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23 मार्च एक जज्बाती याद : कवि पाश

आज शहीदी दिवस है- भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव की शहादत का दिन। आज के ही दिन पंजाबी के क्रांतिकारी कवि अवतार सिंह ‘पाश’ भी शहीद हुए थे। भगत सिंह और पाश के रचनात्मक संबंधों को लेकर यह लेख लिखा है अमित कुमार सिंह ने जो केंद्रीय विद्यालय में अध्यापक …

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हिन्दी रंगपरिदृश्य और नाट्यालेखन:हृषीकेश सुलभ

हृषीकेश सुलभ को कथाकार-उपन्यासकार के अलावा हम सब नाटककार और रंगकर्म विशेषज्ञ के रूप में दशकों से जानते रहे हैं। अभी हाल में ही उनका उपन्यास ‘अग्निलीक’ राजकमल से आया है, जिसकी बहुत चर्चा है। फ़िलहाल इस लेख में उन्होंने रंगमंच की दुनिया में नाट्यालेखन को लेकर कुछ गम्भीर बिंदुओं …

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जौन एलिया का लेख ‘मर्द बुर्का ओढ़ें’

शायर इरशाद ख़ान सिकन्दर ने हाल में ही ‘ज़ौन एलिया का जिन्न’ नामक नाटक लिखा है जिसका निर्देशन जाने माने रंग निर्देशक रंजीत कपूर ने किया है और जिसका प्रदर्शन होने वाला है। उसके लिए उन्होंने काफ़ी शोध किया। उसी दौरान उनको ज़ौन साहब का यह लेख मिला। उन्होंने इस …

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डेनिश औरतें अनगिनत कन्वेंशनल बक्सों से आज़ाद हैं!

पूनम दुबे के यात्रा वृत्तांत हम पढ़ते रहे हैं, उनक एक उपन्यास ‘चिड़िया उड़’ प्रकाशित हो चुका है। इस बार अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर उनका यह लेख पढ़िए- जानकी पुल। =================== तकरीबन आठ महीने हो गए मुझे डेनमार्क शिफ्ट हुए. इन आठ महीनों में मैं स्कॅन्डिनेवियन देशों (नॉर्वे फ़िनलैंड स्वीडन …

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महिला दिवस क्यों कहते हैं ? स्त्री दिवस क्यों नहीं?

आज अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस है। इस मौक़े पर युवा लेखिका अनुकृति उपाध्याय का यह लेख पढ़िए- मॉडरेटर ========================= जब मेरा बेटा तीन या चार साल का था, हम अक्सर एक किताब पढ़ा करते थे – सालाना बाल कटाई दिवस। रंग-बिरंगी चित्र-पुस्तक थी और सरल सी कहानी – एक व्यक्ति साल …

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रेणु के ‘लोकल’ का फलक दरअसल ‘ग्लोबल’ है

फणीश्वरनाथ रेणु के उपन्यासों, कहानियों में आंचलिकता कोई सीमा नहीं थी बल्कि वह आज़ाद भारत के ग्रामीण समाज के विराट स्वप्न के लेखक थे, जो शहरीकरण को विकास का एकमात्र पैमाना नहीं मानते थे न ही गाँवों को पिछड़ेपन का प्रतीक। उनके लेखन पर हिमाचल में रहने वाली लेखिका, अनुवादिका …

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रेणु, आज़ादी के स्वप्न और मैला आँचल:हृषीकेश सुलभ

आज फणीश्वरनाथ रेणु जयंती है। आज से उनकी जन्म शताब्दी का साल भी शुरू हो रहा है। वे एक बड़े विजन के लेखक थे। उनकी अमर कृति ‘मेला आँचल’ की चर्चा के बिना आधुनिक हिंदी साहित्य की कोई भी चर्चा अधूरी ही मानी जाएगी। आज उनकी इस कृति का सम्यक् …

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स्मृतिलोप का दौर: भविष्य की कविता: सुधांशु फ़िरदौस

सबसे अंत में कवि बचता है, कविता बचती है। 28 फ़रवरी को आयोजित राजकमल स्थापना दिवस के आयोजन ‘भविष्य के स्वर’ में एक युवा कवि का वक्तव्य था, सुधांशु फ़िरदौस का। हम उनकी कविताओं में ऐसा खो जाते हैं कि यह भूल जाते हैं कि वे गणितज्ञ हैं, तकनीक के …

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सिनेमा की बदलती ज़मीन : भविष्य का सिनेमा:मिहिर पंड्या

मिहिर पांड्या सिनेमा पर जो लिखते बोलते हैं उससे उनकी उम्र की तरफ़ ध्यान नहीं जाता। हिंदी में इस विधा का उन्होंने पुनराविष्कार किया है। यह बात अलग से रेखांकित करनी पड़ती है कि वे 40 साल से कम उम्र के युवा हैं। 28 फ़रवरी को राजकमल प्रकाशन स्थापना दिवस …

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भविष्य का समाज: सहजीविता के आयाम: जसिंता केरकेट्टा

  जसिंता केरकेट्टा कवयित्री हैं, आदिवासी समाज की मुखर आवाज़ हैं। राजकमल स्थापना दिवस के आयोजन में 28 फ़रवरी को ‘भविष्य के स्वर’ के अंतर्गत उनका वक्तव्य सहजीविता के आयामों को लेकर था- मॉडरेटर ======================== क्यों महुए तोड़े नहीं जाते पेड़ से? ………………………………. माँ तुम सारी रात क्यों महुए के …

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