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Prabhat Ranjan

कविता शुक्रवार 15: हृदयेश मयंक की कविताएं बसंत भार्गव के चित्र

इस बार की प्रस्तुति में हृदयेश मयंक की कविताएं और बसंत भार्गव के चित्र शामिल हैं। हृदयेश मयंक का जन्म 18 सितम्बर 1951को जौनपुर जिले के एक किसान परिवार में हुआ था। उन्होंने एम ए हिन्दी मुंबई विश्व विद्यालय से किया है। उनके कई कविता संग्रह और गीत संग्रह प्रकाशित …

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सोशल मीडिया की असलियत बताने वाली फ़िल्म है ‘द सोशल डिलेमा’

प्रज्ञा मिश्रा ब्रिटेन में रहती हैं और समय-समाज से जुड़े मुद्दों को लेकर जानकी पुल पर नियमित लिखती हैं। उनकी यह टिप्पणी जेफ़ ओरलोवसकी निर्देशित डोक्यूड्रामा ‘सोशल डिलेमा’ पर है। आप भी पढ़िए- ============= पिछले कुछ सालों में न जाने कितनी बार यह बात कही और सुनी गयी है कि …

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अलविदा सीमा घुरैया: सीरज सक्सेना

देश की ख्यातनाम चित्रकार सीमा घुरैया 22 सितम्बर की शाम अपनी उस अनन्त यात्रा में चली गईं, जहाँ से वे अब केवल कला-बिरादरी की स्मृतियों में ही रहेंगी। ‘जानकी पुल’ और उसके साप्ताहिक उपक्रम ‘कविता शुक्रवार’ के लिए हमारे विशेष आग्रह पर यह स्मृति-लेख युवा कलाकार सीरज सक्सेना ने लिखा …

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मेरे गाँव से दिल्ली का रास्ता अमरोहे से होकर जाता है

सुहैब अहमद फ़ारूक़ी पेशे से पुलिस अधिकारी हैं मिज़ाज से शायर। इस लेख में उन्होंने याद किया है नश्तर अमरोहवी को, जिनका ताल्लुक़ ज़ौन इलिया के वतन अमरोहा से था। क्या शिद्दत से याद किया है उनको सुहैब जी ने- =========== ऐ  ग़मे  ज़ीस्त हम  किधर   जाएं इतनी  फ़ुर्सत  नहीं  …

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मृणाल पाण्डे की कथा ‘नकाबपोश नकटापंथ की उत्थान-पतन कथा’ 

पुरानी लोककथाओं की शैली में प्रसिद्ध लेखिका मृणाल पाण्डे कथा सीरिज़ लिख रही हैं ‘बच्चों को न सुनाने लायक़ बालकथाएँ’। यह सोलहवीं कथा है जो साधू के वेश में रह रहे एक ठग की कथा है। रोचक और प्रासंगिक। आप भी आनंद उठाइए- =================== बहुत दिन हुए एक शहर में …

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आत्मनिर्भरता का  लक्ष्य और मातृभाषा में शिक्षा

अशोक महेश्वरी का यह लेख भारतीय भाषाओं में शिक्षा और आत्मनिर्भरता को लक्ष्य करके लिखा गया है। इस लेख में उन्होंने कई महत्वपूर्ण बिंदु उठाए हैं, जैसे यह कि बाजार की दृष्टि से भारतीय भाषाओं का आकलन किया ही नहीं गया। भारतीय भाषाओं के बीच आपसी आदान-प्रदान के माध्यम से …

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हिन्दी दिवस – कथा का उपसंहार: नवीन चौधरी

नवीन चौधरी ‘जनता स्टोर’ के लेखक हैं, किताबों की मार्केटिंग के क्षेत्र के अनुभवी व्यक्ति है। हिंदी के नए पाठकों को लेकर उनका यह सर्वेक्षण नए पाठकों के मानस को समझने में बहुत मदद करने वाला है। आप भी पढ़िए- ==================== 14 तारीख को धूमधाम से हिन्दी दिवस मनाया गया। …

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पुस्तक ‘ल्हासा नहीं…लवासा’ का एक अंश

प्रस्तुत है सचिन देव शर्मा की पुस्तक ‘ल्हासा नहीं… लवासा’ का अंश।सचिन देव शर्मा पेशे से एचआर प्रोफेशनल हैं और शौक से एक लेखक व यात्री। सचिन बिरला इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट टेक्नोलॉजी, दिल्ली से एमबीए हैं और गुरुग्राम में एक मल्टीनेशनल कंपनी में कार्यरत हैं। यात्रा, एचआर व अन्य विषयों …

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कविता शुक्रवार 14: बसंत त्रिपाठी की कविताएँ सफ़दर शामी के चित्र

‘कविता शुक्रवार’ के इस अंक में बसंत त्रिपाठी की कविताएं और सफदर शामी के चित्र शामिल हैं। बसंत त्रिपाठी का जन्म 25 मार्च 1972 को छत्तीसगढ़ के भिलाई में हुआ। शालेय शिक्षा से लेकर बी-एस.सी, एम.ए. (हिंदी) और पी-एच.डी. तक की शिक्षा भिलाई और दुर्ग में हुई। नाटकों में आरंभ …

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छठी बार का दूसरा वसंत:देवेश पथ सारिया

देवेश पथ सारिया ताइवान के एक विश्वविद्यालय में शोध कर रहे हैं और हिंदी के युवा लेखकों में उनका जाना माना नाम है। सभी प्रमुख पत्र-पत्रिकाओं में उनकी रचनाएँ प्रकाशित होती रही हैं। विश्वविद्यालय के अनुभवों को लेकर उन्होंने यह सुंदर गद्य लिखा है- ================================== सितम्बर 2020 शिन चू सिटी मेरी …

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