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ग़ौर से देखिये ये नदी का कब्रिस्तान है

 गिरिराज  किराडू हिंदी युवा-कविता का ऐसा नाम है जिसने कविताओं के रूप-रंग को लेकर सबसे अधिक प्रयोग किए हैं, अभिव्यक्ति के खतरे निरंतर उठाते रहे हैं. इस बार उनकी कविताएँ कुछ नए अंदाज़ में- जानकी पुल. 1. कुफ़्र  कुछ हुआ चाहियेयहाँ  एक नदी बहती थी अब रेगिस्तान  है गौर से देखिये ये नदी  का …

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इंसान अपने आप में कितना सिमट गया

शिव कृष्ण बिस्सा मशहूर शायर शीन काफ निजाम के नाम से जाने जाते हैं. सूफियाना अंदाज़ के इस शायर की कुछ गज़लें प्रस्तुत हैं- जानकी पुल. 1.  पहले ज़मीन बांटी थी फिर घर भी बंट गया इंसान अपने आप में कितना सिमट गया. अब क्या हुआ कि खुद को मैं …

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निदा फाजली के शब्दों में शकील बदायूंनी का अक्स

निदा फाजली ने कुछ शायरों के ऊपर बहुत रोचक ढंग से लिखा है. यहाँ उनका लेख शायर-गीतकार शकील बदायूंनी पर. कुछ साल पहले वाणी प्रकाशन से उनकी एक किताब आई थी ‘चेहरे’ उसमें उनका यह लेख संकलित है.  ============= शेक्सपियर ने 1593 से 1600 के दरमियान एक सौ चौवन सॉनेट भी …

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