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कोई रूसो कोई हिटलर कोई खय्याम होता है

अदम गोंडवी की ग़ज़लों ने एक ज़माने में काफी शोहरत पाई थी. उस दौर की फिर याद इसलिए आ गई क्योंकि वाणी प्रकाशन ने उनकी शायरी की नई जिल्द छापी है ‘समय से मुठभेड़’ के नाम से. हालांकि इनमें ज़्यादातर गज़लें उनके पहले संग्रह ‘धरती की सतह पर’ से ही …

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क्या सचमुच युवा लेखक मुँह में चांदी का चम्मच लेकर पैदा हुआ है?

प्रतिष्ठित पत्रिका ‘कथन’ के नए अंक में परिचर्चा प्रकाशित हुई है नए कहानी आंदोलन की आवश्यकता को लेकर. इसके साथ प्रसिद्ध लेखक रमेश उपाध्याय जी का साक्षात्कार भी प्रकाशित हुआ है जिसमें उन्होंने एक प्रतिष्ठित पत्रिका के सम्पादकीय के हवाले से कहा है कि आज का युवा लेखक मुँह में …

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उसका धन था स्वाधीन कलम

‘युवा संवाद‘ पत्रिका का नया अंक जनकवियों की जन-शताब्दी पर केंद्रित है. इस अंक का संपादन अशोक कुमार पांडे जी ने किया है. इस अंक में कवि गोपाल सिंह नेपाली पर मेरा यह लेख प्रकाशित हुआ है- प्रभात रंजन. ११ अगस्त १९११ को बिहार में नेपाल की सीमा पर बसे …

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