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जब सौ जासूस मरते होंगे तब एक कवि पैदा होता है...

चंद्रकांत देवताले की कविताओं पर विमलेन्दु का लिखा एक आत्मीय लेख- मॉडरेटर ======================================== साल 1993 का यह जून का महीना था जब चन्द्रकान्त देवताले से पहली...

विजया सिंह की कुछ नई कविताएँ

विजया सिंह चंडीगढ़ के एक कॉलेज में अंग्रेजी पढ़ाती हैं. सिनेमा में गहरी रूचि रखती हैं. कविताएँ कम लिखती हैं लेकिन ऐसे जैसे भाषा...

स्मिता सिन्हा की आठ नई कविताएँ

स्मिता सिन्हा की कविताएँ प्रमुख पत्र पत्रिकाओं में छपती रहती हैं, सराही जाती हैं. उनका एक अपना समकालीन तेवर है, संवेदना और भाषा है....

फिल्म समीक्षा

नाटक क्या सिनेमा का फाटक होता है?

  आज 'प्रभात खबर' अखबार में भारंगम के बहाने मैंने नाटक-नाटककारों पर लिखा है. आप यहाँ भी पढ़ सकते हैं- प्रभात रंजन  ================ ‘अपने यहाँ, विशेष रूप...

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समीक्षा

शायरी

युवा शायर #17 सग़ीर आलम की ग़ज़लें

युवा शायर सीरीज में आज पेश है सग़ीर आलम की ग़ज़लें - त्रिपुरारि ====================================================== ग़ज़ल-1 कैसे कैसे मंज़र मेरी आँखों में आ जाते हैं, यादों के...

नाटक

उन्नीसवां भारत रंग महोत्सव २०१७ : प्रथम चरण के नाटक

  भारत रंग महोत्सव के नाटकों का दिल्ली के दर्शकों को बेहद इन्तजार रहता है. इसके पहले दो दिनों के नाटकों पर जानी-मानी रंग समीक्षक,...

कथा-कहानी

कश्मीर और सेना की पृष्ठभूमि में एक कहानी ‘इक तो सजन मेरे पास नहीं...

गौतम राजऋषि सेना में कर्नल हैं. 'पाल ले इक रोग नादां' जैसे चर्चित ग़ज़ल संग्रह के शायर हैं. यह कहानी कश्मीर की पृष्ठभूमि में...

मदर्स डे और दिनकर की ‘रश्मिरथी’

मदर्स डे के दिन रामधारी सिंह 'दिनकर' की कृति 'रश्मिरथी' की याद भी आ जाती है. खासकर उसका पांचवां सर्ग, जिसमें कर्ण और कुंती...

बौद्धिकता से लबरेज़ दिल्ली की एक ‘पियाली’ शाम

सईद अयूब बहुत कल्पनाशील तरीके से पिछले कई सालों से साहित्यिक आयोजन करते रहे हैं. करीब एक महीने पहले जब उन्होंने बताया कि सीपी...

पुस्तक अंश

धर्मपाल की किताब ‘गौ-वध और अंग्रेज’ का एक अंश

गाय को लेकर इस गर्म माहौल में मुझे प्रसिद्ध गांधीवादी चिन्तक धर्मपाल की किताब ‘गौ वध और अंग्रेज’ की याद आई. जिसका प्रकाशन वाणी...

‘द मिनिस्ट्री ऑफ़ अटमोस्ट हैप्पीनेस’ के एक अंश का हिंदी अनुवाद

बीस साल बाद अरुंधति राय का दूसरा उपन्यास आया है ‘द मिनिस्ट्री ऑफ़ अटमोस्ट हैप्पीनेस’. मैंने इसके एक अंश का अनुवाद किया है जो...

देवदत्त पट्टनायक की सीता और उनका तीसरा निर्णय

देवदत्त पट्टनायक की पुस्तक सीता के पांच निर्णय का एक अंश. किताब राजपाल एंड सन्ज प्रकाशन से आई है. अंग्रेजी से इसका अनुवाद मैंने...

नज़्म

किसी को चाहते जाना क्या इंक़लाब नहीं?

आज पेश है ज़ीस्त की एक नज़्म, जिसका उनवान है 'इंक़लाब' - संपादक ======================================================= मुझसे इस वास्ते ख़फ़ा हैं हमसुख़न मेरे मैंने क्यों अपने क़लम से न लहू...