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समीक्षा

प्यार वह फल है जिस पर मासूमियत का छिलका होता है

समकालीन कवियों में सबसे अधिक पसंद किए जाने वाले कवियों में गीत चतुर्वेदी का नाम निर्विवाद रूप से आता है। रुख़ प्रकाशन से प्रकाशित उनके कविता संग्रह ‘ख़ुशियों के गुप्तचर’ को ख़ूब पसंद किया जा रहा है। कवि यतीश कुमार ने इस संग्रह की कविताओं की काव्यात्मक समीक्षा अपनी ख़ास …

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किन्नर धर्मलोक: एक अंतर्यात्रा कृष्णनाथ के साथ

कवि यतीश कुमार ने पुस्तक समीक्षा की अपनी शैली विकसित की है- काव्यात्मक समीक्षा की। इस बार उन्होंने कृष्णनाथ जी की यात्रा पुस्तक ‘किन्नर धर्मलोक’ पढ़कर उसके ऊपर डूबकर लिखा है- मॉडरेटर =============== किन्नर धर्मलोक किन्नर धर्मलोक एक अंतर्यात्रा : कृष्णनाथ के साथ 1) अलंघ्य रास्ते तक जाना है रास्ता …

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सफ़र के साथ सफ़र की कहानियाँ होंगी/ हर एक मोड़ पे जादू-बयानियाँ होंगी

हाल में ही जानी मानी लेखिका मनीषा कुलश्रेष्ठ की यात्रा पुस्तक आई है ‘होना अतिथि कैलाश का’। राजपाल एंड संज से प्रकाशित इस किताब पर यह टिप्पणी लिखी है लेखिका-अनुवादिका रचना भोला यामिनी ने- मॉडरेटर =========================== होना अतिथि कैलाश का— क्या कैलाश का अतिथि होना इतना सहज धरा है\ औघड़ …

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‘अग्निलीक’ में कहानी है, नाटक है, गीत से दृश्य हैं ,प्रेम है और प्रखर जनचेतना है!

वरिष्ठ लेखक हृषीकेश सुलभ का उपन्यास आया है ‘अग्निलीक’। भोजपुरी समाज के सामाजिक, राजनीतिक बदलावों को लेकर लिखा गया यह एक ऐसा उपन्यास है जिसे मेले-ठेले की भीड़ में नहीं अकेले में पढ़ा जाना चाहिए। उपन्यास पर एक टिप्पणी पढ़िए, लिखी है अनामिका अनु ने- मॉडरेटर ================================ “मनरौली की हों …

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‘माउथ ऑर्गन’ अपनी धुन गुनगुना रहा है

सुशोभित के लेखन की अपनी ख़ास शैली है जिसके कारण हज़ारों लोग उनको फ़ेसबुक पर रोज़ पढ़ते हैं। उनकी किताब ‘माउथ ऑर्गन’ का गद्य भी बहुत सम्मोहक है। मन की यात्राओं के इस गद्य पुस्तक की काव्यात्मक समीक्षा अपनी  खास शैली में यतीश कुमार ने की है- मॉडरेटर ====================== माउथ …

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‘मैंने मांडू नहीं देखा’ को पढ़ने के बाद

कवि यतीश कुमार ने हाल में काव्यात्मक समीक्षा की शैली विकसित की है। वे कई किताबों की समीक्षा इस शैली में लिख चुके हैं। इस बार उन्होंने स्वदेश दीपक की किताब ‘मैंने मांडू नहीं देखा’ पर लिखी है। यह किताब हिंदी में अपने ढंग की अकेली किताब है और इसके …

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ज्ञान और संवेदना के संतुलन का उपन्यास

पंकज सुबीर के उपन्यास ‘जिन्हें जुर्म–ए–इश्क़ पे नाज़ था’ की आजकल बहुत चर्चा है। इसकी समीक्षा पढ़िए। वीरेंद्र जैन ने लिखी है- ============== मुक्तिबोध ने कहा था कि साहित्य संवेदनात्मक ज्ञान है। उन्होंने किसी विधा विशेष के बारे में ऐसा नहीं कहा अपितु साहित्य की सभी विधाओं के बारे में …

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एक ऐसी कहानी जिसे ब्रिटिश छुपाना चाहते थे और हिंदुस्तानी भुलाना

प्रवीण कुमार झा की चर्चित पुस्तक ‘कुली लाइंस’ पर यह टिप्पणी लिखी है कवि यतीश कुमार ने- मॉडरेटर ========================== अखिलेश का ‘निर्वासन’ पढ़ा था और वो मेरा  ‘गिरमिटिया’ शब्द से पहला परिचय था। जहाँ सूरीनाम,1985 में आए एक्ट का जिक्र था। गोसाईगंज से सूरीनाम तक रामअजोर पांडे के बाबा और बिहार …

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बांधे रखने वाला मनोरंजन देता है ऑडियो नॉवेल गुस्ताख़ इश्क़

स्टोरीटेल पर कुछ कहानियाँ धारावाहिक रूप में भी हैं, जो समक़ालीन जीवन स्थितियों को लेकर हैं। ‘ग़ुस्ताख़ इश्क़‘ ऐसी ही एक सीरीज़ है, जिसे इरा टाक ने लिखा है। उसकी समीक्षा की है शिल्पा शर्मा ने- मॉडरेटर ====================== इरा टाक का लिखा पहला ऑडियो नॉवेल गुस्ताख़ इश्क़ एक युवा पत्रकार …

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कहानी में प्रेम है, वासना है, अकेलापन है, दोस्ती है, पार्टियाँ हैं, समंदर है

वरिष्ठ लेखिका ममता कालिया के उपन्यास ‘बेघर’ पर यह टिप्पणी युवा लेखिका अंकिता जैन ने लिखी है- मॉडरेटर ==================================================== पिछले कुछ महीनों से किताबें पढ़ना थोड़ा कम हो गया था। पर अब फिर से ख़ूब सारा पढ़ लेना चाहती हूँ। पढ़ने के लिए जब ममता जी का लिखा यह उपन्यास …

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