Home / समीक्षा

समीक्षा

बाज़ार के चंगुल में फंसे भयावह समय का कथानक ‘पागलखाना’

ज्ञान चतुर्वेदी के उपन्यास ‘पागलखाना’ पर राहुल देव की टिप्पणी. बहुत बारीकी से उन्होंने इस उपन्यास को हमारे लिए खोला है. एक आदर्श समीक्षा का नमूना. चाहे आप सहमत हों या असहमत लेखक का लिखा प्रभावित कर जाता है- मॉडरेटर =============================================== जब/ ममता, गाय के थनों से निकलकर/ पॉलीपैक में …

Read More »

समय से परे अपने समाज को देखने को उम्दा कोशिश

पिछले 25 साल के उपन्यास लेखन की सबसे बड़ी पहचान अलका सरावगी के नए उपन्यास ‘एक सच्ची झूठी गाथा’ पर सुधांशु गुप्त की यह टिप्पणी. अलका सरावगी का यह उपन्यास राजकमल प्रकाशन से प्रकाशित हुआ है- मॉडरेटर ====================================================== रियल और अनरियल दुनिया की एक सच्ची झूठी गाथा सुधांशु गुप्त उपन्यास …

Read More »

लोकप्रिय शैली में लिखी गंभीर कहानियां

आकांक्षा पारे बहुत जीवंत, दिलचस्प कहानियां लिखती हैं और वह बिना अधिक लोड लिए. इसीलिए कथाकारों की भीड़ में सबसे अलग दिखाई देती हैं. उनके कहानी संग्रह ‘बहत्तर धडकनें तिहत्तर अरमान’ पर एक अच्छी समीक्षा लिखी है युवा लेखक पंकज कौरव ने, जिनके लेखन का मैं खुद ही कायल रहा …

Read More »

‘बैड बॉय’ की ‘गुड’ जीवनी

जब से जाने माने फिल्म पत्रकार-लेखक यासिर उस्मान द्वारा लिखी गई संजय दत्त की जीवनी ‘द क्रेजी अनटोल्ड स्टोरी ऑफ़ बॉलीवुडस बैड बॉय संजय दत्त’ बाजार में आई है तब से यह लगातार चर्चा और विवादों में बनी हुई है. इस किताब के ऊपर मेरी एक छोटी से टिप्पणी- प्रभात …

Read More »

मूर्ति का तराशा हुआ शिल्प इसे पठनीय बनाता है

इरा टाक ने हाल के बरसों में अपनी मेहनत से लेखन में अच्छी पहचान बनाई है. जगरनॉट बुक्स पर उनका उपन्यास ‘मूर्ति’ है. उसकी समीक्षा शिल्पा शर्मा ने की है- मॉडरेटर ================================ मूर्ति, मीठी का कड़वा सौदा… जगरनॉट बुक्स पर उपलब्ध इरा टाक द्वारा रचित इस उपन्यास को पढ़ते हुए आप जैसे किसी कल्पना लोक में पहुंच जाते हैं. रहस्य, रोमांच और प्रेम की दास्तां के साथ गूंथा गया यह उपन्यास आपको कहानी की नायिका मीठी और उसपर बीत रही परेशानियों के साथ-साथ कहानी में मौजूद हर एक पात्र से जोड़ता चलाता है. उपन्यास को पढ़ते हुए आप यह बातभालीभांति जान जाते हैं कि यह काल्पनिक उपन्यास है, पर इसकी फ़ैंटसी और कहानी के दिलचस्प मोड़ आपको इस उपन्यास को इसमें डूबकर पढ़ने को मजबूर कर देती है. उपन्यास की शुरुआत से हीयह जानने की चाहत बराबर बनी रहती है कि आगे क्या होगा? उपन्यास के दूसरे चैप्टर में हमारे सामाज की प्रेम को लेकर वह दोगली सोच भी सामने आती है, जब वह किसी प्रेमी जोड़े का प्रेममुक़म्मल नहीं होने देना चाहता, लेकिन उस प्रेमी जोड़े के सामाजिक और व्यावसायिक रूप से सफल होने पर उसे वही समाज सहर्ष अपना लेता है. यह उपन्यास आपको यह भी बताता चलता है कि कैसेपरिस्थितियां बदलने पर अपने ही लोग एक स्त्री के शोषण में पलभर की देर नहीं लगाते, फिर चाहे वो मानसिक हो, शारीरिक हो या आर्थिक हो… मीठी के पिता की कहानी भी बड़ी सहजता से सामनेआती है और मीठी-विलियम की अपनी प्रेम कहानी भी आपको किसी परी-कथा की तरह कल्पना लोक में विचरण करा लाती है. इरा एक काल्पनिक कहानी में पात्रों को सामयिक रखने में पूरी तरहसफल रही हैं. कहानी के बहाव ने इसकी पठनीयता बढ़ा दी है. किसी कमर्शल सस्पेंस थ्रिलर मूवी की तरह लिखे गए इस नॉवेल की कमज़ोर कड़ी है इसकी प्रूफ़ रीडिंग. कहानी के प्रवाह के बीच मात्राओं/शब्दों की ग़लतियां खटक जाती हैं. लेकिन डिजिटल माध्यम की सकारात्मकता का इस्तेमाल कर जगरनॉट बुक्स के एडिटर्स इस कमी को तुरंत दूर भी कर सकते हैं. यदि आप शिल्प में तराशी हुईअपनी समय की लगनेवाली काल्पनिक, रोमांचक प्रेम कहानियां पढ़ने में दिलचस्पी रखते हैं तो मूर्ति पढ़ने में आपको  पलभर की भी देर नहीं करनी चाहिए. -शिल्पा शर्मा https://www.juggernaut.in/books/eedd0fa7fb8f49dda1cadf3957f31500/preview लेखक परिचय:  शिल्पा शर्माः पोस्टग्रैजुएशन इले‌क्ट्रॉनिक्स में और जी  लेखन में. पिछले 16 वर्षों से …

