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कविताएं

इरा टाक की कविताएं

इरा टाक आजकल अपनी शॉर्ट फिल्म के कारण चर्चा में हैं. बहुत अच्छी पेंटर हैं. लेकिन वह मूलतः कवयित्री हैं. आज उनकी कुछ कवितायेँ- मॉडरेटर  “मैं” और “हम”वजन एक हैपर अंतर मीलों का है नमेरे प्रिय ! आजकल सपने बुना करती हूँजैसे माँ कभी स्वेटर बुनती थीपर मेरी गति तेज़ …

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आराधना प्रधान की कविताएं

आराधना प्रधान को मैं साहित्य की एक गंभीर एक्टिविस्ट के रूप में जानता रहा हूँ. उनकी कविताओं को पढना सुखद लगा. पहले भी उनकी कविताएं ‘कथादेश’ में छप चुकी हैं. भावों को शब्दों में पिरोने की कला ही तो कविता होती है. कुछ सघन भावों की जीवंत कविताएं- मॉडरेटर    …

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प्रकृति करगेती की नई कविताएं

प्रकृति करगेती की कहानियों से हम सब परिचित रहे हैं. उनकी कविताओं का भी विशिष्ट स्वर है. भाषा और विचार का जबरदस्त संतुलन साधने वाली इस कवयित्री की कुछ नई कविताएं- मॉडरेटर  ================================================================= सभ्यता के सिक्के सभ्यता अपने सिक्के हर रोज़ तालाब में गिराती है कुछ सिक्के ऐसे होते, जिन …

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मंजरी श्रीवास्तव की नई कविताएं

मंजरी श्रीवास्तव मूलतः कवयित्री हैं. लेकिन कई मोर्चों पर एक साथ सक्रिय रहने के कारण उसका कवि रूप इधर कुछ छिप सा गया था. उसकी नई कविताएं पढ़ते हुए ताजगी का अहसास हुआ. खासकर इसलिए भी क्योंकि ये कविताएं मेरे प्रिय लेखकों में एक निर्मल वर्मा के लेखन, उसके जादू …

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अनामिका की कविता ‘गणिका गली’

मुजफ्फरपुर के सांस्कृतिक विरासत स्थली चतुर्भुज स्थान पर मैंने किताब लिखी ‘कोठागोई’. वरिष्ठ कवयित्री अनामिका के नए कविता संग्रह ‘टोकरी में दिगंत: थेरी गाथा: 2014(राजकमल प्रकाशन) से गुजर रहा था तो उसमें एक कविता पर नजर पड़ी- गणिका गली. यह कविता चतुर्भुज स्थान को लेकर ही लिखी गई है. वैसे इस …

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अरुंधति सुब्रमणियम की कविताएँ

अंग्रेजी की जानी-मानी कवयित्री अरुंधति सुब्रमणियम की ये कविताएं ‘लोकमत समाचार साहित्य वार्षिकी‘ में पढ़ी थी. गहरे इंगितों वाली इन कविताओं को जाने कब से साझा करना चाहता था. आज बरसाती सुबह में कर रहा हूँ. पढियेगा शकुन्तला को संबोधित इन कविताओं को. अनुवाद कुमार सौरभ ने किया है- प्रभात …

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मनीषा पांडे की नई कविताएं

समकालीन हिंदी कविता पर समसामयिकता का दबाव इतन अधिक हो गया है, विराट का बोझ इतना बढ़ गया है कि उसमें निजता का स्पेस विरल होता गया है. मनीषा पांडे की इस नई कविता श्रृंखला को पढ़ते हुए लगा कि और कहीं हो न हो कविता में इस उष्मा को बचाए …

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शैलजा पाठक की कविताएं

आज शैलजा पाठक की कविताएं. शैलजा पाठक  की कविताओं में विस्थापन की अन्तर्निहित पीड़ा है. छूटे हुए गाँव, सिवान, अपने-पराये, बोली-ठोली. एक ख़ास तरह की करुणा. आप भी पढ़िए- मॉडरेटर  =========================================================== 1    1.   इतनी सी ख़ुशी     हमने कब कहा बो देना मुझे अपने मन की जमीन पर  हमने …

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रश्मिरेखा की कविताएं

रश्मिरेखा जी के निधन के समाचार से स्तब्ध हूँ। जिन दिनों मैं कोठागोई लिख रहा था उनसे ख़ूब बातें होती थीं। मुज़फ़्फ़रपुर की तवायफ़ परम्परा के कई क़िस्से उन्होंने सुनाए थे। मुज़फ़्फ़रपुर जाने पर उनके यहाँ ज़रूर जाता था। बहुत अच्छी कविताएँ लिखती थीं। आज उनकी कुछ कविताओं के साथ …

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बादल रोता है बिजली शरमा रही

जब सीतामढ़ी में था तो नवगीत दशक-1 को साहित्य की बहुत बड़ी पुस्तक मानता था. एक तो इस कारण से कि हमारे शहर के कवि/गीतकार रामचंद्र ‘चंद्रभूषण’ के गीत उसमें शामिल थे, दूसरे देवेन्द्र कुमार के गीतों के कारण. नवगीत के प्रतिनिधि संकलन ‘पांच जोड़ बांसुरी’ में उनका मशहूर गीत …

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