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Prabhat Ranjan

शहरयार जैसा शायर किसी अवार्ड से बड़ा होता है

हिंदी के प्रसिद्ध लेखक असगर वजाहत का शहरयार से अलीगढ़ विश्वविद्यालय के दिनों से गहरा जुड़ाव रहा है. जब शहरयार को ज्ञानपीठ पुरस्कार मिला तो उन्होंने यह संस्मरण उनके ऊपर लिखा. ‘प्रगतिशील वसुधा’ पत्रिका में प्रकाशित यह संस्मरण इतना रोचक लगा कि सोचा शहरयार के चाहनेवालों से उसे साझा किया …

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ये दुनिया अगर मिल भी जाए तो क्या है!

‘टाइम‘ पत्रिका ने गुरुदत्त की फिल्म ‘प्यासा‘ को पांच सर्वकालिक सबसे रोमांटिक फिल्मों में शुमार किया है, इस अवसर पर प्रस्तुत है स्वतंत्र मिश्र का एक सुन्दर आलेख जो गुरुदत्त के जीवन और सिनेमा को लेकर है- जानकी पुल.                        …

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प्रेम के लिए जान देने वाला लेखक

फ्रेंच लेखक रेमंड रेडिग्वे ने लिखा है कि पहला प्रेम अक्सर साधारणता के आकर्षण से शुरु होता है और हमें असाधारणता की ओर ले जाता है. ‘द डेविल इन द फ्लेश’ नामक फ्रेंच उपन्यास के लेखक रेमंड रेडिग्वे के अपने जीवन की दास्तान भी कम दिलचस्प नहीं है. १९२३ में …

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सच को झूठ और झूठ को सच बनाकर पेश करना है आसान

युवा पत्रकार विनीत उत्पल एक संवेदनशील कवि भी हैं. यकीं न हो तो उनकी कविताएँ पढ़ लीजिए- जानकी पुल. कुत्ते या आदमी  कुछ लोग कुत्ते बना दिए जाते हैं कुछ लोग कुत्ते बन जाते हैं कुछ लोग कुत्ते पैदा होते हैं कुत्ते बनने और बनाने का जो खेल है काफी …

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ज़िम्मेदारी की पत्रकारिता में बाज़ार बाद में आता है

‘जनसत्ता’ के संपादक ओम थानवी हमारे दौर के सबसे सजग और बौद्धिक संपादक है. उनके लिए पत्रकारिता ऐसा प्रोफेशन है जिसमें मिशन का भाव पीछे नहीं छूटता. पत्रकारिता को वे केवल व्यवसाय नहीं बल्कि सामाजिक ज़िम्मेदारी के तौर पर देखते हैं. आइये उनसे अनूप कुमार तिवारी की यह विचारोत्तेजक बातचीत …

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ऐसा नगर कि जिसमें कोई रास्ता न जाए

खलीलुर्रहमान आज़मी मशहूर शायर शहरयार के उस्तादों में थे. इस  जदीदियत के इस शायर के बारे में  शहरयार ने लिखा है कि १९५० के बाद की उर्दू गज़ल के वे इमाम थे. उनके मरने के ३२ साल बाद उनकी ग़ज़लों का संग्रह हिंदी में आया है और उसका संपादन खुद …

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हमें फिर खुदा ने दिखाई बसंत

नजीर अकबराबादी की नज्मों के साथ सबको वसंतपंचमी मुबारक- जानकी पुल. १. फिर आलम में तशरीफ़ लाई बसंत हर एक गुलबदन ने मनाई बसंत तवायफ ने हरजां उठाई बसंत इधर औ उधर जगमगाई बसंत हमें फिर खुदा ने दिखाई बसंत मेरा दिल है जिस नाज़नीं पे फ़िदा वो काफिर भी …

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वे लोग, वह युग, वह दुनिया कहाँ चली गई?

आज हिंदी के उपेक्षित कवि जानकीवल्लभ शास्त्री ९५ साल के हो गए. इस अवसर पर उनके शतायु होने की कामना के साथ प्रस्तुत है यह संस्मरणात्मक लेख जिसे कवयित्री रश्मिरेखाजी ने लिखा है- जानकी पुल. हमारा मुज़फ्फरपुर शहर मीठी लीचियों के साथ-साथ आचार्य जानकी वल्लभ शास्त्री के लिए भी जाना जाता है. शास्त्रीजी की …

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फिराक गोरखपुरी की एक दुर्लभ कहानी ‘रैन-बसेरा’

उर्दू के मशहूर शायर फ़िराक गोरखपुरी की शायरी के बारे में किसी को बताने की ज़रूरत नहीं, सब जानते हैं कि वे किस पाए के शायर थे. उनको अपनी शायरी के लिए ज्ञानपीठ पुरस्कार भी मिला था. लेकिन यह कम लोग जानते हैं कि उन्होंने कुछ कहानियां भी लिखी थीं. …

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गाँधी तूफान के पिता और बाजों के भी बाज़ थे

महात्मा गाँधी के ऊपर शायद हिंदी में सबसे अधिक कविताएँ लिखी गई हैं. महात्मा गाँधी के जन्मदिन के मौके पर प्रस्तुत हैं रामधारी सिंह दिनकर द्वारा लिखी गई कुछ कविताएँ- जानकी पुल. गांधी (१) तू सहज शान्ति का दूत, मनुज के सहज प्रेम का अधिकारी, दृग में उंडेल कर सहज शील …

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