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Prabhat Ranjan

भीषण तनाव है, सीने में घाव है

किसने कहा था कि कविता असल में चिंतन की एक शैली है, याद नहीं. लेकिन युवा कवि मृत्युंजय की कविताओं को पढते हुए अगर इस वाक्य का ध्यान आ जाता है तो अकारण नहीं है. एकध्रुवीय होते इस विश्व की क्रूर लीलाएं, विश्व-ग्राम के छदम उनकी कविताओं में उद्घाटित होते …

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स्वदेश दीपक होना और होकर खो जाना

स्वदेश दीपक पिछले आठ साल से लापता हैं. अभी कुछ लोगों ने फेसबुक पर उनको ढूंढने की मुहिम चलाई है जिसका स्वागत किया जाना चाहिए. युवा कवयित्री विपिन चौधरी ने स्वदेश दीपक को याद करते हुए यह संस्मरणात्मक लेख लिखा है. आपके लिए – जानकी पुल ————————————————————————————————– इस दौर- ए- हस्ती …

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इतनी लंबी यात्रा पर जाने से पहले तुम अपना पता भी नहीं दे गए

आज हिंदी कहानियों को नया मोड़ देने वाले निर्मल वर्मा का जन्मदिन है. प्रस्तुत है उनके मरणोपरांत प्रकाशित पुस्तक ‘प्रिय राम’ से एक पत्र. यह पुस्तक उनके और उनके भाई प्रसिद्ध चित्रकार रामकुमार के बीच पत्राचार का संकलन है. वैसे यह पत्र रामकुमार ने निर्मल जी के मरने के बाद उनके नाम …

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पौड़ी के पहाड़ प्यारे

सत्यानन्द निरूपम ऐसे संपादक हैं जो मुझसे कुछ भी लिखवा लेते हैं, अनुवाद करवा लेते हैं. अब सरिता के यात्रा विशेषांक के लिए लिखे गए इस यात्रा वृत्तान्त को ही लीजिए. मैं घूमता तो बरसों से रहा हूं, लेकिन कभी किसी यात्रा पर लिखा नहीं. पहली बात यात्रा-वृत्तान्त लिखा तो …

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क्या ये हिंदी की बेमिसाल प्रेम कहानियां हैं?

प्रसिद्ध अंतरराष्ट्रीय प्रकाशक हार्पर कॉलिंस ने जब हिंदी में पुस्तकों का प्रकाशन आरम्भ किया तो एक अनुवादक ढूंढा नीलाभ के रूप में और एक संपादक ढूंढा कथाकार कम संपादक अधिक अखिलेश के रूप में. सुनते हैं कि स्वभाव से ‘तद्भव’ संपादक को हार्पर कॉलिंस के सतत संपादक बनवाने में हिंदी …

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सांस जीती हैं देह को जैसे स्वरों में धडकता है संगीत

शास्त्रीय /उप शास्त्रीय संगीत के अंगों में जीवन रहस्य तलाशती वंदना शुक्ल की इन कविताओं की प्रकृति काफी अलग है. इनमें संगीत की आत्मा और मनुष्य के जीवन का संगीत साथ-साथ धड़कता सुनाई देता है. तुमुल कोलाहल कलह में- जानकी पुल.    ———————————————————- अलंकार (गंतव्य की ओर)-  सांस जीती हैं देह …

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बीती हुई उम्र एक किताब की तरह है

कमला प्रसाद जी को गए एक साल हो गया. हर पीढ़ी के लेखकों से गहरा जुड़ाव रखने वाले इस लेखक-आलोचक-संपादक को याद करते हुए प्रस्तुत है उनकी यह आत्म कहानी जो सेवाराम त्रिपाठी, विजय अग्रवाल और आशीष त्रिपाठी द्वारा लिए गए साक्षात्कार पर आधारित है और इसे हमने ‘शीतल वाणी’ …

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मौसम निशा नाम की एक लड़की जैसा था

समकालीन लेखकों में जिस लेखक की बहुविध प्रतिभा ने मुझे बेहद प्रभावित किया है उसमें गौरव सोलंकीएक हैं. गौरव की कहानियां, कविताएँ, सिनेमा पर लिखे गए उनके लेख, सब में कुछ है जो उन्हें सबसे अलग खड़ा कर देता है. वे परंपरा का बोझ उठाकर चलने वाले लेखक नहीं हैं. …

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शमशेर बहादुर सिंह के अज्ञेय

  अज्ञेय विविधवर्णी लेखक और विराट व्यक्तित्व वाले थे. यही कारण है कि कुछ विद्वानों का यह मानना रहा है कि रवीन्द्रनाथ टैगोर के बाद वे सबसे बड़े भारतीय लेखक थे. अभी हाल में ही कोलकाता में बोलते हुए उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी ने भी यही कहा. पहले हिंदी-लेखक राजेंद्र यादव …

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जन्‍म से मृत्‍यु तक कितने होते हैं जीवन में चुंबन

प्रेमचंद गांधी– जयपुर में 26 मार्च, 1967 को जन्‍म। एक कविता संग्रह ‘इस सिंफनी में’ और एक निबंध संग्रह ‘संस्‍कृति का समकाल’ प्रकाशित। समसामयिक और कला, संस्‍कृति के सवालों पर निरंतर लेखन। कई नियमित स्‍तंभ लिखे। सभी पत्र-पत्रिकाओं में रचनाएं प्रकाशित। कविता के लिए लक्ष्‍मण प्रसाद मण्‍डलोई और राजेंद्र बोहरा …

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