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युवा शायर #9 विकास शर्मा ‘राज़’ की ग़ज़लें

युवा शायर सीरीज में आज पेश है विकास शर्मा ‘राज़’ की ग़ज़लें – त्रिपुरारि ==================================================== ग़ज़ल-1 चल रहे थे नज़र जमाये हम मुड़ के देखा तो लड़खड़ाये हम खोलता ही नहीं कोई हमको रह न जाएँ बँधे-बँधाये हम प्यास की दौड़ में रहे अव्वल छू के दरिया को लौट आये …

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न्यूडिस्ट और नैचुरिस्ट आन्दोलन तथा मीनल जैन की चर्चा

मीनल जैन की आजकल बेहद चर्चा है क्योंकि लंदन में नग्न बाइक राइड करके उन्होंने सुर्खियाँ बटोरी हैं. गूगल पर उनकी नग्न तस्वीरें भरी हुई हैं. लेकिन उनके इस प्रयास पर एक गंभीर लेख मिला नीतीश के. एस. का. आप भी पढ़िए- मॉडरेटर ============ मीनल जैन आज कल चर्चा में …

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निरुद्देश्य हिंसा किस इन्कलाब के लिए की जाती है?

नक्सलवादी आन्दोलन अपनी दिशा भटक चुका. कल सुकमा में पुलिस जवानों की हत्या के बाद समय आ गया है कि वे सोचें कि आखिर वे पाना क्या चाहते हैं. विमलेन्दु का लेख इसी मसले पर- दिव्या विजय ======================================================== चार साल पहले छत्तीसगढ़ में कांग्रेसी नेताओं की नृशंस हत्या ने शायद पहली …

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जब चेतन भगत को पढने से परहेज नहीं तो पढ़ाने से क्यों?

‘हर तरफ ऐतराज होता है मैं अगर रौशनी में आता हूँ- लगता है दुष्यंत कुमार ने यह शेर चेतन भगत के लिए ही लिखा था. हालाँकि जितना ऐतराज होता है वे उतनी अधिक रौशनी में आते हैं. वे मुझे बहुत पसंद हैं- इसलिए नहीं कि वे बहुत अच्छा लिखते हैं. …

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सवाल सीता की मुक्ति का नहीं सीता से मुक्ति का है?

23 अप्रैल को दिल्ली के मुक्तांगन में ‘एक थी सीता’ विषय पर बहुत अच्छी चर्चा हुई. उसकी एक ईमानदार रपट लिखी है जेएनयू में कोरियन विभाग की शोध छात्रा रोहिणी कुमारी ने- मॉडरेटर ==================================== मुक्ताँगन : नाम में ही अपनापन है और जो लोग इसका आयोजन करते हैं वे इस …

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नई नस्ल जौन एलिया को पढ़ती है और उनकी तरह दीवाना हो जाना चाहती है

जौन एलिया उर्दू शायरी का एक बड़ा करिश्मा हैं. न तो उनके पीछे किसी विचारधारा, किसी सियासत की ताकत थी, न उनको किसी ग़ज़ल गाने वाले ने गाकर मकबूल बनाया. बल्कि मरने के बाद न जाने उनकी शायरी ने नई नस्ल ने क्या देखा कि उनके चाहने वालों की तादाद …

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ये कैसा मुल्क है लोगों जहाँ पर जान सस्ती है

दिल्ली में किसान नंगे हो रहे हैं. यह अवाक कर देने वाली स्थिति है. किसान बचेंगे या नहीं, किसानी बचेगी या नहीं यह बड़ा सवाल है. ऐसा लग रहा है कि सरकारों को उनकी रत्ती भर परवाह नहीं है. आज बस त्रिपुरारि की यह नज़्म- मॉडरेटर ======================================================== किसान  ये ज़ाहिर …

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महिलाएं और पॉर्न बनाम ज़बरदस्ती की शर्म

कुछ टॉपिक्स ऐसे होते हैं, जिन पर बहस कभी ख़त्म नहीं होती। जैसे कि भाषा, फ़ेमिनिज़्म, पॉर्न, फ़्रीडम, नेशन, वग़ैरह। ज़ाहिर है हर लिखने वाले का अपना नज़रिया होता है। जिसकी सोच जितनी गहरी होती है, वो उतने खुले दिमाग़ से चीज़ों को सोचता है। हाल में इंटरनेट पर महिलाओं …

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विद्या बालन के नाम एक ‘मामूली’ दर्शक का ग़ैर मामूली ख़त

डियर विद्या, मैं हिंदी सिनेमा का एक बेहद मामूली दर्जे का दर्शक हूँ. बहुत दिनों से ये खत में मन में अटका हुआ था. कभी फुरसत नसीब नही होती थी तो कभी मैं खुद में गुमशुदा था. आपसे बात करने के लिए दिल को थोड़ी देर के लिए बंदिशों से …

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‘छोटी-छोटी गौवें, छोटे-छोटे ग्वाल, छोटे से हमरे मदन गोपाल’

राकेश तिवारी का उपन्यास आया है ‘फसक‘. कुमाऊँनी में फसक का मतलब गप्प होता है. हजारी प्रसाद द्विवेदी गल्प यानी उपन्यास को गप्प मानते थे. उपन्यास का एक रोचक अंश. प्रसंग गौ-कथा सुनने का है. यह उपन्यास वाणी प्रकाशन से प्रकाशित हुआ है- मॉडरेटर ================================= नन्नू महराज के आश्रम में …

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