Home / समीक्षा

समीक्षा

उजड़े हुए लोगों के उजड़ते रहने की दास्तान है ‘दातापीर’

अभी हाल में ही ‘कथाक्रम’ सम्मान की घोषणा हुई है। इस बार यह सम्मान हृषीकेश सुलभ को दिए जाने की घोषणा हुई है। उनके नए उपन्यास ‘दाता पीर’ पर यह टिप्पणी लिखी है युवा शोधार्थी महेश कुमार ने। राजकमल प्रकाशन से प्रकाशित इस उपन्यास की समीक्षा आप भी पढ़ सकते …

Read More »

लड़कियों के लिए लिखा गया भारत का पहला थ्रिलर ‘नायिका’

युवा लेखक अमित खान हिंदी में लोकप्रिय उपन्यास धारा की नई पहचान हैं। उनका उपन्यास ‘नायिका’ पेंगुइन से प्रकाशित हुआ है। उसी पर यह टिप्पणी पढ़िए- ===================== ‘नायिका’ अमित खान द्वारा लिखा गया एक शानदार सायको थ्रिलर है, जो महिलाओं के ऊपर हो रहे अत्याचारों को बड़ी खूबी के साथ …

Read More »

‘थोड़ी- सी ज़मीन थोड़ा आसमान’ की काव्यात्मक समीक्षा

यतीश कुमार बहुत दिनों बाद अपनी काव्यात्मक समीक्षा के साथ वापस लौटे हैं।इस बार उन्होंने जयश्री रॉय की किताब ‘थोड़ी- सी ज़मीन थोड़ा आसमान’ को पढ़ते हुए कविताएँ लिखी हैं। यह किताब वाणी प्रकाशन से प्रकाशित है- ===================       1.     साँस की हाँफ में गलफड़ों का …

Read More »

सिधपुर की भगतणें : स्त्री के स्वभाविक विद्रोह का प्रमाणिक आख्यान

लक्ष्मी शर्मा के उपन्यास ‘सिधपुर की भगतणें’ पर यह सुविचारित टिप्पणी लिखी है जितेंद्र विसारिया ने। आप भी पढ़ सकते हैं- ===========================        उपन्यास भले ही बाह्य विधा के रूप में  हिंदी में प्रविष्ट हुई हों, किन्तु यह विधा आधुनिक खड़ी बोली के प्रारंभिककाल से ही हिंदी साहित्य की लोकप्रिय …

Read More »

दुःख की विचित्र आभा का उपन्यास

जयश्री रॉय के उपन्यास ‘थोड़ी-सी ज़मीन, थोड़ा आसमान’ के ऊपर यह टिप्पणी लिखी है युवा लेखक किंशुक गुप्ता ने। किंशुक मेडिकल की पढ़ाई कर रहे हैं और हिंदी-अंग्रेज़ी दोनों भाषाओं में समान रूप से लिखते हैं। प्रमुखता से प्रकाशित होते हैं। फ़िलहाल यह समीक्षा पढ़िए- ======================== विस्थापन की समस्या को …

Read More »

‘अंबपाली’ पर यतीश कुमार की टिप्पणी

वरिष्ठ लेखिका गीताश्री के उपन्यास ‘अंबपाली’ पर यह टिप्पणी लिखी है कवि यतीश कुमार ने। एक पढ़ने लायक टिप्पणी- ========================== रचनाकार गीता श्री ने इस उपन्यास को लिखने के पहले अपने मन मस्तिष्क को उस काल के साँचे में ढाला है ताकि वहाँ की आवाज़ हम सुन सकें। भाषा को …

Read More »

दीवानावार प्रेम की तलाश का नॉवेल ‘राजा गिद्ध’

उर्दू लेखिका बानो क़ुदसिया के उपन्यास ‘राजा गिद्ध’ पर यह टिप्पणी लिखी है वरिष्ठ लेखिका जया जादवानी ने। सेतु प्रकाशन से प्रकाशित इस उपन्यास की समीक्ष पढ़िए- =====================    जंगल में भांति-भांति के परिंदे जमा हो रहे थे… हिन्द-सिंध से, पामेर की चोटियों से, अलास्का से भी कुछ परिंदे आए …

Read More »

‘आकाश में अर्द्धचंद्र’ की कविताओं से पाठकीय आत्मालाप

युवा लेखक आलोक कुमार मिश्रा ने कवि पंकज चतुर्वेदी के कविता संग्रह पर यह टिप्पणी लिखी है। पंकज चतुर्वेदी का कविता संग्रह ‘आकाश में अर्धचंद्र’ का प्रकाशन रुख़ प्रकाशन ने किया है। आप इस टिप्पणी को पढ़ें- ============================ जैसे कविताएं शब्दों का जामा पहन अनगिन रूपों में शाया होती हैं, …

Read More »

सूक्ष्म व तरल संवेदना की रचनात्मकता अभिव्यक्ति – प्रकृति

——————————————  1 जुलाई से दस जुलाई के बीच श्रीधरणी आर्ट गैलरी में राजा न्यास द्वारा आयोजित कला-प्रदर्शनी ‘प्रकृति’ पर यह टिप्पणी लिखी है युवा कवयित्री स्मिता सिन्हा ने। आप भी पढ़ सकते हैं- ========================   त्रिवेणी कला संगम, मंडी हाउस की श्रीधरणी आर्ट गैलरी पिछले दिनों राजधानी के दर्शकों व …

Read More »

प्रत्यक्षा की किताब ‘ग्लोब के बाहर लड़की’ की समीक्षा

प्रत्यक्षा की किताब ‘ग्लोब के बाहर लड़की’ पर यह विस्तृत लेख लिखा है अदिति भारद्वाज ने। यह किताब राजकमल प्रकाशन से प्रकाशित है। अदिति दिल्ली विश्वविद्यालय से विभाजन-साहित्य और उत्तर-औपनिवेशिकता पर शोध कर रही हैं। पत्र-पत्रिकाओं, वेबसाइट्स पर नियमित लेखन करती हैं। आप उनका लिखा यह लेख पढ़िए- ========================================== जिस …

Read More »