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समीक्षा

थियेटर ओलंपिक्स: मंजरी श्रीवास्तव का पुनरावलोकन

  आठवें थियेटर ओलंपिक्स के समाप्त हुए एक महीने से ऊपर समय बीत चुका है. लेकिन इक्यावन दिन चले इस महोत्सव को लेकर चर्चाओं का दौर अभी नहीं थमा है. इसका एक आकलन कवयित्री, रंग समीक्षक मंजरी श्रीवास्तव द्वारा- मॉडरेटर ======================================================= 8 अप्रैल को भारत में चल रहे आठवें थिएटर …

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सियासत की धुन पर मोहब्बत का फ़साना ‘हसीनाबाद’

गीताश्री के पहले उपन्यास ‘हसीनाबाद’ ने इस साल पाठकों-समीक्षकों-आलोचकों का ध्यान अच्छी तरह खींचा. इस उपन्यास की यह समीक्षा युवा लेखक पंकज कौरव ने लिखी है. इधर उनकी कई समीक्षाओं ने मुझे प्रभावित किया. उनमें एक यह भी है- मॉडरेटर ====================== हसीनाबाद के आबाद होने की दास्तान में ही कहीं …

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मुल्क तो बंटा, लोग भी बंट गये। वो एक लोग थे। अब दो लोग हो गये। 

गुलजार साहब ने उर्दू में एक उपन्यास लिखा. पहले वह अंग्रेजी में प्रकाशित हुआ ‘टू’ नाम से. कुछ महीने बाद हिंदी में ‘दो लोग’ नाम से प्रकाशित हुआ. उर्दू में अभी तक प्रकाशित हुआ है या नहीं, पता नहीं. इसे पढ़ते हुए एक किस्सा याद आ गया. एक बड़े लेखक(जो …

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‘बेचैन बंदर’ के बहाने कुछ बातें विज्ञान, धर्म और दर्शन को लेकर

आम तौर पर विज्ञान को लेकर आम पाठकों के लिए कम किताबें लिखी जाती हैं. लिखी जाती हैं तो आम पाठकों तक उनकी सूचना पहुँच नहीं पाती हैं. फेसबुक पर भी बहुत लोग यह काम कर रहे हैं. ऐसी ही एक किताब ‘बेचैन बन्दर’ पर यह टिप्पणी लिखी है राकेश …

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एक भुला दी गई किताब की याद

धर्मवीर भारती के उपन्यास ‘गुनाहों का देवता’ को सब याद करते हैं लेकिन उनकी पहली पत्नी कांता भारती और उनके उपन्यास ‘रेत की मछली’ का नाम कितने लोगों ने सुना है? असल में यह उपन्यास टूटते-बिखरते दांपत्य को लेकर है. कहा जाता है कि आत्मकथात्मक भी है. आज उसी उपन्यास …

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बाज़ार के चंगुल में फंसे भयावह समय का कथानक ‘पागलखाना’

ज्ञान चतुर्वेदी के उपन्यास ‘पागलखाना’ पर राहुल देव की टिप्पणी. बहुत बारीकी से उन्होंने इस उपन्यास को हमारे लिए खोला है. एक आदर्श समीक्षा का नमूना. चाहे आप सहमत हों या असहमत लेखक का लिखा प्रभावित कर जाता है- मॉडरेटर =============================================== जब/ ममता, गाय के थनों से निकलकर/ पॉलीपैक में …

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समय से परे अपने समाज को देखने को उम्दा कोशिश

पिछले 25 साल के उपन्यास लेखन की सबसे बड़ी पहचान अलका सरावगी के नए उपन्यास ‘एक सच्ची झूठी गाथा’ पर सुधांशु गुप्त की यह टिप्पणी. अलका सरावगी का यह उपन्यास राजकमल प्रकाशन से प्रकाशित हुआ है- मॉडरेटर ====================================================== रियल और अनरियल दुनिया की एक सच्ची झूठी गाथा सुधांशु गुप्त उपन्यास …

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लोकप्रिय शैली में लिखी गंभीर कहानियां

आकांक्षा पारे बहुत जीवंत, दिलचस्प कहानियां लिखती हैं और वह बिना अधिक लोड लिए. इसीलिए कथाकारों की भीड़ में सबसे अलग दिखाई देती हैं. उनके कहानी संग्रह ‘बहत्तर धडकनें तिहत्तर अरमान’ पर एक अच्छी समीक्षा लिखी है युवा लेखक पंकज कौरव ने, जिनके लेखन का मैं खुद ही कायल रहा …

