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Prabhat Ranjan

समयोत्तर स्मृतियों की यात्रा-डायरी: प्रदीपिका सारस्वत

युवा लेखिका प्रदीपिका सारस्वत की यह यात्रा डायरी प्रस्तुत है- ============== उस पगडंडीनुमा सड़क पर चलते-चलते मैं अचानक नदी की तलहटी की ओर उतर गई थी. उतनी उत्साही नदी मैंने पहले नहीं देखी थी. दो दिन से मैं उसके साथ-साथ चल रही थी. जहाँ से देखती लगता कि पानी उसमें …

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प्रवीण कुमार झा की कहानी ‘जामा मस्जिद सिंड्रोम’

प्रवीण कुमार झा का लेखन कई बार हैरान कर जाता है। अनेक देशों, मेडिकल के पेशे के अनुभवों को जब वे कथा के शिल्प में ढालते हैं तो ऐसी कहानी निकल कर सामने आती है। कहानी के बारे में ज़्यादा नहीं बताऊँगा। स्वयं पढ़कर देखिए- मॉडरेटर ===================================== गिरजाघर वाली गली …

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विनय कुमार की लॉकडाउन पाती

लॉकडाउन के इस काल में हम सब कहीं न कहीं फँसे हुए हैं। ऐसे ही हाल में जाने माने मनोचिकित्सक, लेखक-कवि विनय कुमार ने काल पटना में अपने घर में अकेले ही अपने विवाह की 42 वीं वर्षगाँठ मनाई। उनको बधाई के साथ उनकी यह कायवात्मक पाती पढ़िए- मॉडरेटर ===================================== …

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कलीमुद्दीन अहमदः अँगरेज़ी के प्रोफेसर, उर्दू के सबसे बड़े आलोचक

पटना कॉलेज, पटना में अंग्रेज़ी के प्रोफ़ेसर कलीमुद्दीन अहमद को उर्दू के बड़े आलोचकों में गिना जाता है। उनके जीवन, उनके कार्यों पर एक शोधपरक लेख लिखा है केंद्रीय विश्वविद्यालय पंजाब में हिंदी के प्रोफ़ेसर पंकज पराशर ने। आप भी पढ़िए- मॉडरेटर ============== पटना कॉलेज, पटना के अँगरेजी के प्रोफेसर …

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कैलाश सत्यार्थी की तीन कविताएँ

बहुत कम लोग जानते हैं कि नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित बाल अधिकार कार्यकर्ता श्री कैलाश सत्यार्थी कवि भी हैं। अपने मन के भावों- विचारों को शब्दों के माध्यम से वे अकसर व्यक्त करते रहते हैं। बाल शोषण के खिलाफ अपनी जन-जागरुकता यात्राओं और आंदोलन के गीत वे खुद रचते …

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सवाल अब भी आँखे तरेरे खड़ा है- और कितने पाकिस्तान?

कमलेश्वर का उपन्यास ‘कितने पाकिस्तान’ सन 2000 में प्रकाशित हुआ था। इस उपन्यास के अभी तक 18 संस्करण प्रकाशित हो चुके हैं और हिंदी के आलोचकों द्वारा नज़रअन्दाज़ किए गए इस उपन्यास को पाठकों का भरपूर प्यार मिला। उपन्यास में एक अदीब है जो जैसे सभ्यता समीक्षा कर रहा है। …

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  समाज और कविता दोनों जेंडर न्यूट्रल हों

स्त्रीवादी आलोचक रेखा सेठी की दो किताबें हाल में आई हैं ‘स्त्री कविता: पक्ष और परिप्रेक्ष्य’ तथा ‘स्त्री कविता: पहचान और द्वन्द्व’। जिनमें हिंदी की कवयित्रियों की चर्चा है और उनकी रचनाओं की आलोचना भी। यह एक शोधपरक दस्तावेज़ी काम है। राजकमल प्रकाशन से प्रकाशित इन किताबों की समीक्षा की …

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विश्व साहित्य की प्रसिद्ध नायिकाएँ

वरिष्ठ लेखिका मनीषा कुलश्रेष्ठ का यह लेख विश्व साहित्य की प्रसिद्ध नायिकाओं को लेकर है। आप भी पढ़िए बहुत रोचक है- ================= कोई भी कला स्त्री की उपस्थिति के बिना अपूर्ण है चाहे वह अमूर्त हो कि विशुद्ध या जादुई यथार्थ! साहित्य अधूरा है, नायिकाओं के बिना। नायिकाएं, एकरेखीय जीवन जिएं और …

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ज़ेहन रोशन हो तो बाहर के अँधेरे उतना नहीं डराते

गीताश्री के उपन्यास ‘वाया मीडिया’ एक अछूते विषय पर लिखा गया है। इसको पढ़ने वाले इससे प्रभावित हुए बिना नहीं रहते। यह उनके किताब की एक खास समीक्षा है क्योंकि इसे लिखा है वंदना राग ने। वंदना जी मेरी प्रिय लेखिकाओं में हैं और इस साल उनका एक बहुत प्यारा …

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      कोरोना के समय में ताइवान : एक मेधावी चिंतक, मुस्तैद रक्षक

देवेश पथ सारिया ताइवान के एक विश्वविद्यालय में शोध छात्र हैं। वे हिंदी में कविताएँ लिखते हैं और सभी प्रमुख पत्र-पत्रिकाओं में उनकी रचनाएँ प्रकाशित होती रहती हैं। उनका यह लेख ताइवान में कोरोनाकाल के अनुभवों को लेकर है। बहुत विस्तार से उन्होंने बताया है कि किस तरह ताइवान ने …

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