Recent Posts

अब मनोरंजन के लिए कोई कहानी नहीं लिखता

स्वयंप्रकाश का नाम हिंदी कहानी में किसी परिचय का मोहताज नहीं है. उनसे यह बातचीत वरिष्ठ कवि नन्द भारद्वाजने की है. प्रस्तुत है कवि-कथाकार की यह दुर्लभ बातचीत- जानकी पुल. ============================================================ नंद भारद्वाज – प्रकाश, आप सातवें और आठवें दशक की हिन्‍दी कहानी में न केवल एक कथाकार के बतौर …

Read More »

उत्तर-आधुनिक परिदृश्य में प्रो-एक्टिव विवेक

गुरु पूर्णिमा पर अपने गुरु सुधीश पचौरी की याद आई तो युवा विमर्शकार विनीत कुमार के इस लेख की भी जो उन्होंने पचौरी साहब की आलोचना पर लिखी है. संभवतः उनकी आलोचना पर इतनी गंभीरता से लिखा गया यह पहला ही लेख है. यह लेख मूल रूप से अंग्रेजी पत्रिका …

Read More »

आपके चारों तरफ बस आईने ही आईने हैं

अरुण प्रकाश एक सशक्त कथाकार ही नहीं थे बल्कि एक संवेदनशील कवि भी थे. आज उनकी दो गजलें और एक कविता प्रस्तुत है. जिन्हें उपलब्ध करवाने के लिए हम युवा कवि-संपादक सत्यानन्द निरुपम के आभारी हैं- जानकी पुल.  =========== 1.  सिले होंठों से वही बात कही जाती है  ख़ामोशी चुपचाप …

Read More »