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‘बैड बॉय’ की ‘गुड’ जीवनी

जब से जाने माने फिल्म पत्रकार-लेखक यासिर उस्मान द्वारा लिखी गई संजय दत्त की जीवनी ‘द क्रेजी अनटोल्ड स्टोरी ऑफ़ बॉलीवुडस बैड बॉय संजय दत्त’ बाजार में आई है तब से यह लगातार चर्चा और विवादों में बनी हुई है. इस किताब के ऊपर मेरी एक छोटी से टिप्पणी- प्रभात …

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मूर्ति का तराशा हुआ शिल्प इसे पठनीय बनाता है

इरा टाक ने हाल के बरसों में अपनी मेहनत से लेखन में अच्छी पहचान बनाई है. जगरनॉट बुक्स पर उनका उपन्यास ‘मूर्ति’ है. उसकी समीक्षा शिल्पा शर्मा ने की है- मॉडरेटर ================================ मूर्ति, मीठी का कड़वा सौदा… जगरनॉट बुक्स पर उपलब्ध इरा टाक द्वारा रचित इस उपन्यास को पढ़ते हुए आप जैसे किसी कल्पना लोक में पहुंच जाते हैं. रहस्य, रोमांच और प्रेम की दास्तां के साथ गूंथा गया यह उपन्यास आपको कहानी की नायिका मीठी और उसपर बीत रही परेशानियों के साथ-साथ कहानी में मौजूद हर एक पात्र से जोड़ता चलाता है. उपन्यास को पढ़ते हुए आप यह बातभालीभांति जान जाते हैं कि यह काल्पनिक उपन्यास है, पर इसकी फ़ैंटसी और कहानी के दिलचस्प मोड़ आपको इस उपन्यास को इसमें डूबकर पढ़ने को मजबूर कर देती है. उपन्यास की शुरुआत से हीयह जानने की चाहत बराबर बनी रहती है कि आगे क्या होगा? उपन्यास के दूसरे चैप्टर में हमारे सामाज की प्रेम को लेकर वह दोगली सोच भी सामने आती है, जब वह किसी प्रेमी जोड़े का प्रेममुक़म्मल नहीं होने देना चाहता, लेकिन उस प्रेमी जोड़े के सामाजिक और व्यावसायिक रूप से सफल होने पर उसे वही समाज सहर्ष अपना लेता है. यह उपन्यास आपको यह भी बताता चलता है कि कैसेपरिस्थितियां बदलने पर अपने ही लोग एक स्त्री के शोषण में पलभर की देर नहीं लगाते, फिर चाहे वो मानसिक हो, शारीरिक हो या आर्थिक हो… मीठी के पिता की कहानी भी बड़ी सहजता से सामनेआती है और मीठी-विलियम की अपनी प्रेम कहानी भी आपको किसी परी-कथा की तरह कल्पना लोक में विचरण करा लाती है. इरा एक काल्पनिक कहानी में पात्रों को सामयिक रखने में पूरी तरहसफल रही हैं. कहानी के बहाव ने इसकी पठनीयता बढ़ा दी है. किसी कमर्शल सस्पेंस थ्रिलर मूवी की तरह लिखे गए इस नॉवेल की कमज़ोर कड़ी है इसकी प्रूफ़ रीडिंग. कहानी के प्रवाह के बीच मात्राओं/शब्दों की ग़लतियां खटक जाती हैं. लेकिन डिजिटल माध्यम की सकारात्मकता का इस्तेमाल कर जगरनॉट बुक्स के एडिटर्स इस कमी को तुरंत दूर भी कर सकते हैं. यदि आप शिल्प में तराशी हुईअपनी समय की लगनेवाली काल्पनिक, रोमांचक प्रेम कहानियां पढ़ने में दिलचस्पी रखते हैं तो मूर्ति पढ़ने में आपको  पलभर की भी देर नहीं करनी चाहिए. -शिल्पा शर्मा https://www.juggernaut.in/books/eedd0fa7fb8f49dda1cadf3957f31500/preview लेखक परिचय:  शिल्पा शर्माः पोस्टग्रैजुएशन इले‌क्ट्रॉनिक्स में और जी  लेखन में. पिछले 16 वर्षों से …

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