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विमलेश त्रिपाठी का स्तम्भ एक गुमनाम लेखक की डायरी-2

आज पढ़िए युवा कवि विमलेश त्रिपाठी की आत्मकथा की दूसरी किस्त। वे जानकी पुल के लिए यह साप्ताहिक स्तम्भ लिख रहे हैं- ===================== शब्दों की दुनिया ही हमारा आसरा   खेत-बधार और गली-गांव से अधिक की पहुंच नहीं थी हमारी। कभी-कभी छुपकर दोस्तों के साथ नदी चले जाते थे। वह …

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पहले प्रेम की दारुण मनोहारी वेदना का आख्यान : ‘कॉल मी बाई योर नेम’ और ‘कोबाल्ट ब्लू’

हाल में आई फ़िल्म ‘कोबाल्ट ब्लू’ और तक़रीबन पाँच साल पुरानी फ़िल्म ‘कॉल मी बाई योर नेम’ पर यह टिप्पणी युवा लेखिका और बेहद संवेदनशील फ़िल्म समीक्षक सुदीप्ति ने लिखी है। सुदीप्ति फ़िल्मों पर शानदार लिखती हैं लेकिन शिकायत यह है कि कम लिखती हैं। फ़िलहाल यह टिप्पणी पढ़िए- =================== …

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विशाखा मुलमुले की कुछ कविताएँ

विशाखा मुलमुले समकालीन कविता का जाना-पहचाना नाम है। आज उनकी कुछ कविताएँ पढ़िए- =================   1 ) जाने तक के लिए —————————-   जाने तक के लिए फूलों तुम दिखला दो अपनी रंग सुगन्ध कपास तुम घेर लो बन के कोमल वसन अंत समय तो द्वार बंद होंगे नासिका के …

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