Read More »

बेगानों को अपना बनाने वाली किताब ‘न बैरी न कोई बेगाना’

‘न बैरी न कोई बेगाना’– 390 पेज की यह किताब आत्मकथा है जासूसी उपन्यास धारा के सबसे प्रसिद्ध समकालीन लेखक सुरेन्द्र मोहन पाठक की आत्मकथा का नाम है. इसको पढ़ते हुए दुनिया के महानतम नहीं तो महान लेखकों में एक गैब्रिएल गार्सिया मार्केज की यह बात याद आती रही- जिन्दगी …

Read More »

पागल बनाने वाला उपन्यास है ‘पागलखाना’

  राजकमल प्रकाशन से प्रकाशित ज्ञान चतुर्वेदी के उपन्यास ‘पागलखाना’ पर यशवंत कोठारी की टिप्पणी- मॉडरेटर ================================================================= राजकमल प्रकाशन ने ज्ञान चतुर्वेदी का पागलखाना छापा है। 271  पन्नों का  उपन्यास ऑनलाइन 595  रूपये (536+30+29)का पड़ा।  14 दिनों में डिलीवरी मिली। कवर पर  शेर और उसकी परछाई देख कर  ही डर …

Read More »

हिंदी व्यंग्य में ताजा हवा का झोंका है ‘मदारीपुर जंक्शन’

बालेन्दु द्विवेदी के उपन्यास ‘मदारीपुर जंक्शन’ की आजकल बहुत चर्चा है. वाणी प्रकाशन से प्रकाशित इस उपन्यास की एक सुघड़ समीक्षा लिखी है युवा लेखक पंकज कौरव ने- मॉडरेटर ====================================== व्यंग्य पढ़ने सुनने में कितना भी आसान क्यों न लगे पर उसे साधना इतना भी आसान नहीं. ज्यादातर व्यंग्य रचनाओं …

Read More »

बचपन की मोहब्बत की जवान कहानी

मेरे हमनाम लेखक प्रभात रंजन के उपन्यास ‘विद यू विदाउट यू’ की तरफ लोगों का ध्यान गया. इस उपन्यास की शायद यह पहली ही समीक्षा है. वह भी इतनी विस्तृत और गहरी. लिखी है पंकज कौरव ने- मॉडरेटर ==================================================== हाल ही में प्रकाशित लोकप्रिय शैली का उपन्यास विद यू विदाउट …

Read More »

भविष्य का भयावह कथानक है ‘रेखना मेरी जान’

‘रेखना मेरी जान’– रत्नेश्वर सिंह के इस उपन्यास की छपने से पहले जितनी चर्चा हुई छपने के बाद इसके अलग तरह के कथानक की चर्चा कम ही हुई. यह हिंदी का पहले उपन्यास है जिसका विषय ग्लोबल वार्मिंग है, जो केवल भारत की कहानी नहीं कहता. इसकी एक विस्तृत समीक्षा …

Read More »