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‘समन्वय’ में भोजपुरी और प्रकाश उदय

आज से इण्डिया हैबिटेट सेंटर का भारतीय भाषा महोत्सव ‘समन्वय’ शुरू हो रहा है. इसमें इस बार भोजपुरी के दुर्लभ कवि-लेखक प्रकाश उदय को सुनने का मौका भी मिलने वाला है. उनके साहित्य पर युवा कवि मृत्युंजय ने यह बहुत अच्छी टीप लिखी है. और आस्वाद के लिए उनकी पांच …

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स्त्री विमर्श सबसे ज़्यादा गलत समझा जाने वाला शब्द है

पिछले कुछ महीनों में ‘बिंदिया’ पत्रिका ने अपनी साहित्यिक प्रस्तुतियों से ध्यान खींचा है. जैसे कि नवम्बर अंक में प्रकाशित परिचर्चा जो कुछ समय पहले वरिष्ठ लेखिका मैत्रेयी पुष्पा द्वारा ‘जनसत्ता’ में लिखे गए उस लेख के सन्दर्भ में है जिसमें उन्होंने समकालीन लेखिकाओं के लेखन को लेकर अपनी असहमतियां-आपत्तियां दर्ज की थी. उनके …

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कुछ कविताएँ कुमार अनुपम की

कुमार अनुपम की कविताएँ समकालीन कविता में अपना एक अलग स्पेस रचती है- ‘अपने समय की शर्ट में एक्स्ट्रा बटन की तरह’. हिंदी कविताओं की अनेक धाराओं के स्वर उनकी कविताओं में दिखाई देते हैं जो उनकी एक अलग आवाज बनाते हैं. यहं उनकी कुछ कविताएँ- जानकी पुल. ============================================================= अशीर्षक बेहया …

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