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Prabhat Ranjan

सरयू में काँप रही थी अयोध्या की परछाईं

अरुण देव की इस कविता में इतिहास के छूटे हुए सफों का ज़िक्र  है, उनमें  भूले हुए प्रसंग अक्सर पुराने दर्द की तरह उभर आते हैं. उनकी कवि-दृष्टि  वहाँ तक जाती है जहाँ से हम अक्सर नज़रें फेर लिया करते हैं. इस कविता में तहजीब की उस गली का दर्द …

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अज्ञेय की पांच दुर्लभ किताबों का पुनर्प्रकाशन

अज्ञेय  की जन्मशताब्दी को ध्यान में रखकर उनका मूल्यांकन-पुनर्मूल्यांकन ज़ारी है. सस्ता साहित्य मंडल प्रकाशन ने उनकी पांच दुर्लभ किताबों का प्रकाशन इस अवसर पर किया है. मुझे वे किताबें बहुत अच्छी लगीं. मैंने सोचा आपसे भी उन किताबों को साझा करूं- जानकी पुल. अज्ञेय ने निबंध में साहित्यकार के …

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गुल तो बहुत हैं मगर एक थे लेखक गुलशन नंदा

कहते हैं गुलशन नंदा ऐसा लेखक था जिसने जासूसों को प्रेम की भूल-भुलैया में भटका दिया. गुलशन नंदा के लेखक के रूप में आगमन से पहले हिंदी में लोकप्रिय उपन्यासों के नाम पर जासूसी उपन्यासों का बोलबाला था. बोलबाला क्या था उनका जादू सिर चढ़कर बोलता था. पाठक या तो …

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हिन्दी के क्रियोलीकरण के विरुद्ध

प्रसिद्ध पत्रकार राजकिशोर का यह लेख हिंदी भाषा के संकटों की चर्चा करता है. कुछ साल पहले लेखक यु. आर. अनंतमूर्ति ने अपने एक लेख में भारतीय भाषाओं पर अंग्रेजी के बढ़ते प्रभाव को लेकर कहा था कि अगर यही हाल रहा तो भारतीय भाषाएं ‘किचेन लैंग्वेज’ यानी नौकरों-चाकरों से …

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मुल्ला पंडित संत सयाने सब हमको समझाने आए

सैयद ज़मीर हसन दिल्ली के जेहनो-जुबान के सच्चे शायर हैं. उनकी शायरी में केवल दिल्ली की रवायती जुबान का रंग ही नहीं है, वह अहसास भी है जिसने दिल्ली को एक कॉस्मोपोलिटन नगर बनाए रखा है. उसके बिखरते जाने का दर्द भी है और उस दर्द से उपजी फकीराना मस्ती. …

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प्रसिद्ध पत्रकार-लेखक कन्हैयालाल नन्दन नहीं रहे

कन्हैयालाल  नंदन का निधन हो गया.  कन्हैयालाल नंदन का नाम आते ही न जाने कितनी पत्रिकाओं-पत्रों के नाम याद आ जाते हैं जिनके संपादक एक रूप में बचपन से उनका नाम देखते आए थे.  बचपन में हम लोग उनको पराग के संपादक के रूप में जानते थे. धर्मयुग से पत्रकारिता …

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धर्म को पकड़े रहो, धर्मों को छोड़ दो

आज यानी २३ सितम्बर को राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की जयंती है. लेकिन मन २४ सितम्बर के संभावित अदालती फैसले को लेकर आशंकाओं से घिरा है. ऐसे में धर्मों के भेद-मतभेद, एकता-अनेकता को लेकर दिनकर के विचारों को टटोलने का मन हुआ. उनका एक लेख है ‘कबीर साहब से भेंट’ …

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दिनकर की कविताएँ अज्ञेय की पसंद

२०११ में अज्ञेय की जन्म-शताब्दी है. इसी को ध्यान में रखते हुए सस्ता साहित्य मंडल प्रकाशन ने अज्ञेय संपादित एक पुस्तक ‘पुष्करिणी’ को फिर से प्रकाशित किया है. १९५३ में प्रकाशित इस पुस्तक का ऐतिहासिक महत्व है. अज्ञेय का यह मानना था कि स्कूल-कॉलेजों के पाठ्यक्रमों को ध्यान में रखकर …

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दिल्ली के धुंधलके का लेखक अहमद अली

यह अंग्रेजी के आरंभिक हिन्दुस्तानी लेखकों में एक अहमद अली की जन्मशताब्दी का साल है. वे हिंदुस्तान-पाकिस्तान के आला हुक्काम रहे लेकिन उनको याद किया जाता है अंग्रेजी में लिखे उपन्यास ‘ट्विलाइट इन देल्ही’ के लिए. इस उपन्यास में दिल्ली की संस्कृति का धुंधलका है- मुग़ल संस्कृति की ढलान का …

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गिरिराज किराड़ू की छः कविताएँ

कवि गिरिराज किराडू की ये आरंभिक कविताएँ हैं. जब ‘बहुवचन’ के प्रवेशांक में ये प्रकाशित हुई थीं तो अपने खिच्चेपन से इन्होने ध्यान आकर्षित किया था. यह कवि सफल कविता के बने-बनाये मुहावरों में शब्द नहीं बिठाता अपना मुहावरा बनाने की बेचैनी इन कविताओं में साफ़ दिखाई देती है. एक …

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