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बिजली भगवान का क्रोध नहीं है और बच्चे पेड़ से नहीं गिरते हैं!

  नए संपादक की नई रचना. अमृत रंजन में जो बात मुझे सबसे अधिक प्रभावित करती है कि वह झटपट कुछ लिखकर लोकप्रिय नहीं हो जाना चाहता है बल्कि वह  लेखक के माध्यम से वैचारिक कगारों को छूना चाहता है, उनका अन्वेषण करना चाहता है. इसलिए उसकी कविताओं में और …

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चिनार पत्तों पर जख़्मों की नक्काशी

गौतम राजऋषि के कहानी संग्रह ‘हरी मुस्कुराहटों वाला कोलाज’ पर कल यतीन्द्र मिश्र जी ने इतना आत्मीय लिखा कि उसको साझा करने से रोक नहीं पाया. ऐसा आत्मीय गद्य आजकल पढने को कम मिलता है- मॉडरेटर ======================================== कर्नल गौतम राजऋषि की किताब ‘हरी मुस्कुराहटों वाला कोलाज’ एक अदभुत पाठकीय अनुभव …

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कोरियाई उपन्यास ‘द वेजेटेरियन’ और अनुवाद को लेकर कुछ बातें

कोरियन भाषा की लेखिका हान कांग को उनके उपन्यास ‘द वेजेटेरियन’ को प्रतिष्ठित मैन बुकर प्राइज मिला तो इस किताब की दुनिया भर में धूम मच गई. पहली बार हुआ था कि इस उपन्यास की अंग्रेजी अनुवादिका को भी लेखिका  के साथ पुरस्कार दिया गया. इस उपन्यास और इसके अनुवाद …

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चिनार के झड़ते पत्ते और कोरिया की रानी री

प्रवीण झा नौर्वे में रेडियोलोजिस्ट हैं. शायद ही कोई ऐसा विषय है जिसके ऊपर वे न लिखते हों. इस बार जानकी पुल पर बड़े दिनों बाद लौटे हैं. एक अनूठे गद्य के साथ- मॉडरेटर =============================================== राजा की गद्दी। अनुवाद यही ठीक रहेगा। एक बहुमंजिली इमारत की इक्कीसवीं मंजिल का वो …

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महात्मा गांधी की प्रिय पुस्तकों की सूची

महात्मा गाँधी अंतर्राष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय की वेबसाईट ‘हिंदी समय’ पर तेजी ईशा ने उन पुस्तकों की सूची प्रस्तुत की है जो महात्मा गाँधी पढ़ा करते थे. हमने सोचा अपने पाठकों से भी साझा कर लें- मॉडरेटर. =============== Abott, Lyman: What Christianity Means To Me: A Spiritual Autobiography Advice To A …

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रहस्य-अपराध की दुनिया और हिन्दी जगत का औपनिवेशिक दौर

इतिहासकर अविनाश कुमार का यह लेख हिंदी के लोकप्रिय परिदृश्य की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि का बहुत बढ़िया आकलन है. अविनाश जी ने बीसवीं शताब्दी के आरंभिक दो दशकों के हिंदी साहित्य के सार्वजनिक परिदृश्य विषय पर जवाहरलाल नेहरु विश्वविद्यालय से पीएचडी की थी. डेवलपमेंट के क्षेत्र में बरसों से काम कर …

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ललित लवंगलतापरिशीलन कोमल मलय शरीरे!

आज वसंतपंचमी है. इस मौके पर युवा लेखक विमलेन्दु का यह लेख- मॉडरेटर ======================================== गीता के सातवे अध्याय के ग्यारहवें श्लोक में श्रीकृष्ण उद्घोषणा कर रहे हैं कि मैं धर्म के अविरुद्ध काम हूँ. मेरे भीतर कृष्ण का यह उद्घोष उसी दिन से धीरे-धीरे बजने लगा है, जिस दिन से …

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ग़ालिब पितरों की तरह याद आते हैं !

आज ग़ालिब जयंती है. इस मौके पर युवा लेखक विमलेन्दु का एक लेख पढ़िए. चित्र में गूगल का डूडल है, जो गूगल ने आज बनाया है- मॉडरेटर ===================================== ग़ालिब पितरों की तरह याद आते हैं. मुमकिन होता तो बताया जाता कि दिल्ली के निजामुद्दीन इलाके में सुल्तान जी, चौंसठ खम्भा …

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नीचता के नक्कारखाने में भाषा ज्ञान की तूती- मृणाल पाण्डे

प्रसिद्ध लेखिका मृणाल पाण्डे का यह लेख नीच शब्द को लेकर हुए विवाद से शुरू होकर भाषा और उनके प्रयोगों की यात्रा, शब्दों के आदान-प्रदान का विद्वतापूर्ण और दिलचस्प आकलन प्रस्तुत करता है। मौका मिले तो पढ़िएगा- मॉडरेटर इस लेखिका का दृढ विचार है कि हिंदी के पाठकों, श्रोताओं के …

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‘यूपी 65’ के बहाने हिन्दी के नए लेखन को लेकर कुछ बातें

पंकज कौरव अनेक माध्यमों में काम करते रहे हैं, अच्छे लेखक भी हैं। उन्होने हाल में आए निखिल सचान के उपन्यास ‘यूपी 65’ को पढ़ते हुए हाल में आई हिन्दी में नई तरह की किताबों पर बहसतालब टिप्पणी की है- मॉडरेटर ============================================== निखिल सचान का पहला उपन्यास यूपी-65 पढ़कर भीतर …

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