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के. के. नायकर की कहानी:मेरी जिंदगी है क्या, एक कटी पतंग है

मकर संक्रांति के अवसर पर विशेष प्रस्तुति। दिनेश चौधरी का लेख- ======================== सच्चा पतंगबाज वही होता है जो उसके इश्क़ में डूबकर साथ-साथ उड़ता है। पतंग और पतंगबाज एकाकार हो जाते हैं। रंग-बिरंगी पतंगों के साथ मैं भी कई-कई बार उड़ा हूँ और यह बिल्कुल ताजी उड़ान है। आसमान अमूमन …

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नम ज़मीन पर धँसते हुए यादों का दरिया पार करना

अनिरुद्ध उमट की पुस्तक वैदानुराग पर चंद्रकुमार का यह लेख पढ़ें। चंद्र कुमार ने कॉर्नेल विश्वविद्यालय, न्यूयार्क से पढ़ाई की। वे आजकल एक निजी साफ्टवेयर कंपनी में निदेशक है लेकिन उनका पहला प्यार सम-सामयिक विषयों पर पठन-लेखन है। स्थानीय समाचार पत्रों में युवाओं के मार्गदर्शन के लिए लंबे समय तक …

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सरताज-ए-मौसीक़ी नौशाद

आज  संगीतकार नौशाद साहब की जयंती है। उनकी जयंती पर पढ़ते हैं मनोहर नोतानी का लिखा यह लेख। लेखक, अनुवादक मनोहर नोतानी। इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग में स्नातक और इंडस्ट्रियल इंजीनियरिंग व उत्पादकता में स्नातकोत्तर अध्ययन व अध्यवसाय। फिलवक्त भोपाल में रहना। 25 दिसंबर को नौशाद साहब की 101वीं जयंती है। नौशाद साहब …

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सांता जो किताबें लेकर आने वाला है!

हमारे जीवन में पर्व त्योहारों का बहुत महत्व है। अपनी अपनी ख़ुशियों को साझा करने के अवसर होते हैं ये पर्व त्योहार। पिछले कुछ दिनों से ऐसे मौक़ों को राजकमल प्रकाशन समूह किताबों के साथ मनाने की योजना लेकर आता रहा है। यह समूह इस बार क्रिसमस पर ‘किताबों वाले …

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मुझे दस जूते मार लीजिए लेकिन घर से मत निकालिए

बनारस का नाम आने पर लेखक शिव प्रसाद सिंह का नाम ज़रूर आएगा। उनके ऊपर एक बहुत अलग तरह का गद्य लिखा है बीएचयू की शोध छात्रा रही प्रियंका नारायण ने। आप भी पढ़िए- ==================== मुझे दस जूते मार लीजिए लेकिन घर से मत निकालिए दो पथिक (पहला- आगंतुक, दूसरा …

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कलिंगा लिटेरेरी फ़ेस्टिवल का भाव संवाद: आगामी चर्चाएँ

कलिंगा लिटेरेरी फ़ेस्टिवल का भाव संवाद इस लॉकडाउन के दौरान बहुत सक्रिय रहा और उसने ऑनलाइन बौद्धिक चर्चाओं का एक अलग ही स्तम्भ खड़ा किया है। आगामी चर्चाओं के बारे में पढ़िए- =================== केएलएफ भाव संवाद बनेगा रेबेलियस लॉर्ड, ‘महाभारत सीरीज, बिकाउज इंडिया कम्स फर्स्ट, ‘द अवस्थीस ऑफ अम्नागिरी, रेबेल्स …

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बापू और बाबा साहेब- कितने दूर,कितने पास

विवेक शुक्ला जाने माने पत्रकार हैं। आज उनका यह लेख पढ़िए जो गांधी और बाबा साहेब भीमराव अम्बेडकर के आपसी संबंधों को लेकर है। आज बाबा साहेब की जयंती पर विशेष- ============== महात्मा गांधी और बाबा साहेब अंबेडकर के बीच 1932 के ‘कम्यूनल अवार्ड’ में दलितों को पृथक निर्वाचन का स्वतन्त्र राजनीतिक अधिकार …

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 अहमद नदीम क़ासमी : भारतीय उपमहाद्वीप का सरमाया

आज भारतीय उपमहाद्वीप के बड़े लेखक-शायर अहमद नदीम क़ासमी की जयंती है। जब छोटा था तो टीवी पर किसी मुशायरे की रेकार्डिंग आ रही थी तो उसमें वह भी सुना रहे थे। उनका एक शेर आज तक याद रह गया- ‘सुबह होते ही निकल पड़ते हैं बाज़ार में लोग/गठरियाँ सर …

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‘देस’ की तलाश में मैथिली सिनेमा

मैथिली सिनेमा पर एक अच्छा लेख ‘प्रभात खबर’ के दीवाली विशेषांक में आया है। लिखा है लेखक-पत्रकार अरविंद दास ने। जिन्होंने न पढ़ा हो उनके लिए साभार प्रस्तुत कर रहे  हैं- =================== वर्ष 1937 में ‘न्यू थिएटर्स’ स्टूडियो की ‘विद्यापति’ फिल्म खूब सफल रही थी. देवकी बोस के निर्देशन में बनी यह फिल्म खास तौर से …

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बदलते समय के सांस्कृतिक क्षरण की दो कहानियां

कथाकार-उपन्यासकार संतोष दीक्षित ने इस लेख में रेणु जी की कहानी ‘रसप्रिया’ और मनोज रुपड़ा की कहानी ‘साज़-नासाज़’ के बहाने सांस्कृतिक क्षरण को रेखांकित किया है। एक अच्छा लेख- =================  ‘रसप्रिया’ रेणु की प्रारंभिक कहानियों में से है। इसका मर्म रेणु के ही नहीं, हिंदी के सम्पूर्ण कथा साहित्य तक …

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