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स्मरण

साहिर ने सेल्युलाइड के लिए भी वही लिखा जो कागज़ पर लिखते आए थे

कल महान शायर, फिल्मों के सबसे सफल गीतकारों में एक साहिर लुधियानवी का जन्मदिन था. उनके एक दोस्त जोए अंसारी का साहिर पर लिखा यह संस्मरण उनके व्यक्तित्व की कई गिर्हों को खोलता है. दिलचस्प है- मॉडरेटर ======================================================= बम्बई शहर के उबलते हुए बाज़ारों में, साहिलों पर, सस्ते होटलों में …

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उन्होंने ‘लुगदी’ परम्परा को ग्लैमर की ‘वर्दी’ पहनाई

मुझे याद है जब आमिर खान ने अपनी फिल्म ‘तलाश’ का प्रोमोशन शुरू किया था तो वे मेरठ में सबसे पहले वेद प्रकाश शर्मा के घर गए थे. यह हिंदी की लोकप्रिय धारा के लेखन को मिलने वाला विरल सम्मान था. 80 और 90 के दशक में उनके उपन्यासों ने …

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भारतेंदु हरिश्चंद्र पर गोपाल राम गहमरी

भारतेंदु हरिश्चंद्र के नाटकों और उनके मंचन के प्रभाव को लेकर 19वीं शताब्दी के प्रसिद्ध लेखक गोपाल राम गहमरी ने एक संस्मरण लिखा था. वे उन दिनों बलिया में छात्र थे और उन्होंने भारतेंदु को खुद नाटक में अभिनय करते देखा था. यह दुर्लभ लेख पढने को मिला ‘बहुवचन’ के …

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ओमप्रकाश वाल्मीकि ने हिंदी की चौहद्दी का विस्तार किया

ओमप्रकाश वाल्मीकि जी के प्रति एक छोटी सी श्रद्धांजलि ‘दैनिक हिन्दुस्तान’ में प्रकाशित हुई. मैंने ही लिखी है- प्रभात रंजन  ====================== ओमप्रकाश वाल्मीकि की एक कविता ‘शब्द झूठ नहीं बोलते’ की पंक्तियाँ हैं- मेरा विश्वास है/तुम्हारी तमाम कोशिशों के बाद भी/शब्द ज़िन्दा रहेंगे/समय की सीढ़ियों पर/अपने पाँव के निशान/गोदने के लिए/बदल …

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‘मार्क्स के संस्मरण’ किताब से एक अंश

पॉल लाफार्ज और विल्हेम लीबनेख्त द्वारा लिखे गए ‘मार्क्स के संस्मरण‘ के हिंदी अनुवाद से वहीं परिचय हुआ. पॉल लाफार्ज मार्क्स के दामाद थे. इसलिए ये संस्मरण बड़े आत्मीय और विश्वसनीय लगते हैं. पुस्तक का हिंदी अनुवाद किया है हरिश्चंद्र ने और प्रकाशक हैं जन-प्रकाशन गृह, मुंबई. यह संस्मरण ‘हिंदी …

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सआदत हसन मंटो पर कृशन चंदर का संस्मरण

सआदत हसन मंटो की जयंती पर  पढ़िए उनके ऊपर कृशन चंदर का एक दिलचस्प संस्मरण- जानकी पुल. =============== सआदत हसन मंटो: ख़ाली बोतल भरा हुआ दिल  एक अजीब हादसा हुआ है । मंटो मर गया है, गो वह एक अर्से से मर रहा था। कभी सुना कि वह एक पागलखाने में …

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रवीन्द्रनाथ के मिथिला से आत्मीय सम्बंध थे- बुद्धिनाथ मिश्र

आज रवीन्द्र जयंती है. उनके जीवन-लेखन से जुड़े अनेक पहलुओं की चर्चा होती है, उनपर शोध होते रहे हैं. एक अछूते पहलू को लेकर डॉ. बुद्धिनाथ मिश्र ने यह लेख लिखा है. बिहार के मिथिला प्रान्त से उनके कैसे रिश्ते थे? एक रोचक और शोधपूर्ण लेख- जानकी पुल. ———————————————————————————————   …

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‘कसप’ मैंने घोर निराशा और मोहभंग की मनःस्थिति में लिखा: मनोहर श्याम जोशी

आज हिंदी के मूर्धन्य लेखक मनोहर श्याम जोशी जीवित होते तो ७८ साल के हुए होते. आज उनके जन्मदिन पर उनके प्रेम-उपन्यास ‘कसप’ की रचना-प्रक्रिया पर उनका यह लेख प्रस्तुत है, जो उन्होंने मेरे कहने पर लिखा था और जो जनसत्ता में सबसे पहले प्रकाशित हुआ था. उनकी अमर स्मृति …

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