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फ़िराक़ गोरखपुरी पर मनीषा कुलश्रेष्ठ की टिप्पणी

फ़िराक़ गोरखपुरी के रुबाई संग्रह ‘रूप’ पर यह टिप्पणी जानी मानी लेखिका मनीषा कुलश्रेष्ठ ने लिखी है। इस लेख को पढ़ते हुए फ़िराक़ साहब की कई रुबाइयाँ मुझे याद आ गई। जैसे, जादू भरे भरे ये नैना रस के/साजन कब ऐ सखी थे अपने बस के/ये चाँदनी रात ये बिरह …

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‘सोचो अगर हम इंडिया न गए होते, तो इंडिया आज कहाँ होता?’

नॉर्वे प्रवासी डॉक्टर प्रवीण कुमार झा ने ‘कुली लाइंस’ किताब लिखकर इंडियन डायस्पोरा की दास्तान सुनाई। आज स्वाधीनता दिवस के दिन वे परदेस में भारतीय होने का मतलब समझा रहे हैं। उनकी और जानकी पुल की तरफ़ से सबको आज़ादी मुबारक-मॉडरेटर ======================================== गाड़ियों की सस्ती-टिकाऊ सर्विस के चक्कर में गाड़ी-मिस्त्री …

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बाल की तलाश

‘प्रेम लहरी’ के लेखक त्रिलोक नाथ पाण्डेय वर्षों गुप्तचर अधिकारी के रूप में कश्मीर में रहे हैं. कोई आधी सदी पूर्व अपनी गुमशुदगी से एशिया के कई देशों में हिंसा भड़का देने वाली  हजरतबल के पवित्र बाल की घटना के वे गंभीर अध्येता रहे हैं. हजरतबल में रखा पवित्र बाल …

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टोनी मॉरिसन और अफ्रो अमेरिकी लेखन

प्रसिद्ध अफ्रो-अमेरिकी लेखिका टोनी मॉरिसन का निधन हो गया। उनके प्रसिद्ध उपन्यास ‘बिलवेड'(beloved) के बहाने उनके लेखन पर यह लम्बा लेख लिखा है अंग्रेज़ी साहित्य की विद्वान विजय शर्मा ने- =========== टोनी मॉरीसन का बिलवड : अफ़्रो-अमेरिकन ला योरोना विजय शर्मा “जब तुम्हें एक औरत मिलती है जो तुम्हारे मन …

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लव इन टाइम ऑफ़ कॉलरा: प्रेम की अनोखी दास्तान

वरिष्ठ लेखिका विजय शर्मा ने मार्केज़ के महान उपन्यास ‘लव इन द टाइम ऑफ़ कॉलरा’ पर यह लेख लिखा है। इस लेख में उपन्यास और उस पर बनी फ़िल्म दोनों  के बारे में लिखते हुए उन्होंने यह दिखाया है कि क्यों प्रेम का ज़िक्र मार्केज़ के इस उपन्यास की चर्चा …

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पीढ़ियों से लोकमन के लिए सावन यूं ही मनभावन नहीं रहा है सावन  

प्रसिद्ध लोक गायिका चंदन तिवारी केवल गायिका ही नहीं हैं बल्कि गीत संगीत की लोक परम्परा की गहरी जानकार भी हैं, विचार के स्तर पर मज़बूती से अपनी बातों को रखती हैं। कल से सावन शुरू हो रहा है, सावन में गाए जाने वाले गीतों की परम्परा को लेकर उनका …

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ब्लू व्हेल’ गेम से भी ज़्यादा खतरनाक है ‘नकारात्मकता’ का खेल

संवेदनशील युवा लेखिका अंकिता जैन की यह बहसतलब टिप्पणी पढ़िए- मॉडरेटर ========================================== हम बढ़ती गर्मी, पिघलती बर्फ़ और बिगड़ते मानसून के ज़रिए प्रकृति का बदलता और क्रूर होता स्वभाव तो देख पा रहे हैं, पर क्या तकनीकि के दुरुपयोग से अपने बदलते और क्रूर होते मिज़ाज़ को समझ पा रहे …

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इस्तांबुल से कोपेनहेगन

पूनम दुबे के यात्रा वृत्तांत हम जानकी पुल पर पढ़ते रहे हैं। हाल में ही वह इस्तांबुल से कोपेनहेगन गई हैं। यह छोटा सा यात्रा संस्मरण उसी को लेकर। हाल में ही पूनम का उपन्यास आया है प्रभात प्रकाशन से ‘चिड़िया उड़’, जो उनकी अपनी जीवन यात्रा को लेकर है- …

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जनादेश 2019: एक बात जो बार-बार छूट रही है…

कल लोकसभा चुनावों के अभूतपूर्व परिणाम, जीत-हार का बहुत अच्छा विश्लेषण किया है युवा लेखक पंकज कौरव ने। हमेशा की तरह पंकज का एक गम्भीर, चिंतनपरक और बहसतलब लेख- मॉडरेटर ============ जनादेश आखिर जनादेश होता है। हां कभी-कभी वह भावावेश में भी आता है लेकिन बावजूद इसके अगर दोहराया जाता …

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कैसे रचा गया होगा यूँ पत्थरों में स्वर्णिम इतिहास

भारती दीक्षित चित्रकार हैं, कहानियों का यूट्यूब चैनल चलाती हैं और बहुत अच्छा लिखती हैं। जानकी पुल पर हम उनके यात्रा वृत्तांत पहले भी पढ़ चुके हैं। इस बार एलोरा यात्रा का वर्णन पढ़िए- मॉडरेटर ====================== जब  अजंता से चले तब आँखों में चमक थी,मन और तन दोनों था ऊर्जा  …

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