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बिकने के समय को मानना चाहिए जन्म का समय

हाल में जिन कवियों की कविताओं ने विशेष ध्यान खींचा है उनमें फरीद खां का नाम ज़रूर लिया जान चाहिए. उनकी कविताओं के कुछ रंग यहाँ प्रस्तुत हैं- जानकी पुल. सोने की खान एक कलाकार ने बड़ी साधना और लगन से यह गुर सीखा कि जिस पर हाथ रख दे, …

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हवाओं को मनाता हूं परिंदे रूठ जाते हैं

आज दुष्यंत की कुछ गज़लें-कुछ शेर. जीना, खोना-पाना- उनके शेरों में इनके बिम्ब अक्सर आते हैं. शायद दुष्यंत कुमार की तरह वे भी मानते हैं- ‘मैं जिसे ओढता-बिछाता हूँ/ वो गज़ल आपको सुनाता हूँ. 1 ”मेरे खयालो! जहां भी जाओ। मुझे न भूलो, जहां भी जाओ। थके पिता का उदास …

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संगीत के गांधी : भातखंडे

जयपुर से प्रेमचंद गाँधी के संपादन में ‘कुरजां’ नामक पत्रिका का प्रवेशांक आया है. ये शताब्दी स्मरण अंक है और इसमें हिंदी, उर्दू, अंग्रेजी, गुजराती, तेलुगू साहित्य की विराट परंपरा को आगे बढ़ाने वाले महानायकों को नमन करते हुए न केवल इन भाषाओं के मनीषी साहित्यकारों की रचनाएं जुटायी गयी …

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