Recent Posts

उनके लिए साहित्य मिशन था प्रोफेशन नहीं

आज आधुनिक हिंदी-साहित्य के निर्माताओं में अग्रगण्य शिवपूजन सहाय की ग्रंथावली का लोकार्पण है. शिवपूजन सहाय हिंदी के वैसे लेखक-संपादक थे जिनके लिए साहित्य मिशन था प्रोफेशन नहीं. ऐसे विभूति की रचनाओं से गुज़रना हिंदी साहित्य के उस दौर से गुज़रना है जिस युग में हिंदी के क्लैसिक्स लिखे जा …

Read More »

कोई रूसो कोई हिटलर कोई खय्याम होता है

अदम गोंडवी की ग़ज़लों ने एक ज़माने में काफी शोहरत पाई थी. उस दौर की फिर याद इसलिए आ गई क्योंकि वाणी प्रकाशन ने उनकी शायरी की नई जिल्द छापी है ‘समय से मुठभेड़’ के नाम से. हालांकि इनमें ज़्यादातर गज़लें उनके पहले संग्रह ‘धरती की सतह पर’ से ही …

Read More »

क्या सचमुच युवा लेखक मुँह में चांदी का चम्मच लेकर पैदा हुआ है?

प्रतिष्ठित पत्रिका ‘कथन’ के नए अंक में परिचर्चा प्रकाशित हुई है नए कहानी आंदोलन की आवश्यकता को लेकर. इसके साथ प्रसिद्ध लेखक रमेश उपाध्याय जी का साक्षात्कार भी प्रकाशित हुआ है जिसमें उन्होंने एक प्रतिष्ठित पत्रिका के सम्पादकीय के हवाले से कहा है कि आज का युवा लेखक मुँह में …

Read More »