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सिक्स वर्ड स्टोरी के दौर में आठ सौ पन्नों का उपन्यास...

चंद्रकिशोर जायसवाल जी के उपन्यास 'सात फेरे' के ऊपर जाने माने लेखक, पत्रकार पुष्यमित्र की टिप्पणी- मॉडरेटर =============== आज सुबह चंद्रकिशोर जायसवाल का उपन्यास 'सात फेरे' पढ़...

गौहर रज़ा की ‘खामोशी’ गौहर रज़ा की नज्में

गौहर रज़ा एक संजीदा वैज्ञानिक हैं, शायर हैं. हिन्दुस्तान की धर्मनिरपेक्ष परम्परा की एक जीती जागती मिसाल. अभी हाल में राजपाल एंड संज से...

प्रियंका वाघेला की कुछ नई कविताएँ

प्रियंका वाघेला, चित्रकार व लेखिका हैं, वे इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय, खैरागढ़ से ग्राफिक्स में एम.एफ़ ए. स्नतकोत्तर हैं तथा फ्रीलांस पेंटर के रूप...

फिल्म समीक्षा

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समीक्षा

शायरी

धड़का था दिल कि प्यार का मौसम गुज़र गया

नश्तर ख़ानक़ाही एक बेचैन रूह का नाम है। जिसने अपनी शायरी से न सिर्फ़ उर्दू अदब की ख़िदमत की, बल्कि कई आवाज़ों को रोशनी...

नाटक

उन्नीसवां भारत रंग महोत्सव २०१७ : प्रथम चरण के नाटक

  भारत रंग महोत्सव के नाटकों का दिल्ली के दर्शकों को बेहद इन्तजार रहता है. इसके पहले दो दिनों के नाटकों पर जानी-मानी रंग समीक्षक,...

कथा-कहानी

अथ ‘ब्रह्मोद्य’ प्रश्नोत्तरी उपाख्यान: मृणाल पाण्डे की कथा श्रृंखला का उपसंहार                                         

जानी-मानी लेखिका मृणाल पाण्डे की कथा श्रृंखला हम पढ़ रहे थे. संस्कृत कथाओं की याद दिलाती हुई इस कथा में हीरामन तोता भी था,...

‘छबीला रंगबाज का शहर’ की एक कहानी: एक अंश

‘छबीला रंगबाज का शहर’ नाम ने मुझे बहुत आकर्षित किया. आज के दौर में जिस तरह से छोटी छोटी कहानियां लिखी जा रही हैं...

मार्केज़ की कहानी ‘मैं सिर्फ़ एक फ़ोन करने आई थी’

मार्केज मेरे प्रिय लेखकों में हैं और उनकी कई कहानियाँ हमारी सोच को बादल कर रख देती है। हमारी देखी भाली दुनिया को ऐसे...

पुस्तक अंश

मंटो! अरे वह अश्लील लेखक, वह पोर्नोग्राफर!

कुछ साल पहले रबिशंकर बल के उपन्यास 'दोजख्ननामा' का हिंदी अनुवाद आया था. उपन्यास में मंटो और ग़ालिब अपनी अपनी कब्रों से एक दूसरे...

‘द मिनिस्ट्री ऑफ़ अटमोस्ट हैप्पीनेस’ के एक अंश का हिंदी अनुवाद

बीस साल बाद अरुंधति राय का दूसरा उपन्यास आया है ‘द मिनिस्ट्री ऑफ़ अटमोस्ट हैप्पीनेस’. मैंने इसके एक अंश का अनुवाद किया है जो...

गांधी जी की पोती की किताब में गाँधी जी का चंपारण सत्याग्रह

आज महात्मा गांधी के चंपारण सत्याग्रह के सौ साल पूरे हो रहे हैं. देश भर में इसको याद किया जा रहा है, इसके बारे...

नज़्म

किसी को चाहते जाना क्या इंक़लाब नहीं?

आज पेश है ज़ीस्त की एक नज़्म, जिसका उनवान है 'इंक़लाब' - संपादक ======================================================= मुझसे इस वास्ते ख़फ़ा हैं हमसुख़न मेरे मैंने क्यों अपने क़लम से न लहू...