पास जर्मन बुक ऑफ़िस है। जर्मनी और भारतीय पुस्तक व्यवसाय से जुड़े लोगों, संस्थाओं के साथ मिलकर पुस्तकों के विस्तार के लिए काम करती है। इसका एक बहुत अच्छा कार्यक्रम है jumpstart। जिसके तहत यह संस्था बच्चों और वयस्कों के लिए किताब तैयार करवाने की …

Read More »

सुरेन्द्र मोहन पाठक के नए उपन्यास ‘क़हर’ का जलवा

सुरेन्द्र मोहन पाठक का 300 वाँ उपन्यास ‘क़हर’ विमल सीरिज़ का 43 वाँ उपन्यास है। पाठक जी का विमल सीरीज़ पाठकों के दिल के बेहद क़रीब रहा है। यह बात इस उपन्यास से भी साबित हुआ है। इसने बिक्री का एक नया कीर्तिमान बनाया है। पढ़िए- =============================================== सुरेंद्र मोहन पाठक …

Read More »

कनाडा यात्रा की सुखद स्मृतियाँ: अमृता सिन्हा

लेखिका अमृता सिन्हा ने कनाडा यात्रा का संस्मरण लिखा है। आप भी पढ़ सकते हैं। काफ़ी विस्तार से एक अनजाने देश से परिचित करवाया है- मॉडरेटर  ================ 7 जून 2018 एकरसता और उबाऊ जीवन से परे जाना हो तो यात्राएँ सबसे खूबसूरत माध्यम है जिसमें व्यक्ति के अपने भीतर की …

Read More »

हिंदी का सबसे बड़ा साहित्यिक प्रकाशन समूह कौन है?

यह पुराने प्रकाशनों के विलयन का दौर है, उनको नया रूप देने के लिए बड़े प्रकाशकों द्वारा अपनाया जा रहा है. कुछ समय पहले पेंगुइन ने हिन्द पॉकेट बुक्स को खरीद लिया था. अब खबर आई है कि राजकमल प्रकाशन समूह ने हिंदी के चार प्रकाशनों को पुनर्जीवित करने के लिए …

Read More »

राजकमल प्रकाशन के सत्तर साल और भविष्य की आवाजें

राजकमल प्रकाशन के सत्तरवें साल के आयोजन के आमंत्रण पत्र पर सात युवा चेहरों को एक साथ देखना मुझे हिंदी साहित्यिक हलके की एक बड़ी घटना की तरह लगती है. राजकमल प्रकाशन ने एक तरह से हिंदी के कैनन निर्माण में भूमिका निभाई है. निस्संदेह राजकमल हिंदी की प्रगतिशील मुख्यधारा …

Read More »

अनुकृति उपाध्याय लिखित वन-यात्रा वृत्तान्त ‘ताडोबा-अंधारी के वन’

युवा लेखिका अनुकृति उपाध्याय का कथा-संग्रह हाल में आया है ‘जापानी सराय‘, जिसकी कहानियां हिंदी की मूल प्रकृति से बहुत भिन्न किस्म की हैं. पशु-पक्षियों के प्रति करुणासिक्त कहानियां भी हैं इसमें. यह शायद कम लोग जानते हैं कि अनुकृति वाइल्ड लाइफ के क्षेत्र में काम करती हैं. उनकी हाल …

Read More »

देर आयद दुरुस्त आयद: सुरेन्द्र मोहन पाठक

अगला साल सुरेन्द्र मोहन पाठक के लेखन का साठवां साल है. साथ साल पहले उनकी एक कहानी ‘माया’ पत्रिका में प्रकाशित हुई थी. लेकिन अपने लेखकीय जीवन के साठवें साल में भी उनके पास नई-नई योजनायें हैं, अपने पाठकों के लिए नए नए प्लाट हैं. वे आज भी वैसे ही …

Read More »