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Prabhat Ranjan

संस्कृति का तीर्थ है ‘मुअनजोदड़ो’

इतिहासकार नयनजोत लाहिड़ी ने अपनी पुस्तक ‘विस्मृत नगरों की खोज’ में लिखा है कि १९२४ की शरद ऋतु में पुरातत्ववेत्ता जॉन मार्शल ने एक ऐसी घोषणा की, जिसने दक्षिण एशिया की पुरातनता की उस समय की सारी अवधारणाओं को चमत्कारिक ढंग से परिवर्तित कर दिया: यह घोषणा थी ‘सिंधु घाटी …

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रेणु जी की कविता ‘मेरा मीत सनीचर!’

आज फणीश्वरनाथ रेणु का जन्मदिन है. आज उनकी एक कविता पढते हैं जिसमें उनकी वही किस्सागोई है, उनकी कहानियों जैसे ही भोला एक पात्र है और वही जीवंत परिवेश. जाने क्या है इस कविता में कि जब भी पढता हूँ आँखें पनियाने लगती हैं. आप में से बहुतों ने पढ़ी …

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फिराक गोरखपुरी की एक दुर्लभ कहानी ‘दही का बर्तन’

आज उर्दू के मशहूर शायर फिराक गोरखपुरी का जन्मदिन है. आज ही के दिन १९८२ में उनका देहांत हुआ था. उनके गज़लों, नज्मों, कतओं से तो हम सब बखूबी परिचित रहे हैं लेकिन उनकी कहानियों के बारे में हमारी मालूमात ज़रा कम रही है. उनकी नौ कहानियों का एक संकलन भी उनके …

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क्या रेणु ने भाषा में आंचलिकता की छौंक अधिक लगा दी?

२८ फरवरी को राजकमल प्रकाशन के स्थापना दिवस के अवसर पर अजित वडनेरकर को ‘शब्दों का सफर’ के लिए एक लाख का पुरस्कार दिया गया. इस अवसर पर नामवर सिंह जी ने बोलते हुए कई बहसतलब बातें कहीं. एक तो उन्होंने कहा कि रेणु जैसे आंचलिक लेखकों ने आंचलिक प्रयोगों …

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नफरत करनेवालों के सीने में प्यार भरनेवाले इन्दीवर

‘मल्हार’ फिल्म के गीत ‘बड़े अरमान से रखा है बलम तेरी कसम/ प्यार की दुनिया में ये पहला कदम’ से श्याम बाबू ‘आज़ाद’ इन्दीवर के नाम से मशहूर हो गए. आज उनकी पुण्यतिथि है. उनके जीवन के कुछ अनछुए पहलुओं और गीतों को लेकर महेंद्र भीष्म का यह लेख रचनाकार …

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कलरव में सुबह चुप है

नंदकिशोर आचार्य ऐसे कवि हैं जो शोर-शराबे से दूर रहकर साधना करने में विश्वास करते हैं. अनेक विधाओं में सिद्धहस्त आचार्य जी मूलतः कवि हैं. अभी हाल में ही वाणी प्रकाशन से उनका नया संग्रह आया है ‘गाना चाहता पतझड़’ कविताएँ. उसकी कुछ कविताएं- जानकी पुल. १. उसकी नहीं हुई …

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लेखक समाज और जनता का चौकीदार होता है

कुंवर नारायण के किसी परिचय की ज़रूरत नहीं है. ८० पार की उम्र हो गई है लेकिन साहित्य-साधना उनके लिए आज भी पहली प्राथमिकता है. भारत में साहित्य के सबसे बड़े पुरस्कार ज्ञानपीठ पुरस्कार से नवाजे जा चुके इस लेखक से शशिकांत ने बातचीत की. प्रस्तुत है आपके लिए- जानकी …

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इतिहास-पुरुषों की बतकही और काशी

युगान्तकारी लेखक जयशंकर प्रसाद और उनके युग को आधार बनाकर श्यामबिहारी श्यामल ने उपन्यास लिखा है, जिसमें बनारस का वह युग जीवंत रूप से उपस्थित दिखाई देता है जब वहां प्रसाद थे, रामचंद्र शुक्ल थे, आचार्य केशव प्रसाद मिश्र थे, प्रेमचंद थे और बनारसी बतकही की मस्ती थी. प्रस्तुत है …

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कृष्ण बलदेव वैद का कथा आलोक

लगभग ८५ साल की उम्र में हिंदी के प्रख्यात कथाकार-उपन्यासकार कृष्ण बलदेव वैद की कहानियों की दो सुन्दर किताबों का एक साथ आना सुखद कहा जा सकता है. सुखद इसलिए भी क्योंकि इनमें से एक ‘खाली किताब का जादू’ उनकी नई कहानियों का संकलन है. दूसरा संकलन है ‘प्रवास गंगा’, …

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लेखक ‘पेपर बीइंग’ होता है

आज प्रसिद्ध लेखक उदयप्रकाश को भारतीय भाषा परिषद की ओर से ज्ञान-समग्र पुरस्कार मिलने वाला है. भारतीय भाषाओं के अनेक प्रसिद्द लेखकों को यह पुरस्कार मिल रहा है, जिनमें केदारनाथ सिंह, गोपीचंद नारंग, एम.टी.वासुदेवन नायर, इंदिरा गोस्वामी, अरुण साधू, जया गोस्वामी जैसे लेखक शामिल हैं. इस अवसर पर हम उदयजी …

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