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स्मरण

बाबा की सियार, लुखड़ी की कहानी और डा॰ रामविलास शर्मा

लिटरेट वर्ल्ड की ओर अपने संस्मरण स्तंभ की खातिर डा॰ रामविलास शर्मा की यादों को उनके तीसरे पुत्र विजय मोहन शर्मा एवं पुत्रवधू संतोष से बातचीत द्वारा शब्दबद्ध करने का प्रयास किया गया था। डा॰ शर्मा विजय के पास रहकर ही 20 वर्षों तक लगातार अपनी साहित्य साधना करते रहे …

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इमरोज से वे कहतीं – आग तुम जलाओ और रोटी मैं बनाती हूँ

संस्मरण के इस भाग में फिर मिलते हैं इमरोज से। देखते हैं कि एक भावुक व्यक्ति, एक भावुक कलाकार कैसे प्रेम–प्यार, व्यक्ति, परिवार और समाज को देखता है। अमृता के विषय में लम्बी बातचीत करने के बाद जब इमरोज से मैंने उन दोनों की तस्वीरें मांगी, थोड़ी देर बाद ही …

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इंविटेशन एक नहीं, दो मंगाना मैं भी साथ चलूंगा – इमरोज

अमृता प्रीतम और इमरोज का रिश्ता, जिसने कभी भी, किसी तरह के सामाजिक बंधनों की परवाह नहीं की। उन्होंने अपनी जिंदगी को अपने तरीके से जिया, सिर्फ एक–दूसरे की परवाह करते हुए। वे एक ही छत के नीचे दो अलग–अलग कमरों में रहते थे। पत्रकार-अनुवादक संगीता के द्वारा इमरोज से …

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बचपन में अपने भविष्य के बारे में कुल जमा पचपन सपने देखे थे

आज मनोहर श्याम जोशी की पुण्यतिथि है. 2006 में आज के ही दिन उनका देहांत हो गया था. संयोग से उसी साल उनको साहित्य अकादेमी पुरस्कार भी मिला था. उस अवसर पर उन्होंने जो संक्षिप्त भाषण दिया था वह यहाँ अविकल रूप से प्रस्तुत है- मॉडरेटर =========================== हाल में एक …

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अर्चना जी के व्यक्तित्व में गरिमा और स्वाभिमान का आलोक था

विदुषी लेखिका अर्चना वर्मा का हाल में ही निधन हो गया. उनको याद करते हुए युवा लेखक-पत्रकार आशुतोष भारद्वाज ने यह लिखा है, उनके व्यक्तित्व की गरिमा को गहरे रेखांकित करते हुए- मॉडरेटर =========== कृष्णा सोबती और अर्चना वर्मा उन बहुत कम लेखकों में थीं जिनके साथ मेरा लंबा संवाद …

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नामवर सिंह एक व्यक्ति नहीं प्रतीक थे

नामवर सिंह के निधन पर श्रद्धांजलि स्वरुप यह लेख नॉर्वे प्रवासी डॉक्टर-लेखक प्रवीण झा ने लिखा है- मॉडरेटर ================ नामवर सिंह जी पर लिखने बैठा तो घिघ्घी बँध गयी। यूँ हज़ार–दो हज़ार शब्द लिख डालना कोई बड़ी बात नहीं; लेकिन यह शब्द लिखे किनके लिए जा रहे हैं? शब्दों के …

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जिंदगी अपनी जब इस रंग से गुजरी ‘ग़ालिब’

मौलाना अल्ताफ हुसैन ‘हाली’ की किताब ‘यादगारे ग़ालिब’ को ग़ालिब के जीवन और उनकी कविता पर लिखी गई आरंभिक किताब में शुमार किया जाता है. हाली ने १८५४ से १८६९ तक यानी उनके जीवन के आखिरी दौर तक को बहुत करीब से देखा था. इसी कारण ‘यादगारे ग़ालिब’ को महत्वपूर्ण किताबों में शुमार किया …

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देशभक्ति गीतों का अमर गीतकार कवि प्रदीप

आज कवि प्रदीप की जयंती है. देशभक्ति गीतों को याद करते ही प्रदीप याद आने लगते हैं. उनको याद करते हुए यह लेख लिखा है नवीन शर्मा ने- मॉडरेटर ===================================== ऐ मेरे वतन के लोगों जरा याद करो कर्बानी .. देशभक्ति गीत लता मंगेशकर की आवाज में सुनना एक अलग …

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बहुत याद आएंगे जीनियस सुशील सिद्धार्थ    

सुशील सिद्धार्थ को याद करते हुए बहुवचन के संपादक अशोक मिश्र ने बहुत अच्छा लिखा है. पढियेगा- मॉडरेटर ================================================================= सुशील सिद्धार्थ के अचानक निधन की पहली खबर मुझे कहानीकार मनोज कुमार पांडे से शनिवार 17 मार्च को सुबह साढ़े दस बजे मिली उस समय बैंक से कुछ काम निपटाकर कैंपस …

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मीना कुमारी और तन्हाई का अंधा शिगाफ़ : भाग-1

ख़ुद ही को तेज़ नाख़ूनों से हाए नोचते हैं अब हमें अल्लाह ख़ुद से कैसी उल्फ़त होती जाती है – मीना कुमारी भारतीय सिनेमा की मशहूर अदाकारा मीना कुमारी के बारे में हम सब टुकड़ों-टुकड़ों में बहुत कुछ जानते हैं। लेकिन बहुत कुछ है जो अनकहा है, अनसुना है। आज …

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