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समीक्षा

‘मैंने मांडू नहीं देखा’ को पढ़ने के बाद

कवि यतीश कुमार ने हाल में काव्यात्मक समीक्षा की शैली विकसित की है। वे कई किताबों की समीक्षा इस शैली में लिख चुके हैं। इस बार उन्होंने स्वदेश दीपक की किताब ‘मैंने मांडू नहीं देखा’ पर लिखी है। यह किताब हिंदी में अपने ढंग की अकेली किताब है और इसके …

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ज्ञान और संवेदना के संतुलन का उपन्यास

पंकज सुबीर के उपन्यास ‘जिन्हें जुर्म–ए–इश्क़ पे नाज़ था’ की आजकल बहुत चर्चा है। इसकी समीक्षा पढ़िए। वीरेंद्र जैन ने लिखी है- ============== मुक्तिबोध ने कहा था कि साहित्य संवेदनात्मक ज्ञान है। उन्होंने किसी विधा विशेष के बारे में ऐसा नहीं कहा अपितु साहित्य की सभी विधाओं के बारे में …

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एक ऐसी कहानी जिसे ब्रिटिश छुपाना चाहते थे और हिंदुस्तानी भुलाना

प्रवीण कुमार झा की चर्चित पुस्तक ‘कुली लाइंस’ पर यह टिप्पणी लिखी है कवि यतीश कुमार ने- मॉडरेटर ========================== अखिलेश का ‘निर्वासन’ पढ़ा था और वो मेरा  ‘गिरमिटिया’ शब्द से पहला परिचय था। जहाँ सूरीनाम,1985 में आए एक्ट का जिक्र था। गोसाईगंज से सूरीनाम तक रामअजोर पांडे के बाबा और बिहार …

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बांधे रखने वाला मनोरंजन देता है ऑडियो नॉवेल गुस्ताख़ इश्क़

स्टोरीटेल पर कुछ कहानियाँ धारावाहिक रूप में भी हैं, जो समक़ालीन जीवन स्थितियों को लेकर हैं। ‘ग़ुस्ताख़ इश्क़‘ ऐसी ही एक सीरीज़ है, जिसे इरा टाक ने लिखा है। उसकी समीक्षा की है शिल्पा शर्मा ने- मॉडरेटर ====================== इरा टाक का लिखा पहला ऑडियो नॉवेल गुस्ताख़ इश्क़ एक युवा पत्रकार …

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कहानी में प्रेम है, वासना है, अकेलापन है, दोस्ती है, पार्टियाँ हैं, समंदर है

वरिष्ठ लेखिका ममता कालिया के उपन्यास ‘बेघर’ पर यह टिप्पणी युवा लेखिका अंकिता जैन ने लिखी है- मॉडरेटर ==================================================== पिछले कुछ महीनों से किताबें पढ़ना थोड़ा कम हो गया था। पर अब फिर से ख़ूब सारा पढ़ लेना चाहती हूँ। पढ़ने के लिए जब ममता जी का लिखा यह उपन्यास …

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धर्म या धर्मग्रन्थ गलत नहीं होता बल्कि उसकी व्याख्याएं गलत होती हैं

पाकिस्तान के लेखक अकबर आगा के उपन्यास ‘द फ़तवा गर्ल’ पर यह टिप्पणी लिखी है तेज़पुर विश्वविद्यालय, असम की शोध छात्रा प्रीति प्रकाश ने- मॉडरेटर ========================================================= जिन्दगी में बाज़ दफा ऐसा होता है कि कोई बेशकीमती सी चीज अनायास ही हाथ लग जाती है| “ द फतवा गर्ल” किताब मुझे …

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‘स्टोरीटेल’ पर श्रीकांत वर्मा की कविताओं को सुनते हुए

स्टोरीटेल पर पिछले दो दिनों से श्रीकांत वर्मा की कविताएँ सुन रहा था। 2 घंटे आठ मिनट के इस ऑडियो बुक में राजकमल प्रकाशन से प्रकाशित श्रीकांत वर्मा की प्रतिनिधि कविताओं का पाठ मेरे दौर के ‘भारतभूषण’ कवि गिरिराज किराड़ू ने किया है। ‘भटका मेघ’ से लेकर ‘मगध’ तक श्रीकांत …

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‘विटामिन ज़िंदगी’ की समीक्षा यतीश कुमार द्वारा

ललित कुमार की पुस्तक ‘विटामिन ज़िंदगी’ की काव्यात्मक समीक्षा पढ़िए यतीश कुमार के शब्दों में- मॉडरेटर ===================== नहीं रहनेवाली ये मुश्किलें ये हैं अगले मोड़ पे मंज़िलें मेरी बात का तू यकीन कर ये सफ़र बहुत है कठिन मगर ना उदास हो मेरे हमसफ़र जावेद अख़्तर साहब की बहुत ही …

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‘जापानी सराय’ पर मनीषा कुलश्रेष्ठ की टिप्पणी

जब आपकी पहली किताब पर जाने माने लेखक-लेखिकाएँ लिखने लगें तो समझ लीजिए कि आपको बहुत गम्भीरता से लिया जा रहा है, आपको बहुत उम्मीदों से देखा जा रहा है। अनुकृति उपाध्याय के पहले कहानी संग्रह ‘जापानी सराय’ की यह समीक्षा प्रसिद्ध लेखिका मनीषा कुलश्रेष्ठ ने लिखी है- मॉडरेटर ============================= …

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राजेंद्र राव के कहानी संग्रह ‘कोयला भई न राख’ पर यतीश कुमार के नोट्स

वरिष्ठ कथाकार राजेंद्र राव के कहानी संग्रह ‘कोयला भई न राख’ पर कवि यतीश कुमार के कुछ नोट्स अपने आपमें कहानियों की रीडिंग भी और एक मुकम्मल कविता भी। उनके अपने ही अन्दाज़ में- मॉडरेटर ======================== कहानियाँ मुसलसल चलती हैं मुकम्मल होना इनका कभी भी तय नहीं था। ये कवितायें …

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