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मन के मंजीरे: कुछ लव नोट्स

रचना भोला यामिनी जानी-मानी अनुवादिका हैं. वह बहुत अच्छा गद्य भी लिखती हैं. बानगी के रूप में पढ़िए उनके कुछ लव नोट्स- मॉडरेटर ============ मन के...

स्मिता सिन्हा की आठ नई कविताएँ

स्मिता सिन्हा की कविताएँ प्रमुख पत्र पत्रिकाओं में छपती रहती हैं, सराही जाती हैं. उनका एक अपना समकालीन तेवर है, संवेदना और भाषा है....

राजेश प्रधान की दो नई कविताएँ

बोस्टन प्रवासी राजेश प्रधान पेशे से वास्तुकार हैं, राजनीतिशास्त्री हैं. हिंदी में कविताएँ लिखते हैं. उनकी कविताओं में सतह के नीचे की दार्शनिकता, विचार,...

फिल्म समीक्षा

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समीक्षा

शायरी

हम से नज़र मिलाइए होली का रोज़ है / तीर-ए-नज़र चलाइए...

जो लोग उर्दू-हिंदी लिटरेचर से तआल्लुक़ रखते हैं, उनके ज़ेहन में होली के ख़याल के साथ नज़ीर अकबराबादी की नज़्म ‘होली की बहारें’ ज़रूर...

नाटक

हबीब तनवीर की पुण्यतिथि पर उनके नाटकों से कुछ गीत

यूँ तो हबीब तनवीर को याद करने के लिए दिन विशेष की आवश्यकता नहीं है क्योंकि जो धरोहर वह छोड़ कर गए हैं उसे...

कथा-कहानी

मृणाल पांडे का अथ पुरातन प्रबंध नव्य संस्करण -2

प्रसिद्ध लेखिका मृणाल पांडे इन दिनों किस्सों की पुरानी लुप्त हुई परम्परा के सूत्रों को जोड़ रही हैं. यह दूसरी कड़ी है. पहली कड़ी...

सौम्या बैजल की कहानी ‘संग-साथ’

सौम्या बैजल युवा लेखिका हैं. बदलते वक्त को कहानियों के माध्यम से समझने-कहने की कोशिश करती हैं. भाषा में भी हिंदी रोमन मिक्स लिखती...

निर्मल वर्मा की कहानी ‘कव्वे और काला पानी’

आज गूगल ने बताया कि स्टोरीटेलिंग डे है. मुझे निर्मल वर्मा की कहानी याद आई- 'कव्वे और काला पानी'. असल में इस कहानी के...

पुस्तक अंश

रस्किन बांड और मसूरी के सेवॉय होटल के भूत

कल मैंने फेसबुक पर भूतों से अपने डर की बात लिखी थी. उसमें मैंने रस्किन बांड का जिक्र किया था. मसूरी में रहने वाले...

ट्विंकल खन्ना की पुस्तक ‘लक्ष्मी प्रसाद की अमर दास्तान’ का एक अंश

पूर्व अभिनेत्री ट्विंकल खन्ना की किताब 'द लिजेंड ऑफ़ लक्ष्मी प्रसाद' जब अंग्रेजी में आई थी तो खूब चर्चा हुई थी. अब जगरनॉट बुक्स...

भारत पाकिस्तान कभी न ख़त्म होने वाली प्रतिद्वंद्विता का नाम है

जगरनॉट बुक्स से हुसैन हक्कानी की किताब का हिंदी अनुवाद आया है- 'भारत vs. पाकिस्तान: हम क्यों दोस्त नहीं हो सकते?' पाकिस्तान के चार...

नज़्म

किसी को चाहते जाना क्या इंक़लाब नहीं?

आज पेश है ज़ीस्त की एक नज़्म, जिसका उनवान है 'इंक़लाब' - संपादक ======================================================= मुझसे इस वास्ते ख़फ़ा हैं हमसुख़न मेरे मैंने क्यों अपने क़लम से न लहू...