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Tag Archives: suresh kumar

    इतिहास और कल्पना कोरस ‘राजनटनी’

गीताश्री के उपन्यास राजनटनी की विस्तृत समीक्षा लिखी है प्रखर युवा शोधार्थी सुरेश कुमार ने। यह उपन्यास हाल में ही राजपाल एंड संज प्रकाशन से आया है- =========== स्त्रीविमर्श की सिद्धांतकार गीताश्री ने शोध और अनुसंधान से चमत्कारित कर देने वाला ‘राजनटनी’ नामक इतिहासपरक उपन्यास लिखा है। यह उपन्यास अभी …

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श्यौराज सिंह बेचैन की कहानियों का विमर्श

दलित साहित्यकारों में श्यौराज सिंह ‘बेचैन’ का नाम प्रमुखता से लिया जाता है। उनकी प्रिय कहानियों के संकलन ‘मेरी प्रिय कहानियाँ’ की कहानियों पर यह विस्तृत टिप्पणी लिखी है युवा अध्येता सुरेश कुमार ने। आप भी पढ़ सकते हैं- ================== दलित विमर्श और साहित्यिक महारथियों के बीच श्यौराज सिंह ‘बेचैन’ …

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  श्रीमती हेमन्त कुमारी देवी: उन्नीसवीं सदी के उत्तरार्ध का स्त्री पक्ष

क्या उन्नीसवीं सदी को लेकर हिंदी साहित्य का जो विमर्श है वह इतना अधिक भारतेंदु हरिश्चन्द्र केंद्रित है कि अनेक लेखकों की उपेक्षा हुई? ख़ासकर लेखिकाओं की? युवा अध्येता सुरेश कुमार के इस शोधपरक लेख में पढ़िए- =====================  हिन्दी साहित्य में विमर्श के बिंदु भारतेन्दु की आभा के इर्द गिर्द …

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उन्नीसवीं शताब्दी ‘स्त्री दर्पण’ और स्त्री शिक्षा

सुरेश कुमार 19वीं शताब्दी के उत्तरार्ध और 20 वीं शताब्दी के पूर्वार्ध में स्त्रियों से जुड़े विषयों पर लगातार लिखते रहे हैं। उनका शोध भी इसी काल पर है। इस लेख में उन्होंने 19 वीं शताब्दी के सातवें दशक में प्रकाशित पुस्तक ‘स्त्री दर्पण’ पर लिखा है। यह बताया है …

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     रख्माबाई: हिंदू कानून और बाल विवाह

19वीं सदी के उत्तरार्ध तथा 20 वीं सदी के पूर्वार्ध में स्त्री से जुड़े मुद्दों को लेकर सुरेश कुमार लगातार लिखते रहे हैं। यह लेख उन्होंने रख्माबाई पर लिखा है, जिन्होंने स्त्री अधिकारों को लेकर उल्लेखनीय लड़ाई लड़ी थी- =================== उन्नीसवीं सदी के उत्तरार्ध में भारत का शासन महारानी विक्टोरिया …

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पुत्री जनम मति देई विधाता

सुरेश कुमार नवजागरणकालीन स्त्री विषयक मुद्दों पर बहुत शोधपरक लिखते हैं। इस लेख में भी उन्होंने 1887 में प्रकाशित एक पुस्तिका की चर्चा के माध्यम से यह बताने का प्रयास किया है कि दहेज प्रथा उस समय कितनी विकराल समस्या बन चुकी थी। विस्तार से पढ़ने के लिए लेख पर …

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संतराम बी.ए. के बारे में आप कितना जानते हैं?

सुरेश कुमार युवा शोधकर्ता हैं और 19वीं सदी के उत्तरार्ध से लेकर 20वीं सदी के पूर्वार्ध के अनेक बहसतलाब मुद्दों, व्यकतियों के लेखन को अपने लेखों के माध्यम से उठाते रहे हैं। संतराम बीए पर उनका यह लेख बहुत रोचक और ज्ञानवर्धक है- ==============   हिन्दी के आलोचकों ने नवजागरण …

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उन्नीसवीं शताब्दी का आख़िरी दशक, स्त्री शिक्षा और देसी विदेशी का सवाल

युवा शोधकर्ता सुरेश कुमार ने 19 वीं शताब्दी के आख़िरी दशकों तथा बीसवीं शताब्दी के आरम्भिक दशकों के स्त्री साहित्य पर गहरा शोध किया है। हम उनके लेख पढ़ते सराहते रहे हैं। आज उनका लेख 19 वीं शताब्दी के आख़िरी दशकों में स्त्री शिक्षा को लेकर चल रही बहसों को …

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   घासलेटी आंदोलन :  ‘अबलाओं का इन्साफ’ और अश्लीलता

‘अबलाओं का इंसाफ़’ शीर्षक से एक किताब चाँद कार्यालय से 1927 में प्रकाशित हुआ था। क्या वह किसी पुरुष का लिखा था? बनारसीदास चतुर्वेदी ने ‘घासलेटी साहित्य’ नामक आंदोलन चलाया था। वह क्या था? नैतिकता-अनैतिकता के इस बड़े विवाद पर एक दिलचस्प लेख लिखा है युवा शोधकर्ता सुरेश कुमार ने। …

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भारतेंदु युग की लेखिका मल्लिका और उनका उपन्यास ‘सौंदर्यमयी’

 भारतेंदु युग की लेखिका मल्लिका को लेखिका कम भारतेंदु की प्रेमिका के रूप में अधिक दिखाया गया है। लेकिन युवा शोधार्थी सुरेश कुमार ने अपने इस लेख में मल्लिका के एक लगभग अपरिचित उपन्यास ‘सौंदर्यमयी’ के आधार पर यह दिखाया है कि बाल विवाह, विधवा विवाह जैसे ज्वलंत सवालों को …

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