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‘हैदर’ नहीं देखा तो देख आइए

‘हैदर’ के आये दो हफ्ते हो गए. अभी भी मल्टीप्लेक्स में उसे देखने के लिए लोग जुट रहे हैं. अभी भी लोग उसे देख देख कर उसके ऊपर लिख रहे हैं. युवा फिल्म पत्रकार सैयद एस. तौहीद ने देर से ही सही लेकिन ‘हैदर’ पर सम्यक टिप्पणी की है. आप …

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महाभूत चन्दन राय की कविताएं

इधर महाभूत चन्दन राय की कवितायेँ पढ़ी. पेशे से इंजीनियर चन्दन की कविताओं में समकालीनता का दबाव तो बहुत दिखता है लेकिन उनकी कविताओं में एक नया, अपना मुहावरा गढ़ने की जद्दोजहद भी दिखाई देती है. उम्मीद करता हूँ भविष्य में इनकी और बेहतर कवितायेँ पढने को मिलेंगी. फिलहाल इनकी …

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सिनेमा में वीर रस क्या होता है?

युवा लेखकों की एक बात मुझे प्रभावित करती है- वे बड़े फोकस्ड हैं. अपने धुन में काम करते रहते हैं. अब प्रचण्ड प्रवीर को ही लीजिये रस-सिद्धांत के आधार पर विश्व सिनेमा के विश्लेषण में लगे तो लगता है उसे पूरा किये बिना नहीं मानेंगे. आज वीर रस की फिल्मों …

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