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Prabhat Ranjan

इदरीस भाई: एक सफ़र चालीस रूपये से डाइरेक्टर ग़ालिब इंस्टिट्यूट तक

सुहैब अहमद फ़ारूक़ी पुलिस अफसर हैं, गम्भीर शायर हैं। वे उन शायरों में हैं जो अच्छा गद्य भी लिखते हैं, जैसे यह संस्मरण देख लीजिए- ========================================== ‘मुन्ना! क्या यह स्पोर्ट्सस्टार मैं ले लूँ?’ इदरीस भाई ने यूँ तो स्पोर्ट्स्टार ले तो रखी ही थी अपने हाथों में। मगर इस ‘ले …

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     पूनम अरोड़ा की कहानी ‘उस हवा का रंग स्लेटी था’

पूनम अरोड़ा समकालीन साहित्य में अपनी अलग उपस्थिति रखती हैं। उनकी कहानियाँ, उनकी कविताओं का अलग ही मिज़ाज है। आज अरसे बाद उनकी नई कहानी पढ़िए- ===========================  साइकिल ठीक गेट के सामने रुकती है. सर पर सफ़ेद सूती कपड़ा बांधे एक भलामानस आवाज़ लगाता है– कूरियर ! आवाज़ के साथ गेट …

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प्राइड मंथ में ‘प्रेग्नेंट किंग’ का अंश

प्राइड मंथ चल रहा है यानी एलजीबीटी समुदाय को लेकर जागरूकता का महीना। मुझे देवदत्त पटनायक के उपन्यास ‘द प्रेग्नेंट किंग’ का ध्यान आया। महाभारत में आए एक प्रसंग को लेकर लेखक ने मिथकीय कथाओं का अच्छा ताना-बना है। पेंगुइन से प्रकाशित इस किताब का सरस हिंदी अनुवाद किया है …

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भैया एक्सप्रेस के भैया और पंजाब दोनों बदल गये हैं

वरिष्ठ लेख सूरज प्रकाश हिंदी की कुछ चर्चित कहानियों का पुनर्पाठ कर रहे हैं। आज पढ़िए अरूण प्रकाश की क्लासिक कहानी ‘भैया एक्सप्रेस’ का पाठ- ========================== 1985 में समर्थ और संवेदनशील कथाकार अरुण प्रकाश की कहानी भैया एक्सप्रेस छपी थी। मूल कहानी के कुछ अंश – भयंकर गरीबी, खाने को …

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हमारी ज़ेब को अब हाजत-ए-रफ़ू क्या है!

फणीश्वरनाथ रेणु की कहानी ‘पंचलैट’ पर बनी फ़िल्म के ऊपर यह टिप्पणी की है साक़िब अहमद ने। साक़िब किशनगंज में रहते हैं और पुस्तकालय अभियान से जुड़े हैं। आप भी पढ़ सकते हैं- ====================== (पंचलैट के सिनेमाई प्रस्तुतिकरण की मुश्किलें और दुश्वारियां) क्या हर रचनात्मकता को कलात्मकता मान लेना चाहिए? …

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कला-राग की आभा: रस निरंजन

राजेश कुमार व्यास की किताब ‘रस निरंजन’ समकालीन कला पर लिखे निबंधों का संग्रह है। इस किताब पर यह विस्तृत टिप्पणी लिखी है चंद्र कुमार ने। चंद्र कुमार ने कॉर्नेल विश्वविद्यालय, न्यूयार्क से पढ़ाई की। वे आजकल एक निजी साफ्टवेयर कंपनी में निदेशक है लेकिन उनका पहला प्यार सम-सामयिक विषयों …

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 द्विज सामंती व्यवस्था का चित्रण है ‘शोले’

दलित लेखक-आलोचक कैलाश दहिया ने ‘शोले’ फ़िल्म की समीक्षा एक अलग ही नज़रिए से की है। आप भी पढ़िए- ================= ‘शोले’ फिल्म भारतीय फिल्म इंडस्ट्री में माइलस्टोन मानी जाती है। फिल्म का एक-एक सीन-डायलॉग आज भी लोगों की जुबान पर चढ़ा मिलता है। इसे इस फिल्म के लेखकों समेत निर्देशकों …

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‘जियो जवानी , जियो ज़माना , जियो जवानी, जियो ज़माना’ के गीतकार हरेकृष्ण

आज पढ़िए वैशाली जनपद के एक बिसरे गीतकार हरेकृष्ण के गीत। चयन के साथ भूमिका लिखी है प्रसिद्ध लेखिका गीताश्री ने- =========================================   पचास और साठ के दशक में एक गीतकार हरेकृष्ण ( 1934 -2011) वैशाली जनपद से नया हुंकार भर रहे थे, युवाओं में नये प्राण फूंक रहे थे- …

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हरिहर प्रसाद चौधरी ‘नूतन’ के छह गीत

वैशाली जनपद के कवि हरिहर प्रसाद चौधरी ‘नूतन’ का नाम सुना था। सीतामढ़ी के गीतकार रामचंद्र ‘चंद्रभूषण’ उनका नाम लेते थे। कहते थे मंचों पर आग लगा देता है। लेकिन न उनको कभी पढ़ने का मौका मिला न सुनने का। कुछ दिन पहले मेरे फ़ेसबुक वाल पर कर्मेंदु शिशिर जी …

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गौतम राजऋषि की ताज़ा नज़्म ‘ये गुस्सा कैसा गुस्सा है’

आज पढ़िए जाने-माने शायर गौतम राजऋषि की ताज़ा नज़्म- ======================   ये ग़ुस्सा कैसा ग़ुस्सा है ये ग़ुस्सा कैसा-कैसा है ये ग़ुस्सा मेरा तुझ पर है ये ग़ुस्सा तेरा मुझ पर है ये जो तेरा-मेरा ग़ुस्सा है ये ग़ुस्सा इसका-उसका है ये ग़ुस्सा किस पर किसका है ये ग़ुस्सा सब …

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