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वीभत्स रस और विश्व सिनेमा

युवा लेखक प्रचण्ड प्रवीर इन दिनों बहुत रोचक ढंग से नौ रस के आधार पर विश्व सिनेमा का अध्ययन कर रहे हैं. आज वीभत्स रस के आधार पर विश्व सिनेमा की कुछ महत्वपूर्ण फिल्मों का विश्लेषण प्रस्तुत है- मॉडरेटर  =================== इस लेखमाला में अब तक आपने पढ़ा: 1.                  भारतीय दृष्टिकोण …

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‘कई चाँद थे सरे आसमां’ के बहाने कुछ मौजू बातें

हाल के बरसों में जिस एक उपन्यास ने बड़ी सरगर्मी पैदा की वह शम्सुर्ररहमान फारुकी का उपन्यास ‘कई चाँद थे सरे आसमां‘ है. मूल रूप से उर्दू में लिखे गए इस उपन्यास के हिंदी और अंग्रेजी संस्करणों की भी धूम मची. इस उपन्यास पर युवा लेखक शशिभूषण द्विवेदी ने एक बढ़िया …

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गुलजार की पहुँच हर पीढ़ी, हर दिल तक है!

गुलजार शायद ऐसे अकेले लेखक-कलाकार हैं जिनसे हर उम्र, हर सोच के लोग गहरे मुतास्सिर हैं. जीते जी वे एक ऐसे मिथक में बदल गए हैं सब जिनके मानी अपन अपने ढंग से समझना चाहते हैं. यकीन न हो तो इस युवा लेखक अंजुम शर्मा का लेख पढ़ लीजिये और …

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